क्या मध्य प्रदेश में टीबी के विरुद्ध लड़ाई आसान होगी?
सारांश
Key Takeaways
- मध्य प्रदेश में तीन प्रयोगशालाओं को टीबी दवाओं की जांच के लिए प्रमाणन मिला है।
- टीबी मरीजों को समय पर सटीक उपचार मिलेगा।
- यह कदम टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को और करीब लाएगा।
- बायो सेफ्टी लेवल-3 प्रयोगशालाओं में जटिल जांच संभव है।
- नई बी-पाम उपचार योजना से उपचार में सुधार होगा।
भोपाल, 9 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश में क्षय रोग के उन्मूलन के लिए चलाए जा रहे अभियान को अब और सहज बनाया जा सकेगा क्योंकि राज्य की तीन प्रयोगशालाओं को दवा की जांच हेतु प्रमाणन प्राप्त हुआ है।
राज्य के उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि मध्य प्रदेश ने टीबी के खिलाफ संघर्ष में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य की तीन प्रयोगशालाओं को नई पीढ़ी की टीबी दवाओं की जांच के लिए राष्ट्रीय प्रमाणन मिलना हमारे स्वास्थ्य तंत्र की क्षमता, वैज्ञानिक दक्षता और प्रतिबद्धता का परिचायक है। इसके परिणामस्वरूप दवा-प्रतिरोधी टीबी के मरीजों को समय पर सटीक उपचार प्राप्त होगा और टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को पाने में मध्य प्रदेश की भूमिका और मजबूत होगी। राज्य सरकार इस दिशा में आवश्यक संसाधन और तकनीकी सहयोग प्रदान करती रहेगी।
वास्तव में, राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के तहत राज्य की तीन प्रमुख प्रयोगशालाओं आयरएल भोपाल, एमआरटीबी इंदौर और जीआरएमसी ग्वालियर को नई और अत्यंत महत्वपूर्ण टीबी दवाओं बेडाक्विलिन (बीडीक्यू) और प्रेटोमैनिड (पीटीएम) के लिए लिक्विड कल्चर ड्रग ससेप्टिबिलिटी टेस्टिंग (एलसी डीएसटी) का राष्ट्रीय स्तर का प्रमाणन मिला है। यह प्रमाणन सुप्रा नेशनल रेफरेंस लेबोरेटरी (एसएनआरएल), एनआईआरटी चेन्नई और केंद्रीय क्षय प्रभाग (सीटीडी) द्वारा प्रदान किया गया है।
यह उल्लेखनीय है कि ये प्रयोगशालाएं देश की उन प्रारंभिक 15 प्रयोगशालाओं में शामिल हो गई हैं जहाँ यह अत्यंत जटिल और महत्वपूर्ण जांच की जा सकेगी। यह परीक्षण केवल बायो सेफ्टी लेवल-3 (बीएसएल-3) प्रयोगशालाओं में ही संभव है। इससे पहले, पूरे भारत में केवल एनआईआरटी चेन्नई ही इस परीक्षण के लिए प्रमाणित था, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर मरीजों की आवश्यकताओं को पूरा करना कठिन हो गया था। इस प्रमाणन के माध्यम से अब इन प्रयोगशालाओं में माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस पर बीडीक्यू और पीटीएम दवाओं की प्रभावशीलता की सटीक जांच की जा सकेगी।
इससे दवा-प्रतिरोधी टीबी के मरीजों के उपचार में समय पर सही दवा की व्यवस्था सुनिश्चित की जा सकेगी, उपचार परिणाम बेहतर होंगे और दवा प्रतिरोध के फैलाव को रोकने में मदद मिलेगी। नई बी-पाम उपचार योजना के सफल कार्यान्वयन के साथ इन प्रयोगशालाओं का प्रमाणन टीबी उन्मूलन के प्रयासों को और अधिक सशक्त बनाएगा और मरीजों को आधुनिक, सटीक एवं प्रभावी उपचार उपलब्ध कराएगा।