क्या पद्मश्री सम्मान से गदगद एसिड अटैक सर्वाइवर मंगला कपूर के लिए पीएम के शब्दों ने हौसला दिया?

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क्या पद्मश्री सम्मान से गदगद एसिड अटैक सर्वाइवर मंगला कपूर के लिए पीएम के शब्दों ने हौसला दिया?

सारांश

पद्मश्री सम्मान की घोषणा के साथ मंगला कपूर के जीवन में एक नया मोड़ आया है। एसिड अटैक से जूझते हुए उन्होंने समाज में अपनी पहचान बनाई है। जानिए उनकी कहानी और कैसे पीएम मोदी के शब्दों ने उन्हें प्रेरित किया।

Key Takeaways

  • मंगला कपूर का संघर्ष प्रेरणादायक है।
  • पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित होना एक बड़ी उपलब्धि है।
  • पीएम मोदी के शब्दों ने हिम्मत दी है।
  • समाज में अपनी पहचान बनाना संभव है।
  • किताब 'सीरत' ने जीवन में नया मोड़ दिया।

वाराणसी, 25 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। गणतंत्र दिवस से एक दिन पहले रविवार को पद्मश्री पुरस्कारों की घोषणा की गई है, जिसमें पूरे देश के विभिन्न राज्यों के नायकों को उनके साहस और अच्छे कार्यों के लिए सम्मानित किया जाएगा।

उत्तर प्रदेश से इस बार कई नायकों को पुरस्कार से सम्‍मानित किया जाएगा, जिसमें काशी हिंदू विश्वविद्यालय की सेवानिवृत्त प्रोफेसर मंगला कपूर का नाम भी शामिल है, जो पहले से ही कई पुरस्कारों से नवाजी जा चुकी हैं।

प्रेरणादायक संगीतकार और एसिड अटैक सर्वाइवर के रूप में देशभर में पहचान बनाने वाली मंगला कपूर पद्मश्री पुरस्कार मिलने से काफी खुश हैं। उन्होंने राष्ट्र प्रेस से खास बातचीत में कहा, "जब सुबह फोन आया तो मुझे यकीन ही नहीं हुआ। मैंने कई सालों तक संघर्ष किया है और मेरे भाई ने मेरा साथ दिया है। आज मुझे लग रहा है कि मेरी सारी मेहनत और संघर्ष का फल मिल गया है। इस समाज ने मुझे कभी नहीं पूछा, लेकिन इन पुरस्कारों ने मुझे समाज में खड़े होने की हिम्मत दी है।"

अपनी आपबीती को साझा करते हुए मंगला कपूर ने बताया, "12 साल की उम्र में मुझ पर एसिड अटैक हुआ था। मैं 6 साल तक लगातार अस्पताल में रही और मेरे शरीर पर 36 सर्जरी हुईं। उसके बाद असली संघर्ष की शुरुआत हुई। इस चेहरे के साथ समाज अपनाने के लिए तैयार नहीं था।" उन्होंने आगे कहा कि बचपन से संगीत में रुचि थी और उनकी आवाज भी अच्छी थी। "मैंने संगीत में शिक्षा ली और संगीत में ही आगे की पढ़ाई की। कई सालों तक काशी हिंदू विश्वविद्यालय में टीचर के पद पर काम किया, लेकिन मैंने अपनी जिंदगी पर 'सीरत' नाम की किताब भी लिखी।"

उन्होंने कहा, 'सीरत' के विमोचन के बाद जब लोगों ने उसे पढ़ा तो मेरी जिंदगी बदल गई। लोग खुद मेरे पास आने लगे, मुझे जानने लगे और मैंने कई जगहों पर लेक्चर भी दिए। जो समाज मुझे अपना नहीं पा रहा था, उसी ने मुझे इस किताब के जरिए नई पहचान दी।

पीएम मोदी की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि पीएम मोदी द्वारा विकलांग को 'दिव्यांग' शब्द देने से मैं बहुत प्रभावित हूं, क्योंकि विकलांगता का दर्द मैंने सहा है और मुझे पता है कि कितना कष्ट झेलना पड़ता है। समाज के लोग विकलांगों को कई अपमानजनक नामों से बुलाते हैं, लेकिन उनके द्वारा दिए गए 'दिव्यांग' शब्द ने सबको हौसला दिया है।

Point of View

NationPress
10/02/2026

Frequently Asked Questions

मंगला कपूर को किस पुरस्कार से सम्मानित किया गया?
मंगला कपूर को पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
मंगला कपूर का संघर्ष किस प्रकार का था?
मंगला कपूर ने 12 साल की उम्र में एसिड अटैक का सामना किया और इसके बाद 36 सर्जरी करवाई।
पीएम मोदी ने विकलांगों के लिए क्या शब्द इस्तेमाल किया?
पीएम मोदी ने विकलांगों के लिए 'दिव्यांग' शब्द का उपयोग किया है।
मंगला कपूर ने अपनी जिंदगी पर कौन सी किताब लिखी है?
'सीरत' नाम की किताब मंगला कपूर ने अपनी जिंदगी पर लिखी है।
मंगला कपूर को कौन से क्षेत्र में पहचान मिली?
मंगला कपूर को संगीत और एसिड अटैक सर्वाइवर के रूप में पहचान मिली है।
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