मालदा के एडीएम को न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने के मामले में कारण बताओ नोटिस
सारांश
Key Takeaways
- मालदा के एडीएम को गंभीर लापरवाही के लिए नोटिस जारी किया गया।
- न्यायिक अधिकारियों के बंधक बनने की घटना पर प्रशासन की जिम्मेदारी पर सवाल खड़े हुए।
- कारण बताओ नोटिस के तहत समय पर जवाब देना अनिवार्य है।
- आईएएस अधिकारियों की जिम्मेदारियों की अनदेखी गंभीर मानी गई है।
- इस मामले में सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की आवश्यकता है।
कोलकाता, 6 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के कालियाचक में 1 अप्रैल की रात को न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने की घटनाक्रम के संबंध में जिले के अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (कानून और व्यवस्था) शेख अंसारी अहमद को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। शेख अंसारी अहमद एक भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी हैं। उन पर अपने कर्तव्यों में गंभीर लापरवाही बरतने का आरोप है।
यह नोटिस 4 अप्रैल को मालदा के जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय द्वारा जारी किया गया। इस नोटिस में उन्हें कहा गया है कि नोटिस प्राप्त करने की तारीख से सात दिनों के भीतर अपना जवाब देना होगा। यदि उन्होंने समय पर जवाब नहीं दिया तो यह माना जाएगा कि उन्होंने अपनी गलती स्वीकार कर ली है और उनके खिलाफ बिना किसी और सूचना के एकतरफा अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
नोटिस में स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि एडीएम शेख अंसारी अहमद को पहले ही सख्त निर्देश दिए गए थे कि कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने की संभावना को देखते हुए वे स्थिति पर कड़ी नजर रखें। उन्हें नागरिक प्रशासन, पुलिस और अन्य विभागों के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखने के लिए भी कहा गया था। विशेष रूप से निर्देशित किया गया था कि वे खुद कालियाचक क्षेत्र में जाएं और सभी संबंधित अधिकारियों के साथ निरंतर संपर्क में रहें। इसका उद्देश्य था कि जमीनी स्तर पर स्थिति की सही जानकारी रहे और यदि कोई समस्या उत्पन्न हो, तो तुरंत उच्च अधिकारियों को सूचित किया जा सके।
अब एडीएम शेख अंसारी अहमद को इस लापरवाही के लिए जवाब देना होगा। कारण बताओ नोटिस में कहा गया है कि 1 अप्रैल को दोपहर 3:30 बजे से रात 8:30 बजे तक संबंधित एडीएम मौके पर मौजूद होने के बावजूद अपनी जिम्मेदारी निभाने में पूरी तरह असफल रहे। उन पर आरोप है कि उन्होंने स्थिति की गंभीरता के बारे में अपने वरिष्ठ अधिकारियों को समय पर जानकारी नहीं दी।
नोटिस के अनुसार, इन पांच घंटों के दौरान उच्च प्रशासन को जमीन पर क्या हो रहा है, इसकी कोई ठोस जानकारी नहीं मिल पाई। इसका परिणाम यह रहा कि प्रशासन समय पर आवश्यक कदम नहीं उठा सका और स्थिति को संभालने में देरी हुई।
नोटिस में इस लापरवाही को बेहद गंभीर माना गया है। इसमें कहा गया है कि यह कर्तव्य की बड़ी अनदेखी है और एक अधिकारी के रूप में उन पर जो भरोसा किया गया था, उसका उल्लंघन है। यह भी कहा गया है कि इस तरह का व्यवहार आईएएस अधिकारी के पद के अनुरूप नहीं है। इस लापरवाही के कारण सार्वजनिक व्यवस्था को खतरा पैदा हो सकता था और प्रशासन भी अपनी जिम्मेदारियों को सही तरीके से निभाने में असमर्थ हो गया।
नोटिस में आगे कहा गया है कि यह आचरण ऑल इंडिया सर्विस रूल्स 1968 के नियम 3(1) का उल्लंघन है, जिसके अनुसार हर अधिकारी को अपने कर्तव्यों के प्रति पूरी निष्ठा और समर्पण बनाए रखना आवश्यक होता है। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि इस प्रकार की लापरवाही विशेष रूप से गंभीर मानी जाती है, जब अधिकारी कानून-व्यवस्था जैसे संवेदनशील मामले की जिम्मेदारी संभाल रहे हों।