लोन फ्रॉड मामला: दिल्ली कोर्ट ने अमिताभ झुनझुनवाला और अमित बापना की ईडी हिरासत 15 मई तक बढ़ाई

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लोन फ्रॉड मामला: दिल्ली कोर्ट ने अमिताभ झुनझुनवाला और अमित बापना की ईडी हिरासत 15 मई तक बढ़ाई

सारांश

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने रिलायंस ग्रुप के दो पूर्व शीर्ष अधिकारियों — अमिताभ झुनझुनवाला और अमित बापना — की ईडी हिरासत 15 मई तक बढ़ा दी है। आरएचएफएल मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एलआईसी को ₹3,750 करोड़ के नुकसान का आरोप है और अनिल अंबानी से भी पूछताछ हो चुकी है।

Key Takeaways

राउज एवेन्यू कोर्ट ने 2 मई को अमिताभ झुनझुनवाला और अमित बापना की न्यायिक हिरासत 15 मई 2025 तक बढ़ाई। मामला आरएचएफएल और आरसीएफएल में कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा; एलआईसी को ₹3,750 करोड़ के नुकसान का आरोप। झुनझुनवाला खराब स्वास्थ्य के कारण वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेश हुए; कोर्ट ने जेल प्रशासन से स्वास्थ्य रिपोर्ट माँगी। रिलायंस ग्रुप ने कहा — झुनझुनवाला ने दिसंबर 2019 में और बापना ने सितंबर 2019 में कंपनी छोड़ी, अब किसी ग्रुप कंपनी से संबंध नहीं। अनिल अंबानी से भी इस मामले में पहले पूछताछ की जा चुकी है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली की एक विशेष अदालत ने शनिवार, 2 मई को अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस ग्रुप के दो पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों — अमिताभ झुनझुनवाला और अमित बापना — की न्यायिक हिरासत 15 मई 2025 तक बढ़ा दी है। यह मामला रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (आरएचएफएल) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (आरसीएफएल) में कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा है।

कोर्ट में क्या हुआ

राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष पीएमएलए न्यायाधीश ने ईडी की हिरासत विस्तार याचिका को स्वीकार करते हुए दोनों आरोपियों की न्यायिक हिरासत की अवधि बढ़ाने की अनुमति दी। दोनों को उनकी पूर्व हिरासत अवधि समाप्त होने के बाद अदालत के समक्ष पेश किया गया।

कथित तौर पर झुनझुनवाला को खराब स्वास्थ्य के कारण वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश किया गया। कोर्ट ने इस पर संज्ञान लेते हुए जेल प्रशासन को उनकी स्वास्थ्य रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

मामले की पृष्ठभूमि

ईडी ने दोनों अधिकारियों को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (पीएमएलए) के तहत गिरफ्तार किया था। यह जाँच केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर आगे बढ़ी। जाँच एजेंसियों के अनुसार, आरोप है कि रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) से जुड़े एक मामले में भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) को ₹3,750 करोड़ का नुकसान हुआ। इस मामले में अनिल अंबानी से भी पहले पूछताछ की जा चुकी है।

गौरतलब है कि ईडी ने दोनों को उस समय गिरफ्तार किया जब जाँच में कथित तौर पर यह सामने आया कि वे बैंक ऋण राशि के दुरुपयोग और मनी लॉन्ड्रिंग में संलिप्त हो सकते हैं।

दोनों आरोपियों की भूमिका

सूत्रों के अनुसार, अमिताभ झुनझुनवाला रिलायंस ग्रुप के ग्रुप मैनेजिंग डायरेक्टर तथा रिलायंस कैपिटल के वाइस चेयरमैन और डायरेक्टर रह चुके हैं। उस दौरान कंपनी के प्रमुख वित्तीय निर्णयों में उनकी महत्त्वपूर्ण भूमिका बताई जाती है।

