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क्या लोकसभा में मणिकम टैगोर का स्थगन प्रस्ताव मतदाता सूची में हेराफेरी पर चर्चा की मांग करेगा?

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क्या लोकसभा में मणिकम टैगोर का स्थगन प्रस्ताव मतदाता सूची में हेराफेरी पर चर्चा की मांग करेगा?

सारांश

कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव पेश किया है जिसमें मतदाता सूची में हेराफेरी और संवैधानिक संस्थाओं के दुरुपयोग पर चर्चा की मांग की गई है। क्या यह प्रस्ताव भारतीय निर्वाचन आयोग की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न उठाएगा?

मुख्य बातें

मणिकम टैगोर ने लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव पेश किया।
मतदाता सूची में हेराफेरी के मामले उजागर हुए हैं।
निर्वाचन आयोग की पारदर्शिता पर सवाल उठाए गए हैं।
कर्नाटक और बिहार में जांच की मांग की गई है।
2023 के चुनावी कानून में संशोधन पर चर्चा होनी चाहिए।

नई दिल्ली, 21 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने लोकसभा में एक स्थगन प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए मतदाता सूची में हेराफेरी, संवैधानिक संस्थाओं के दुरुपयोग और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनावों के लिए उत्पन्न खतरों पर तात्कालिक चर्चा की मांग की है। इस प्रस्ताव में भारतीय निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न उठाए गए हैं और इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताया गया है। टैगोर ने लोकसभा अध्यक्ष से इस मुद्दे पर विशेष सत्र बुलाने का अनुरोध किया है, ताकि मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा की गई एक महीने की जांच के आधार पर, मणिकम टैगोर ने आरोप लगाया कि 2034 के आम चुनावों के दौरान बैंगलोर सेंट्रल लोकसभा क्षेत्र के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र में फर्जी और डुप्लिकेट मतदाता सत्यापन के मामले सामने आए हैं। इसके अतिरिक्त, बिहार एसआईआर में भी मतदाता सूची में व्यापक गड़बड़ियों की बात उजागर हुई है। जांच में ये पाया गया कि बड़ी संख्या में जीवित मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए गए, गलत नियुक्तियां की गईं और उन्हें चुनाव आयोग की सूची से हटा दिया गया। यह सब सत्तारूढ़ दल को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से जनसांख्यिकी में हेरफेर करने के लिए किया गया है।

कांग्रेस सांसद ने कहा कि प्रस्ताव में चुनाव आयोग की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठाए गए हैं। धारा 16 के तहत आयोग को दी गई कानूनी छूट, जो मुख्य चुनाव आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों को उनके कर्तव्यों के दौरान दीवानी या आपराधिक कार्यवाही से बचाती है, संवैधानिक सिद्धांतों को कमजोर करती है। यह प्रावधान कथित तौर पर आयोग के कदाचार को कानूनी संरक्षण देता है, जिससे जवाबदेही खत्म होती है और मतदाताओं के अधिकारों पर खतरा मंडराता है।

उन्होंने मांग की है कि कर्नाटक और बिहार में मतदाता सूची में हेराफेरी की न्यायिक या संसदीय जांच हो। साथ ही, हटाए गए मतदाताओं की पारदर्शी और सत्यापन योग्य सूची प्रस्तुत करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।

उन्होंने 2023 के चुनावी कानून संशोधनों, विशेष रूप से धारा 11, की समीक्षा की मांग की है, जो आयोग को कानूनी छूट प्रदान करती है। इसके अतिरिक्त, चुनाव आयोग की निष्पक्षता और स्वायत्तता सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र नियुक्ति प्रक्रिया और संरचनात्मक सुधारों की आवश्यकता बताई गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसमें मतदाता सूची में हेरफेर और संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग शामिल है। ऐसे मुद्दों पर बारीकी से विचार करना आवश्यक है ताकि लोकतंत्र की स्वायत्तता और निष्पक्षता को बनाए रखा जा सके।
RashtraPress
15 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मणिकम टैगोर ने स्थगन प्रस्ताव क्यों पेश किया?
उन्होंने मतदाता सूची में हेराफेरी और चुनाव प्रक्रिया में धांधली के खिलाफ चर्चा की मांग की है।
क्या प्रस्ताव में निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं?
जी हां, प्रस्ताव में आयोग की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न उठाए गए हैं।
क्या कर्नाटक और बिहार में मतदाता सूची की जांच होगी?
टैगोर ने इन राज्यों में मतदाता सूची की न्यायिक या संसदीय जांच की मांग की है।
राष्ट्र प्रेस
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