मध्य प्रदेश में महिलाओं के अधिकारों को नई दिशा: सीएम मोहन यादव की ऐतिहासिक पहल
सारांश
Key Takeaways
- महिलाओं के अधिकारों को सुदृढ़ करने के लिए ऐतिहासिक पहल।
- नारी शक्ति वंदन अधिनियम का विशेष सत्र बुलाया गया।
- 10 से 25 अप्रैल तक नारी शक्ति वंदन पखवाड़ा मनाया जाएगा।
- महिला सशक्तिकरण की दिशा में मुख्यमंत्री का प्रयास महत्वपूर्ण है।
- समाज में महिलाओं की निर्णय क्षमता को बढ़ाने का लक्ष्य।
भोपाल, 14 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने घोषणा की है कि राज्य में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी और उनके लोकतांत्रिक अधिकारों को नई ऊंचाइयां देने के लिए राज्य सरकार द्वारा ऐतिहासिक पहल की जा रही है।
इसके अंतर्गत नारी शक्ति वंदन अधिनियम के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाया गया है। मुख्यमंत्री यादव का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पारित इस अधिनियम की मूल भावना को लागू करने के लिए प्रदेशभर में 10 से 25 अप्रैल तक "नारी शक्ति वंदन पखवाड़ा" मनाया जा रहा है।
इस अभियान के तहत 15 अप्रैलमुख्यमंत्री यादव शामिल होंगे और शासन व्यवस्था में महिलाओं की प्रत्यक्ष भागीदारी सुनिश्चित करने पर विचार करेंगे।
मुख्यमंत्री यादव इस अवसर पर प्रदेश की महिलाओं को संबोधित करेंगे और सरकार के उस संकल्प को दोहराएंगे, जिसके तहत मध्य प्रदेश की लोकतांत्रिक संस्थाओं में महिलाओं की आवाज और अधिक मुखर होगी। कार्यक्रम में महिला सशक्तिकरण की दिशा में सक्रिय प्रदेश की अग्रणी महिला नेत्रियां भी उपस्थित रहेंगी। समारोह में महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री संपतिया उइके, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कृष्णा गौर, राज्यमंत्री प्रतिभा बागरी और राधा सिंह शामिल होंगी।
इस समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्टता प्राप्त महिलाओं को आमंत्रित किया गया है, जिनमें पद्मश्री से सम्मानित विभूतियां, महिला चिकित्सक, वकील, कलाकार और इंजीनियर शामिल हैं। साथ ही, समाज की मुख्यधारा को गति देने वाली लाड़ली बहना, लाड़ली लक्ष्मी, स्व-सहायता समूहों की सदस्य, और महिला मीडिया प्रतिनिधि भी इस कार्यक्रम का हिस्सा बनेंगी। राज्य सरकार द्वारा आयोजित इस पखवाड़े के दौरान पूरे प्रदेश में जन-जागरूकता के अभियान चलाए जा रहे हैं।
डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती के अवसर पर प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभाएं आयोजित की जा रही हैं, जिनमें 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के महत्व पर ग्रामीण महिलाओं के साथ संवाद किया गया। इसके अलावा, हर विधानसभा और लोकसभा क्षेत्र में 'नारी शक्ति पदयात्रा' और शिक्षण संस्थानों में 'युवा संवाद' कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, ताकि युवा पीढ़ी को इस सामाजिक बदलाव से जोड़ा जा सके। शासन का मानना है कि महिलाओं की निर्णय क्षमता में वृद्धि से न केवल सामाजिक चेतना आएगी, बल्कि जन-विश्वास भी और गहरा होगा।