9 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पंडित किशन महाराज: वचन की खातिर ठुकराया था अमेरिका का बड़ा ऑफर, बनारस घराने के इस महान तबला वादक की अमर विरासत

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पंडित किशन महाराज: वचन की खातिर ठुकराया था अमेरिका का बड़ा ऑफर, बनारस घराने के इस महान तबला वादक की अमर विरासत

भारतीय शास्त्रीय संगीत के महान तबला वादक पंडित किशन महाराज का निधन 9 अप्रैल 2008 को वाराणसी में हुआ था। 84 वर्ष की आयु में दुनिया को अलविदा कहने वाले इस महान साधक ने बनारस घराने की तबला परंपरा को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। उनकी थाप आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में गूँजती है।

बनारस की गलियों से उठी एक महान आवाज़

पंडित किशन महाराज का जन्म 3 सितंबर 1923 को बनारस (वर्तमान वाराणसी) के कबीर चौरा इलाके में एक संगीत परिवार में हुआ था। उनके पिता हरि महाराज और माता अंजोरा देवी थीं। संगीत उनके रग-रग में समाया हुआ था, लेकिन नियति ने उन्हें बहुत जल्दी कठोर परीक्षा में डाल दिया — महज छह वर्ष की आयु में ही उनके पिता का निधन हो गया।

इसके बाद उनका पालन-पोषण उनके चाचा कंठे महाराज ने किया, जो स्वयं भी तबला वादन के शिखर पुरुष थे। उन्हीं की छत्रछाया में किशन महाराज को संगीत की पहली औपचारिक शिक्षा मिली। बचपन से ही उनकी उंगलियों में एक असाधारण जादू था, जिसे देखकर जानकार कह देते थे कि यह बालक एक दिन इतिहास रचेगा।

बनारस घराने की 'गंभीर शैली' के अग्रदूत

किशन महाराज ने धीरे-धीरे तबला वादन में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। बनारस घराने की परंपरा के अनुरूप उन्होंने गहराई, ताल और लय पर विशेष साधना की। उनकी वादन शैली को 'गंभीर शैली' कहा जाता था, जिसमें बाएँ हाथ के उपयोग पर विशेष बल दिया जाता था — एक ऐसी विशेषता जो उन्हें समकालीन तबला वादकों से अलग करती थी।

वे केवल संगत करने वाले कलाकार नहीं थे, बल्कि उनमें पूरे कार्यक्रम को दिशा और ऊर्जा देने की अद्भुत क्षमता थी। उन्होंने भारत के लगभग हर प्रमुख शास्त्रीय कलाकार के साथ मंच साझा किया और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारतीय शास्त्रीय संगीत की प्रतिष्ठा को और बुलंद किया। उनकी थाप में तकनीक और भावना का ऐसा संगम था कि हर ताल खुद-ब-खुद बोलती प्रतीत होती थी।

वचन की खातिर ठुकराया अमेरिका का बड़ा ऑफर

किशन महाराज का जीवन केवल संगीत की साधना का नहीं, बल्कि अद्वितीय नैतिक मूल्यों का भी आख्यान है। उनके जीवन में कई ऐसे प्रसंग हैं जो आज भी लोगों को प्रेरित करते हैं। एक बार उन्होंने अपने ही परिवार की शादी की दावत छोड़ दी, क्योंकि उसी समय उन्हें एक संगीत कार्यक्रम में उपस्थित होना था। परिवार के पूछने पर उन्होंने कहा था —

राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 2 सप्ताह पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 1 साल पहले