क्या लोकपाल ने निशिकांत दुबे के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति की शिकायत खारिज की?

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क्या लोकपाल ने निशिकांत दुबे के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति की शिकायत खारिज की?

सारांश

लोकपाल ने झारखंड के भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति की शिकायत को खारिज कर दिया है। एक्टिविस्ट अमिताभ ठाकुर द्वारा दायर की गई इस शिकायत में दुबे पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। जानिए इस फैसले के पीछे की वजहें और लोकपाल का महत्वपूर्ण निर्देश।

Key Takeaways

  • लोकपाल ने शिकायत को खारिज किया।
  • आरोप बेबुनियाद और तुच्छ पाए गए।
  • आवश्यकता है ठोस सबूतों की।
  • राजनीतिक दुश्मनी की बू मिली।
  • लोकपाल ने गोपनीयता के उल्लंघन को भी नोट किया।

नई दिल्ली, 14 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। लोकपाल ने झारखंड के गोड्डा से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के खिलाफ दायर एक शिकायत को खारिज कर दिया है। यह शिकायत एक्टिविस्ट अमिताभ ठाकुर द्वारा की गई थी, जिसमें दुबे पर आय से अधिक संपत्ति बनाने का आरोप लगाया गया था।

लोकपाल की जस्टिस एएम खानविलकर की अध्यक्षता वाली बेंच ने जारी किए गए 134 पन्नों के विस्तृत आदेश में कहा कि आरोप बेबुनियाद, तुच्छ और परेशान करने वाले हैं। लोकपाल ने पाया कि शिकायत मुख्य रूप से सांसद की पत्नी की संपत्ति पर केंद्रित थी, जबकि लोकपाल का अधिकार क्षेत्र केवल सांसद जैसे सार्वजनिक पदाधिकारियों पर लागू होता है।

शिकायत दुबे के 2009 से 2024 तक के चुनावी हलफनामों पर आधारित थी, जिसमें उनकी पत्नी की संपत्ति में बिना बताए बढ़ोतरी का दावा किया गया था। जांच में लोकपाल को सांसद दुबे की अपनी संपत्ति में कोई बड़ी बढ़ोतरी या आय से अधिक संपत्ति का कोई ठोस सबूत नहीं मिला। केवल मामूली बदलाव ही नजर आए।

आदेश में अमिताभ ठाकुर की आलोचना करते हुए कहा गया कि उन्होंने सार्वजनिक जानकारी के आधार पर बिना ठीक से जांचे दावे किए। लोकपाल ने यह भी माना कि शिकायत में राजनीतिक या व्यक्तिगत दुश्मनी की बू आती है। साथ ही ठाकुर ने शिकायत को सोशल मीडिया पर सार्वजनिक करके गोपनीयता के नियमों का उल्लंघन किया।

लोकपाल ने ठाकुर को जारी किए गए कारण बताओ नोटिस को खारिज कर दिया, लेकिन सांसद निशिकांत दुबे को गोपनीयता भंग और मानहानि के लिए ठाकुर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करने की पूरी छूट दे दी।

आदेश में लोकपाल ने सार्वजनिक पदाधिकारियों की ईमानदारी की रक्षा करने पर जोर दिया और ठाकुर के अड़ियल रवैये को अस्वीकार किया। लोकपाल ने स्पष्ट किया कि ऐसी शिकायतें बिना ठोस आधार के दाखिल नहीं की जानी चाहिए। यह फैसला सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता और जिम्मेदारी के महत्व को दोहराता है।

Point of View

मेरा मानना है कि लोकपाल का यह निर्णय सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता और जिम्मेदारी को बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। ऐसे मामलों में ठोस सबूत होना आवश्यक है, ताकि समाज में विश्वास बना रहे।
NationPress
14/01/2026

Frequently Asked Questions

लोकपाल ने निशिकांत दुबे के खिलाफ शिकायत क्यों खारिज की?
लोकपाल ने शिकायत को बेबुनियाद और तुच्छ बताते हुए खारिज किया।
क्या शिकायत में राजनीतिक दुश्मनी की बू थी?
हां, लोकपाल ने माना कि शिकायत में राजनीतिक या व्यक्तिगत दुश्मनी की बू आती है।
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