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क्या वीएचपी ने ममता बनर्जी पर हमला किया है, क्या बंगाल को बांग्लादेश बनाने की कोशिश सफल होगी?

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क्या वीएचपी ने ममता बनर्जी पर हमला किया है, क्या बंगाल को बांग्लादेश बनाने की कोशिश सफल होगी?

सारांश

क्या वीएचपी ने ममता बनर्जी पर हमला किया है? जानिए पश्चिम बंगाल के राजनीतिक माहौल में आए बदलाव और आरोपों के पीछे की सच्चाई। क्या ममता बनर्जी अपने बांग्लादेशी वोट बैंक को खुश करने में सफल होंगी?

मुख्य बातें

वीएचपी ने ममता बनर्जी पर आरोप लगाए हैं कि वह बंगाल को बांग्लादेश बनाने की कोशिश कर रही हैं।
राज्य सरकार पर केंद्रीय एजेंसियों के कार्यों में बाधा डालने का आरोप।
भाजपा ने बांग्लादेशी नागरिकों को वापस भेजने की बात की है।
विपक्ष ने केंद्र सरकार पर गैर-भाजपा शासित राज्यों को निशाना बनाने का आरोप लगाया।
ममता बनर्जी का राजनीतिक विरोध प्रदर्शन ने नया विवाद खड़ा किया।

नई दिल्ली, १० जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) और भाजपा नेताओं द्वारा पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर की गई टिप्पणियों के बाद शनिवार को राजनीतिक वातावरण में गर्माहट आ गई है। नेताओं ने ममता बनर्जी पर केंद्रीय एजेंसियों के कार्यों में हस्तक्षेप करने और बांग्लादेशी मूल के वोट बैंक को संतुष्ट करने का आरोप लगाया।

ये तीखी प्रतिक्रियाएं ममता बनर्जी के हालिया बयानों के बाद आई हैं, जिसमें उन्होंने संवैधानिक अधिकारियों पर राज्य के मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया था।

वीएचपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा, “ममता जी बंगाल को बांग्लादेश बनाने की कोशिश कर रही हैं, वह कभी सफल नहीं होंगी।”

उन्होंने राज्य सरकार पर कानून के शासन को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पहले राज्य सरकार ने आयकर विभाग को रोका, फिर सीबीआई को। उन्होंने कहा कि जब भी कोई एजेंसी कार्रवाई करती है, मुख्यमंत्री फाइलें और कागजात लेकर भाग जाती हैं। उन्होंने सवाल किया कि यह किस तरह की सोच है।

वहीं भाजपा नेता कीरीट सोमैया ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनावी लाभ के लिए बांग्लादेश में हिंदुओं की हत्याओं पर चुप्पी साध रखी है।

सोमैया ने दावा किया कि ममता बनर्जी को बांग्लादेश में हो रही हिंसा की कोई चिंता नहीं है। विधानसभा चुनावों से पहले उनके वोट बैंक को देश के अंदर और बाहर से आर्थिक मदद मिली है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री किसी भी हाल में जांच को आगे नहीं बढ़ने देना चाहती हैं। भाजपा घुसपैठ के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं करेगी।

उन्होंने कहा, “भारतीय जनता पार्टी बांग्लादेशी नागरिकों को वापस भेजने के मामले में किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं करेगी।”

इस बीच विपक्ष के आरोपों पर जवाब देते हुए शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने केंद्र सरकार पर गैर-भाजपा शासित राज्यों को निशाना बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियों का इस्तेमाल चुनिंदा तरीके से किया जा रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसियों का राजनीतिक दुरुपयोग हो रहा है। उन्होंने कहा, “ईडी और सीबीआई की कार्रवाई सिर्फ गैर-भाजपा सरकारों वाले राज्यों में ही दिखाई देती है। ये एजेंसियां कभी गुजरात या महाराष्ट्र की ओर नहीं जातीं।”

यह नया राजनीतिक विवाद शुक्रवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के उस विरोध प्रदर्शन के बाद शुरू हुआ, जो चुनाव आयोग से जुड़े मामलों में हुई छापेमारी के खिलाफ किया गया था। उस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार पर राज्य के अधिकारियों को डराने और संवैधानिक संस्थाओं के दुरुपयोग का आरोप लगाया था।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह देखना महत्वपूर्ण है कि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोपों का खेल हमेशा सत्ता संघर्ष का एक हिस्सा रहा है। इस मामले में, ममता बनर्जी और वीएचपी के बीच का विवाद न केवल पश्चिम बंगाल की राजनीति को प्रभावित करेगा, बल्कि पूरे देश में भी इसकी गूंज सुनाई देगी।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वीएचपी ने ममता बनर्जी पर क्या आरोप लगाए हैं?
वीएचपी ने ममता बनर्जी पर केंद्रीय एजेंसियों के काम में बाधा डालने और बांग्लादेशी मूल के वोट बैंक को खुश करने का आरोप लगाया है।
ममता बनर्जी ने किस प्रकार की टिप्पणियां की हैं?
ममता बनर्जी ने संवैधानिक अधिकारियों पर राज्य के मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया है।
राष्ट्र प्रेस
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