लखनऊ: दारुल उलूम फरंगी महल में तिरंगा पेंटिंग प्रतियोगिता, स्वतंत्रता दिवस से पहले बच्चों का देशप्रेम उमड़ा
सारांश
मुख्य बातें
लखनऊ के ऐतिहासिक दारुल उलूम फरंगी महल ईदगाह में 13 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर तिरंगा पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में बच्चों ने तिरंगे की थीम पर रंग-बिरंगी पेंटिंग बनाकर अपना देशप्रेम व्यक्त किया। इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया की ओर से आयोजित यह तीन दिवसीय जश्न-ए-आजादी कार्यक्रम का पहला चरण था।
कार्यक्रम का आयोजन और स्वरूप
इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने बताया कि हर वर्ष 15 अगस्त और 26 जनवरी के अवसर पर दारुल उलूम फरंगी महल में तीन दिनों का विशेष कार्यक्रम आयोजित होता है। इस वर्ष भी उसी परंपरा को निभाते हुए पेंटिंग प्रतियोगिता से शुरुआत की गई। उन्होंने कहा, 'छात्र बहुत उत्साह के साथ तिरंगा बना और पेंट कर रहे हैं, जिसके बाद बच्चों को इनाम दिए जाएंगे। इसका मकसद बच्चों के दिलों में अपने देश के झंडे, तिरंगे के प्रति प्यार और लगाव पैदा करना भी है।'
कार्यक्रम में मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली सहित ईदगाह के अन्य धर्मगुरु भी उपस्थित रहे। यह आयोजन पुराने लखनऊ में सांप्रदायिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बनकर उभरा।
बच्चों की भावनाएँ और प्रस्तुतियाँ
छात्रा नफिजा ने अपनी भावनाएँ साझा करते हुए कहा, 'हम लोग सिर्फ आज ही नहीं, कभी भी हमारे देश से जुड़ा कोई भी कार्यक्रम होता है या कुछ भी होता है, हम हमेशा गर्व महसूस करते हैं। आज भी हमें काफी गर्व महसूस हो रहा है।' वहीं छात्र मोहम्मद हारू शादाब ने बताया कि यहाँ क्विज़, तिरंगा पेंटिंग और अन्य प्रतियोगिताएँ आयोजित होती हैं।
छात्र मोहम्मद अफ्फान ने 'तिरंगा जिंदाबाद, तिरंगा जिंदाबाद, इसके तले हम लोग यहां पर रहते हैं आजाद' नज्म गाकर पूरे माहौल को देशभक्ति से भर दिया। उनकी इस प्रस्तुति ने उपस्थित सभी लोगों के मन में राष्ट्रप्रेम की भावना जगाई।
15 अगस्त के लिए विशेष तैयारियाँ
मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने आगे बताया कि 15 अगस्त को हर साल की तरह इस वर्ष भी लखनऊ में बड़े पैमाने पर जश्न-ए-आजादी की तकरीबात होंगी। मदरसे के बच्चे विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ देंगे, ध्वजारोहण होगा और सुबह प्रभात फेरी निकाली जाएगी।
इस प्रभात फेरी में बच्चे हाथों में तिरंगा लेकर पुराने लखनऊ की गलियों से गुजरेंगे और एकता व देशभक्ति का संदेश फैलाएंगे। गौरतलब है कि दारुल उलूम फरंगी महल की यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और इसे शहर में सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल माना जाता है।
आम जनता और समाज पर असर
यह आयोजन ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब देश भर में स्वतंत्रता दिवस की तैयारियाँ जोरों पर हैं। धार्मिक संस्थानों द्वारा राष्ट्रीय पर्वों पर इस प्रकार के कार्यक्रम आयोजित करना समावेशी राष्ट्रवाद की भावना को मजबूत करता है। बच्चों में बचपन से ही तिरंगे के प्रति सम्मान और देश के प्रति जिम्मेदारी की भावना जागृत करने का यह प्रयास सराहनीय माना जा रहा है।