यूपी में कांग्रेस की अपनी हैसियत नहीं, सपा गठबंधन से ही मिलेगा फायदा: बृजभूषण शरण सिंह
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता बृजभूषण शरण सिंह ने 10 अगस्त 2026 को गोंडा में स्पष्ट शब्दों में कहा कि उत्तर प्रदेश में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) की कोई स्वतंत्र राजनीतिक ज़मीन नहीं है और वह समाजवादी पार्टी (सपा) के साथ गठबंधन के सहारे ही चुनावी लाभ उठा सकती है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ तेज़ हो रही हैं और दोनों विपक्षी दल सीट-बंटवारे की बातचीत की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।
बृजभूषण का सीधा वार
कांग्रेस नेता राहुल गांधी से जुड़े एक सवाल पर बृजभूषण शरण सिंह ने कहा, 'उनकी स्वयं की अपनी कोई हैसियत नहीं है। वे समाजवादी पार्टी के कंधे पर सवार होकर ही कुछ सीटें जीत सकते हैं। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की भी अपनी कोई हैसियत नहीं है। अब, अगर वे गठबंधन के तहत चुनाव लड़ते हैं, तो उन्हें कुछ फायदा हो सकता है।' उनका यह बयान विपक्षी गठबंधन की कमज़ोरियों को उजागर करने की BJP की व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
सपा की चुप्पी, कांग्रेस का संकल्प
बृजभूषण की टिप्पणी पर समाजवादी पार्टी ने कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी। सपा सांसद राम गोपाल यादव से जब इस बयान पर प्रतिक्रिया माँगी गई, तो उन्होंने संक्षेप में कहा, 'हम उस पर क्या टिप्पणी कर सकते हैं? मेरे पास कहने के लिए कुछ नहीं है।' दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश के कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने कहा है कि पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव 'बराबरी और सम्मान' के साथ लड़ेगी।
गठबंधन का इतिहास: उतार-चढ़ाव भरा सफर
2017 के विधानसभा चुनाव में 'यूपी के दो लड़के' के नारे के साथ सपा-कांग्रेस गठबंधन बना था, जिसमें कांग्रेस को 403 में से 106 सीटें आवंटित की गई थीं। परिणाम निराशाजनक रहा और कांग्रेस महज 7 सीटें ही जीत पाई। इसके बाद 2022 में दोनों दलों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा और कांग्रेस की सीटें घटकर सिर्फ 2 रह गईं — जो उसके लिए ऐतिहासिक निचला स्तर था।
2024 का समीकरण और 2027 की उम्मीद
हालाँकि, 2024 के लोकसभा चुनावों ने इस समीकरण को पलट दिया। सपा और कांग्रेस ने मिलकर उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से 43 सीटें जीतीं, जिसने दोनों दलों के बीच गठबंधन की प्रासंगिकता को फिर से स्थापित किया। इस प्रदर्शन के बल पर कांग्रेस 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए सपा के साथ सीट-बंटवारे की वार्ता जल्द शुरू करने की कोशिश में है। गौरतलब है कि 2024 की सफलता के बावजूद विधानसभा स्तर पर कांग्रेस की ज़मीनी पकड़ को लेकर सवाल बरकरार हैं।
आगे की राह
यूपी की राजनीति में 2027 का चुनाव विपक्षी एकता की असली परीक्षा होगी। सपा-कांग्रेस गठबंधन की शर्तें, सीटों का बँटवारा और नेतृत्व का सवाल — ये सभी मुद्दे आने वाले महीनों में केंद्र में रहेंगे। BJP की रणनीति विपक्षी खेमे में दरार उजागर करने की है, जबकि विपक्ष 2024 की एकजुटता को बनाए रखने पर ज़ोर दे रहा है।