महिलाओं की भूमिका: देश के विकास में बुनियादी परिवर्तन लाने का समय!
सारांश
Key Takeaways
- महिला आरक्षण विधेयक का उद्देश्य महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को बढ़ाना है।
- 33 प्रतिशत आरक्षण महिलाओं को सशक्त बनाएगा।
- 2029 में लागू होने की योजना है।
- महिलाएं स्थानीय निकायों में सफलतापूर्वक काम कर रही हैं।
- महिला मुख्यमंत्री महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रयासरत हैं।
नई दिल्ली, 15 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्रालय में राज्यमंत्री रक्षा निखिल खडसे ने महिला आरक्षण विधेयक पर समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत करते हुए कहा कि देश को विकसित बनाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई क्षेत्र पीछे न रह जाए, जिसके लिए पीएम मोदी और भारत सरकार सभी क्षेत्रों में सक्रिय हैं।
उन्होंने बताया कि देश में 50 प्रतिशत महिलाएं मतदान करती हैं, इसलिए उनका भी यह अधिकार है कि विधानसभा और लोकसभा के माध्यम से निर्णय प्रक्रिया में भाग लें। पॉलिसी निर्माण में महिलाओं का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण हो सकता है, इसीलिए यह विधेयक आवश्यक है। महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिलना एक बड़ी उपलब्धि होगी, जिससे महिलाओं की भूमिका देश के विकास में और अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगी।
जमीनी स्तर पर महिला आरक्षण विधेयक के प्रभाव के बारे में उन्होंने कहा कि यह जमीनी स्तर पर काफी प्रभावी साबित होगा, क्योंकि स्थानीय निकायों में 50 प्रतिशत आरक्षण है। पंचायत से लेकर जिला पंचायत और नगर निगम तक, महिलाएं स्वतंत्रता से कार्य कर रही हैं। इन महिलाओं को आगे लाने के लिए और उनके माध्यम से देश को आगे बढ़ाने के लिए यह अवसर महत्वपूर्ण है। पीएम मोदी द्वारा सही प्रावधान किए जा रहे हैं।
उन्होंने आगे बताया कि नगर पंचायत और नगर निगम में महिलाएं सफलतापूर्वक पहुंची हैं। यदि उन्हें विधानसभा और लोकसभा में मौका मिलता है, तो निश्चित रूप से अच्छा नेतृत्व मिल सकता है।
विपक्ष की ओर से विधेयक के लागू होने में देरी पर सवाल उठाने पर रक्षा निखिल खडसे ने कहा कि यह एक दीर्घकालिक वादा नहीं है। पहले ही कहा गया था कि 2029 के चुनाव में इसे लागू किया जाएगा। आगामी चुनावों में नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत महिलाओं को विधानसभा और लोकसभा में प्रतिनिधित्व का अवसर मिलेगा।
विपक्ष द्वारा जातिगत जनगणना पर सवाल उठाने पर उन्होंने कहा कि विपक्ष का काम है विरोध करना। सरकार सभी निर्णय विचार-विमर्श के बाद ले रही है। आरक्षण का लागू होना आवश्यक है और परिसीमन के बाद 2029 में इसे लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम लागू होने के बाद महिलाओं की संख्या में वृद्धि होगी, क्योंकि वर्तमान समय में उनकी भागीदारी कम है। मैं तीसरी बार लोकसभा में सांसद हूं और मंत्री हूं।
उन्होंने कहा कि मेरी शुरुआत ग्राम पंचायत से हुई थी। मैं सरपंच रह चुकी हूं, उसके बाद जिला पंचायत और फिर लोकसभा तक पहुंची हूं। जब हमारी संख्या बढ़ेगी, तो हम सक्षम तरीके से अपनी बात रख सकेंगे और उसे आगे बढ़ाने में सफलता प्राप्त करेंगे। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम का सभी पार्टियों का समर्थन आवश्यक है। यह विधेयक केवल एक पार्टी के लिए नहीं, बल्कि देश की सभी महिलाओं के लिए लाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि जिन राज्यों में महिला मुख्यमंत्री हैं, वे महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रयासरत हैं। महिला मुख्यमंत्री महिलाओं की समस्याओं पर काम कर रही हैं। उन्होंने बताया कि देश के कई क्षेत्रों में आज भी बेटियों को पढ़ाया नहीं जाता है। महिलाएं स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के बारे में नहीं बता पातीं, लेकिन उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। महिला सांसद उनकी समस्याओं को आसानी से समझ पाएंगी।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं भी नारी शक्ति वंदन अधिनियम के माध्यम से विधानसभा और लोकसभा जाने का सपना देख सकती हैं।