20 सितंबर 2026
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मेट्टूर में तेंदुए के हमले की आशंका: कन्नामूची गांव में 10 से अधिक बकरियाँ-बछड़े हताहत, वन विभाग ने 5 पिंजरे लगाए

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मेट्टूर में तेंदुए के हमले की आशंका: कन्नामूची गांव में 10 से अधिक बकरियाँ-बछड़े हताहत, वन विभाग ने 5 पिंजरे लगाए

सारांश

तमिलनाडु के मेट्टूर के पास कन्नामूची गांव में कथित तेंदुए के हमले ने 10 से अधिक बकरियाँ और दो बछड़े लील लिए। 717 हेक्टेयर वन भूमि से घिरे इस गांव में वन विभाग ने 5 पिंजरे और कैमरा ट्रैप लगाए हैं, पर अभी तक तेंदुए की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई।

मुख्य बातें

तमिलनाडु के मेट्टूर के निकट कन्नामूची गांव में कथित तेंदुए के हमले में 10 से अधिक बकरियाँ और 2 बछड़े मारे गए।
मेट्टूर फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर सेंगोट्टैयान ने बताया कि गांव के आसपास 717 हेक्टेयर वन भूमि है, जो इरोड फॉरेस्ट रिजर्व से जुड़ी है।
वन विभाग ने गांव में 5 रणनीतिक स्थानों पर पिंजरे और कई जगह कैमरा ट्रैप लगाए हैं।
अधिकारियों को संदेह है कि जानवर तेंदुआ है, किंतु आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
ग्रामीणों को सुबह जल्दी व शाम देर से जंगल के पास अकेले न जाने और रात में पशुओं को सुरक्षित बाड़े में रखने की सलाह दी गई है।

तमिलनाडु के मेट्टूर के निकट कोलाथुर क्षेत्र के कन्नामूची गांव में कथित तेंदुए के हमले की आशंका के बाद मेट्टूर वन विभाग ने 20 सितंबर 2026 को निगरानी व्यवस्था सख्त कर दी है। अधिकारियों के अनुसार गांव में 10 से अधिक बकरियों, दो बछड़ों और कई कुत्तों की असामान्य परिस्थितियों में मौत हो चुकी है, जिसके पीछे किसी बड़े जंगली जानवर का हाथ होने का संदेह जताया जा रहा है।

घटनाक्रम और प्रभावित इलाका

कन्नामूची एक छोटा गांव है जो चारों ओर से घने जंगलों से घिरा है। मेट्टूर फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर सेंगोट्टैयान ने बताया कि गांव और उसके आसपास कुल 717 हेक्टेयर वन भूमि है, जो इरोड फॉरेस्ट रिजर्व से आने वाले जंगली जानवरों के लिए एक संभावित मार्ग के रूप में काम कर सकती है। अधिकारियों को संदेह है कि एक तेंदुआ शिकार की तलाश में इरोड रिजर्व से भटककर कन्नामूची के जंगल में दाखिल हुआ और पर्याप्त शिकार न मिलने पर पास के खेतों तक पहुँच गया।

बकरियों और बछड़ों के अलावा मुर्गियों और कुत्तों पर भी इस अज्ञात जानवर के हमले की बात सामने आई है। गौरतलब है कि तेंदुए की मौजूदगी की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, किंतु अधिकारियों का कहना है कि हमलों के तरीके से इलाके में किसी बड़े मांसाहारी वन्यजीव के होने का पुख्ता अंदेशा है।

वन विभाग की कार्रवाई

ग्रामीणों की शिकायत मिलने के बाद वन विभाग के दल ने प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया और पशुओं की मौत के कारणों की जाँच शुरू की। एहतियाती उपाय के रूप में गांव तथा आसपास 5 रणनीतिक स्थानों पर पिंजरे लगाए गए हैं। जानवर की गतिविधि दर्ज करने, उसकी प्रजाति की पुष्टि करने और उसके आवाजाही के पैटर्न को समझने के लिए कई जगह कैमरा ट्रैप भी स्थापित किए गए हैं।

