क्या लेफ्टिनेंट जनरल अरविंद चौहान ने नसीराबाद में ब्रिगेड की तैयारी का जायजा लिया?
सारांश
मुख्य बातें
अजमेर, २५ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। लेफ्टिनेंट जनरल अरविंद चौहान ने रविवार को नसीराबाद मिलिट्री स्टेशन का दौरा किया, जहां उन्होंने तैनात लॉजिस्टिक यूनिट्स की तैयारियों का परीक्षण किया। इस अवसर पर उन्होंने ड्रोन तकनीक के उपयोग, प्रशिक्षण की व्यवस्था और जवानों के कल्याण पर विशेष ध्यान दिया। उन्होंने अधिकारियों और सैनिकों से भविष्य की चुनौतियों के लिए स्वयं को तैयार रखने और आधुनिक तकनीक को तेजी से अपनाने का आह्वान किया।
दक्षिणी कमान भारतीय सेना ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर जानकारी दी कि लेफ्टिनेंट जनरल अरविंद चौहान, वाईएसएम, एसएम, जनरल ऑफिसर कमांडिंग सुदर्शन चक्र कोर, ने रविवार को नसीराबाद मिलिट्री स्टेशन का दौरा किया। यहां उन्होंने 'सबसे बेहतर ब्रिगेड' की तैयारी का जायजा लिया, जो फर्स्ट टू स्ट्राइक ब्रिगेड का हिस्सा है।
इसके साथ ही लेफ्टिनेंट जनरल अरविंद चौहान ने कुछ महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक यूनिट्स का भी निरीक्षण किया। इस दौरान उन्हें ऑपरेशनल जिम्मेदारियों, ट्रेनिंग के विशेष पहलुओं, आधारभूत संरचना में सुधार और जवानों की भलाई से संबंधित योजनाओं की पूरी जानकारी दी गई।
इसके बाद जनरल चौहान ने एक कैपेबिलिटी डेवलपमेंट कॉन्फ्रेंस की अध्यक्षता की, जिसमें सुदर्शन चक्र कोर के सभी फॉर्मेशन कमांडर मौजूद थे। उन्होंने इस मौके पर ड्रोन जैसे अनमैन्ड एरियल सिस्टम्स (यूएएस) और इनके काउंटर-यूएएस सिस्टम्स की महत्वता पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि रिपेयर और रीजेनरेशन की व्यवस्था को मजबूत किया जाना चाहिए, ताकि तकनीक का सही उपयोग हो सके। उन्होंने प्रशिक्षण के लिए भी बेहतर सुविधाएं विकसित करने पर जोर दिया।
जनरल ने यह भी बताया कि अलग-अलग हथियारों और टुकड़ियों के बीच तालमेल, यानी कम्बाइंड आर्म्स इंटीग्रेशन, बेहद आवश्यक है ताकि ऑपरेशन्स अधिक प्रभावी बन सकें। उनका कहना था कि बदलती लड़ाई की परिस्थितियों में ऑपरेशनल एफेक्टिवनेस बढ़ाना जरूरी है। उन्होंने जवानों को भविष्य के लिए तैयार रहने और हर प्रकार की नई चुनौतियों के लिए अनुकूल होने की सलाह दी।
इस दौरे के दौरान, जीओसी ने जवानों के मनोबल, उनकी ट्रेनिंग और वेलफेयर पर भी बात की। उन्होंने कहा कि नई तकनीक और बेहतर ट्रेनिंग से ही फौज की ताकत बढ़ती है और मिशन में सफलता प्राप्त होती है। उन्होंने सभी कमांडरों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्र में नई तकनीक और आधुनिक रणनीतियों को लागू करें।