नीलगिरी के ओरासोलाई में तेंदुए का CCTV वीडियो वायरल, ग्रामीणों ने वन विभाग से तत्काल कार्रवाई की माँग की
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के नीलगिरी जिले में कोटागिरी के निकट ओरासोलाई गाँव में एक तेंदुए का सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद स्थानीय निवासियों में भय और असुरक्षा की भावना गहरा गई है। 11 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो में तेंदुआ एक घर के सामने सड़क पर चलते और रिहायशी इलाके से गुज़रते हुए स्पष्ट दिख रहा है। ग्रामीणों ने वन विभाग से माँग की है कि इस तेंदुए को तत्काल वापस जंगल में भेजा जाए।
मुख्य घटनाक्रम
सीसीटीवी कैमरे में क़ैद इस वीडियो के वायरल होने के बाद ओरासोलाई और आसपास के गाँवों में दहशत का माहौल है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उनके इलाके में तेंदुए और भालू अक्सर आबादी वाले क्षेत्रों में घुस आते हैं। इस ताज़ा घटना में किसी के घायल होने या हमले की कोई सूचना नहीं है, लेकिन ग्रामीणों की चिंता स्वाभाविक है क्योंकि यह क्षेत्र मानव-वन्यजीव संघर्ष का पुराना गवाह रहा है।
नीलगिरी और वालपराई में पूर्व के घातक हमले
गौरतलब है कि तमिलनाडु के बागान क्षेत्रों में तेंदुओं के हमलों का एक दर्दनाक इतिहास रहा है। नीलगिरी में 6 जनवरी 2024 को पंडालुर के पास बिथेरकाड फॉरेस्ट रेंज में एक तेंदुए ने तीन वर्षीय नैंसी पर हमला किया था, जो अपनी माँ के साथ चाय बागान से घर लौट रही थी — इस हमले में उसकी मौत हो गई थी। इससे कुछ दिन पूर्व 21 दिसंबर 2023 को एलामन्ना में सरिता पर हमला हुआ था, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हुई थीं और 29 दिसंबर 2023 को उनकी मृत्यु हो गई थी। इन हमलों के बाद वन विभाग ने एक तेंदुए को पकड़कर चेन्नई के निकट अरिगनार अन्ना ज़ूलॉजिकल पार्क के रेस्क्यू सेंटर में भेजा था।
कोयंबटूर जिले के वालपराई में भी ऐसी घटनाएँ हुई हैं। अक्टूबर 2024 में एक चाय बागान में अप्सरा नामक बच्ची की मौत हुई थी। जून 2025 में पचमलाई एस्टेट में चार वर्षीय रोशनी कुमारी को घर के पास तेंदुआ उठा ले गया था — अगली सुबह तलाशी अभियान में उसका शव मिला था। दिसंबर 2025 में वालपराई के पास इयेरपाड़ी टी एस्टेट में मज़दूर क्वार्टर के बाहर खेलते पाँच वर्षीय सैफुल आलम की तेंदुए के हमले में मृत्यु हो गई थी।
इसके अलावा जुलाई 2025 में इरोड जिले के हसनूर में सत्यमंगलम टाइगर रिज़र्व के समीप तेंदुए ने दो बछड़ों को मार डाला था और एक को घायल कर दिया था, जो बागान क्षेत्रों तक सीमित न रहकर पशुपालकों के लिए भी ख़तरा बनते जा रहे हैं।
ग्रामीणों की माँग और वन विभाग से अपील
ओरासोलाई के निवासियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि घरों के इतने नज़दीक तेंदुए की उपस्थिति किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकती है। उनकी माँग है कि वन विभाग न केवल इस तेंदुए को जंगल में वापस भेजे, बल्कि क्षेत्र में नियमित निगरानी और चेतावनी तंत्र भी स्थापित करे। ग्रामीणों का जोर इस बात पर भी है कि कार्रवाई ऐसी हो जिसमें न तो स्थानीय लोगों को और न ही तेंदुए को कोई नुकसान पहुँचे।
आम जनता पर असर और विशेषज्ञ परिप्रेक्ष्य
यह ऐसे समय में आया है जब नीलगिरी और समीपवर्ती ज़िलों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएँ लगातार चर्चा में हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, बागान और जंगल की सीमा पर बसी बस्तियों में रहने वाले परिवार — विशेष रूप से चाय और कॉफी बागान मज़दूर — सबसे अधिक जोखिम में हैं। आलोचकों का कहना है कि वन विभाग की प्रतिक्रिया अब तक मुख्यतः घटना के बाद की रही है, जबकि ज़रूरत है निवारक और दीर्घकालिक प्रबंधन नीति की।
क्या होगा आगे
वन विभाग के अधिकारियों की ओर से इस ताज़ा मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा है। ओरासोलाई में सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। यह घटना एक बार फिर नीलगिरी के वन-ग्राम सीमांत पर दशकों पुरानी समस्या को उजागर करती है — और आने वाले दिनों में वन विभाग की कार्रवाई ही बताएगी कि प्रशासन इस बार केवल प्रतिक्रिया देगा या रोकथाम की दिशा में भी कदम उठाएगा।