वनकर्मी गांव, आसपास के खेतों और जंगल के किनारे लगातार गश्त कर रहे हैं। अधिकारी ग्रामीणों से भी सक्रिय रूप से जानकारी एकत्र कर रहे हैं — जैसे जानवर को प्रत्यक्ष रूप से देखा जाना, असामान्य आवाजें या ताज़े पंजों के निशान।

ग्रामीणों में दहशत, सलाह जारी

इन घटनाओं के बाद गांव के लोगों में, विशेष रूप से उन किसानों और पशुपालकों में, भय का माहौल है जिनके घर और खेत जंगल की सीमा से लगे हुए हैं। वन विभाग ने ग्रामीणों को सतर्क रहने और सुबह जल्दी व शाम देर से जंगल की सीमा के पास अकेले न जाने की सलाह दी है। किसानों से अनुरोध किया गया है कि वे रात के समय बकरियों, बछड़ों और अन्य पशुओं को सुरक्षित बाड़े में बंद रखें।

आगे क्या होगा

अधिकारियों के अनुसार जब तक संदिग्ध जानवर की प्रजाति की पहचान नहीं हो जाती और उसे सुरक्षित तरीके से पकड़ नहीं लिया जाता, तब तक निगरानी अभियान जारी रहेगा। विभाग का ज़ोर पशुओं की और मौतें रोकने तथा जंगल के करीब रहने वाले निवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर है। यह घटना इस ओर भी ध्यान दिलाती है कि मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं से निपटने के लिए तमिलनाडु के वन क्षेत्रों में दीर्घकालिक प्रबंधन रणनीति की आवश्यकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और पिंजरे व कैमरा ट्रैप जैसे प्रतिक्रियात्मक उपाय अक्सर स्थायी समाधान नहीं दे पाते। असली सवाल यह है कि क्या वन विभाग के पास पर्याप्त कर्मचारी और संसाधन हैं जो व्यापक बफर ज़ोन प्रबंधन और ग्रामीणों के लिए दीर्घकालिक मुआवज़ा तंत्र सुनिश्चित कर सकें। पशुपालकों का आर्थिक नुकसान — जो अभी तक आँकड़ों में दर्ज नहीं है — इस खबर का वह पहलू है जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ कर देती है।
RashtraPress
20 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मेट्टूर के कन्नामूची गांव में क्या हुआ?
तमिलनाडु के मेट्टूर के निकट कन्नामूची गांव में 10 से अधिक बकरियाँ, दो बछड़े और कई कुत्तों की मौत हुई है, जिसके पीछे तेंदुए का हमला माना जा रहा है। हालांकि अभी तक तेंदुए की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन वन विभाग ने निगरानी तेज कर दी है।
तेंदुआ कहाँ से आया होगा?
अधिकारियों का मानना है कि यह जानवर संभवतः पास के इरोड फॉरेस्ट रिजर्व से शिकार की तलाश में भटकते हुए गांव में पहुँचा। कन्नामूची के आसपास 717 हेक्टेयर वन भूमि है, जो इरोड रिजर्व से जुड़ी है और जंगली जानवरों के आने-जाने का संभावित मार्ग बनती है।
वन विभाग ने क्या-क्या कदम उठाए हैं?
वन विभाग ने गांव और आसपास 5 रणनीतिक स्थानों पर पिंजरे और कई जगह कैमरा ट्रैप लगाए हैं। वनकर्मी गांव, खेतों और जंगल के किनारे लगातार गश्त कर रहे हैं और ग्रामीणों से जानवर की गतिविधि की जानकारी जुटा रहे हैं।
ग्रामीणों को क्या सावधानियाँ बरतने की सलाह दी गई है?
ग्रामीणों को सुबह जल्दी और शाम देर से जंगल की सीमा के पास अकेले न जाने की सलाह दी गई है। किसानों से कहा गया है कि रात के समय बकरियों, बछड़ों और अन्य पशुओं को सुरक्षित बाड़े में बंद रखें।
क्या तेंदुए की पुष्टि हो गई है?
नहीं, अभी तक तेंदुए की मौजूदगी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अधिकारियों का कहना है कि हमलों के तरीके से किसी बड़े जंगली जानवर की उपस्थिति का अंदेशा है, और कैमरा ट्रैप से जानवर की प्रजाति की पुष्टि होने तक निगरानी जारी रहेगी।
राष्ट्र प्रेस
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