नवरात्रि पर कन्नौज के 500 साल पुराने मां फूलमती देवी मंदिर में उमड़े श्रद्धालु, ड्रोन-सीसीटीवी से निगरानी
सारांश
मुख्य बातें
शारदीय नवरात्रि के पहले दिन कन्नौज स्थित करीब 500 साल पुराने सिद्धपीठ मां फूलमती देवी मंदिर में रविवार सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। इत्र नगरी के रूप में प्रसिद्ध इस शहर का यह प्राचीन मंदिर पूरे नौ दिनों तक भक्तों से आबाद रहता है, और इस बार भी हरदोई, औरैया, मैनपुरी, फर्रुखाबाद और कानपुर नगर सहित दूर-दूर के जिलों से श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए पहुँचे।
मंदिर की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
मंदिर के मुख्य पुजारी शिखर मिश्र के अनुसार, मां फूलमती देवी राजा वेणुचक्र की पुत्री हैं और मां की सात बहनें हैं। उन्होंने बताया कि कन्नौज का नाम पुराणों में भी दर्ज है और यह मंदिर कई प्रांतों के परिवारों की कुलदेवी के रूप में पूजित है। नवरात्रि के पहले दिन मां की अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित की गई और प्रतिदिन शाम को विशेष आरती का आयोजन होता है। मां की प्रतिमा पर अर्पित जल को श्रद्धालुओं में विशेष महत्व दिया जाता है।
सुरक्षा व्यवस्था और प्रबंधन
भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने मंदिर परिसर में सुरक्षा बलों की तैनाती की है। सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के ज़रिये चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है। मंदिर को फूलों और रोशनी से भव्य रूप से सजाया गया है, जो दूर से ही आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
श्रद्धालुओं की आस्था
कन्नौज से आए श्रद्धालु राजीव कुमार ने बताया कि वे बचपन से इस मंदिर में आ रहे हैं। उनके अनुसार, 'मां की मान्यता काफी ज़्यादा है। मां से माँगी गई सभी मुरादें पूरी होती हैं। मां के दरबार में आने से संतान की प्राप्ति होती है और मन को अपार शांति मिलती है।' यह मान्यता ही दूरदराज के भक्तों को नौ दिनों तक यहाँ खींच लाती है।
देवास में भी नवरात्रि की धूम
कन्नौज से परे मध्य प्रदेश के देवास में भी शारदीय नवरात्रि के पहले दिन मां चामुंडा और मां तुलजा भवानी मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गई। बड़ी माता मंदिर के पुजारी हर्षल ने बताया कि पहले दिन दर्शन करना जीवन में नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। उन्होंने कहा कि यह मंदिर सदियों पुराना है और मान्यता है कि यहाँ मां स्वयं साक्षात प्रकट हुई थीं। नवरात्रि का पावन पर्व इस वर्ष भी उत्तर प्रदेश से लेकर मध्य प्रदेश तक असीम श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है।