उपराष्ट्रपति चुनाव में क्या गैर-राजनीतिक सभापति की आवश्यकता है? महुआ मांझी का बयान

सारांश
Key Takeaways
- महुआ मांझी ने उपराष्ट्रपति चुनाव में गैर-राजनीतिक सभापति की आवश्यकता पर जोर दिया।
- राज्यसभा के सभापति का पद निष्पक्षता का प्रतीक होना चाहिए।
- विपक्ष के उम्मीदवार बी सुदर्शन रेड्डी की उम्मीदवारी में संविधान की रक्षा की प्रतिबद्धता है।
रांची, 30 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की राज्यसभा सांसद महुआ मांझी ने उपराष्ट्रपति पद के लिए एनडीए के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन के अनुभव की सराहना की, लेकिन यह भी कहा कि राज्यसभा के सभापति के रूप में एक गैर-राजनीतिक व्यक्ति को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि भाजपा द्वारा सीपी राधाकृष्णन को उम्मीदवार बनाए जाने का निर्णय सोच-समझकर लिया गया होगा। उनके पास लंबा प्रशासनिक अनुभव है और एनडीए के सांसद उन्हें वोट देंगे। हमारी पार्टी जो भी निर्णय लेगी, हम उसके साथ हैं।
महुआ मांझी ने यह भी कहा कि राज्यसभा के सभापति का पद निष्पक्षता का प्रतीक होना चाहिए, जो पक्ष और विपक्ष दोनों के साथ न्याय कर सके।
उन्होंने कहा, “राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों पर अक्सर यह आरोप लगता है कि वे अपनी पार्टी या झुकाव के आधार पर पक्षपाती होते हैं। इसलिए, उच्च सदन के सभापति का पद संभालने वाले व्यक्ति को गैर-राजनीतिक होना चाहिए, ताकि वह निष्पक्षता से कार्य कर सकें।”
उन्होंने विपक्ष के उम्मीदवार बी सुदर्शन रेड्डी की प्रशंसा करते हुए कहा कि एक पूर्व न्यायाधीश के रूप में उनकी उम्मीदवारी संविधान की रक्षा के लिए विपक्ष की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
उन्होंने कहा, “विपक्ष संविधान की सुरक्षा की बात कर रहा है। ऐसे में एक गैर-राजनीतिक व्यक्ति का चयन एक सकारात्मक कदम है।”
महुआ मांझी ने बताया कि उपराष्ट्रपति चुनाव में कोई व्हिप जारी नहीं होता, जिसके कारण सांसद अपनी अंतरात्मा की आवाज पर वोट देते हैं। सभी सांसदों को इस बारे में सोचना चाहिए। मैंने सभी दलों के सांसदों से अपील की कि वे बी सुदर्शन रेड्डी को समर्थन दें, ताकि सभापति के पद पर एक निष्पक्ष व्यक्ति बैठ सके।
उन्होंने कहा, “हर उम्मीदवार जीतने की उम्मीद के साथ चुनाव लड़ता है। ऐसे में बी सुदर्शन रेड्डी जैसे गैर-राजनीतिक व्यक्ति का चयन इस पद की गरिमा को और बढ़ाएगा।”