मध्य प्रदेश में 65 पुलिस अधिकारियों के तबादले; नक्सल-प्रभावित बालाघाट में हॉक फोर्स को 18 डीएसपी
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश सरकार ने 28 जून 2025 को राज्य पुलिस सेवा (एसपीएस) के 65 अधिकारियों का व्यापक तबादला किया है। गृह विभाग द्वारा शनिवार देर रात जारी आदेश के तहत प्रदेश के कई जिलों और प्रमुख शहरी पुलिस इकाइयों में नई पदस्थापनाएँ की गई हैं। इस फेरबदल का सबसे बड़ा केंद्र नक्सल-प्रभावित बालाघाट जिला रहा, जहाँ नक्सल-विरोधी इकाई हॉक फोर्स को विशेष रूप से सुदृढ़ किया गया है।
बालाघाट में हॉक फोर्स की मजबूती
राज्य सरकार ने नक्सल-प्रभावित बालाघाट में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से हॉक फोर्स में डीएसपी स्तर के 18 अधिकारियों को सहायक सेनानी के पद पर तैनात किया है। इन अधिकारियों में उदित मिश्रा, अभिलाष कुमार भलावी, आकाश अमलकर, रवि सोनेर, उमेश प्रजापति और सचिन पटेल सहित कई अन्य शामिल हैं। सरकार का मानना है कि इन तैनातियों से नक्सल-प्रभावित क्षेत्रों में अभियान और सुरक्षा तंत्र को नई मजबूती मिलेगी।
बालाघाट के संवेदनशील अनुविभागों में नई नियुक्तियाँ
बालाघाट जिले की रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पुलिस अनुविभागों में भी नए अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। गृह विभाग के आदेश के अनुसार, दीपक तोमर को एसडीओपी लांजी, चंद्रशेखर पांडे को एसडीओपी बैहर तथा अभिषेक गौतम को एसडीओपी परसवाड़ा की जिम्मेदारी सौंपी गई है। गौरतलब है कि ये तीनों क्षेत्र नक्सल गतिविधियों की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माने जाते हैं।
प्रमुख शहरों में भी बदलाव
इस प्रशासनिक फेरबदल का असर प्रदेश के बड़े शहरों पर भी पड़ा है। ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन और पीथमपुर में नए नगर पुलिस अधीक्षक (सीएसपी) पदस्थ किए गए हैं। इसके साथ ही भोपाल और इंदौर में भी राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों को नई जिम्मेदारियाँ सौंपी गई हैं। सरकार के अनुसार यह बदलाव प्रशासनिक आवश्यकता, कानून-व्यवस्था की मजबूती और बेहतर पुलिसिंग को ध्यान में रखकर किया गया है।
सरकार की प्राथमिकता और आगे की राह
गृह विभाग ने सभी स्थानांतरित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे शीघ्र अपने नए पदस्थापन स्थल पर कार्यभार ग्रहण करें। यह व्यापक फेरबदल ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार नक्सल-विरोधी अभियानों को और तेज करने की दिशा में लगातार प्रयासरत है। विशेषज्ञों का मानना है कि बालाघाट में हॉक फोर्स की संख्यात्मक मजबूती और अनुभवी डीएसपी-स्तरीय नेतृत्व से जमीनी अभियानों की गुणवत्ता में सुधार संभव है।