अमित बापना रिलायंस कैपिटल के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (सीएफओ) और आरएचएफएल के डायरेक्टर रह चुके हैं। उन पर भी जाँच के दायरे में आने वाले वित्तीय फैसलों में शामिल होने का आरोप है।

रिलायंस ग्रुप का पक्ष

अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस ग्रुप ने स्पष्ट किया है कि झुनझुनवाला और बापना अब समूह की किसी भी कंपनी से संबद्ध नहीं हैं। ग्रुप के बयान के अनुसार, झुनझुनवाला ने दिसंबर 2019 में और बापना ने सितंबर 2019 में कंपनी छोड़ दी थी। ग्रुप ने यह भी कहा कि इन दोनों का रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड तथा रिलायंस पावर लिमिटेड समेत किसी भी कंपनी से अब कोई संबंध नहीं है।

आगे क्या होगा

मामले की अगली सुनवाई 15 मई को निर्धारित है, जब दोनों आरोपियों को पुनः अदालत के सामने पेश किया जाएगा। यह मामला उस व्यापक जाँच का हिस्सा है जिसमें ईडी और सीबीआई रिलायंस ग्रुप की वित्तीय कंपनियों में कथित अनियमितताओं की परतें उधेड़ने में जुटी हैं।

Point of View

कानूनी दृष्टि से प्रासंगिक हो सकता है, लेकिन यह उस दौर के निर्णयों की जवाबदेही से मुक्ति नहीं देता जब कथित गड़बड़ियाँ हुईं। एलआईसी जैसी सार्वजनिक संस्था को ₹3,750 करोड़ के नुकसान का आरोप यह भी दर्शाता है कि इस मामले का असर आम पॉलिसीधारकों तक पहुँचता है। ईडी और सीबीआई की समानांतर जाँच के बावजूद अब तक मुख्य आरोपियों के विरुद्ध आरोप-पत्र दाखिल होने में विलंब, न्यायिक प्रक्रिया की गति पर भी सवाल खड़ा करता है।
NationPress
02/05/2026

Frequently Asked Questions

अमिताभ झुनझुनवाला और अमित बापना को किस मामले में गिरफ्तार किया गया है?
दोनों को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (पीएमएलए) के तहत रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (आरएचएफएल) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (आरसीएफएल) में कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में गिरफ्तार किया गया है। यह जाँच सीबीआई द्वारा दर्ज प्राथमिकी पर आधारित है।
दिल्ली कोर्ट ने हिरासत क्यों बढ़ाई?
राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष पीएमएलए न्यायाधीश ने ईडी की हिरासत विस्तार याचिका स्वीकार करते हुए 15 मई 2025 तक हिरासत बढ़ाई, ताकि जाँच एजेंसी आगे की पूछताछ जारी रख सके। अदालत ने झुनझुनवाला के खराब स्वास्थ्य को देखते हुए जेल प्रशासन से स्वास्थ्य रिपोर्ट भी माँगी है।
इस मामले में एलआईसी को कितना नुकसान हुआ बताया जा रहा है?
सीबीआई के आरोपों के अनुसार, रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) से जुड़े मामले में भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) को ₹3,750 करोड़ का नुकसान हुआ। यह आरोप अभी जाँच के दायरे में है और अदालत में साबित होना बाकी है।
क्या अनिल अंबानी इस मामले में आरोपी हैं?
अनिल अंबानी से इस मामले में पहले पूछताछ की जा चुकी है और सीबीआई ने उनके खिलाफ भी मामला दर्ज किया है। हालाँकि, फिलहाल हिरासत में उनके दो पूर्व सहयोगी — झुनझुनवाला और बापना — हैं।
रिलायंस ग्रुप का इस मामले में क्या कहना है?
रिलायंस ग्रुप ने कहा है कि झुनझुनवाला ने दिसंबर 2019 में और बापना ने सितंबर 2019 में कंपनी छोड़ दी थी, और अब उनका किसी भी ग्रुप कंपनी — जिसमें रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर और रिलायंस पावर शामिल हैं — से कोई संबंध नहीं है।
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