क्या मणिपाल में 'जैव सुरक्षा और प्रकोप सिमुलेशन प्रशिक्षण' होम्योपैथी अनुसंधान वैज्ञानिकों के लिए महत्वपूर्ण है?

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क्या मणिपाल में 'जैव सुरक्षा और प्रकोप सिमुलेशन प्रशिक्षण' होम्योपैथी अनुसंधान वैज्ञानिकों के लिए महत्वपूर्ण है?

सारांश

आयुष मंत्रालय के अधीन सीसीआरएच ने मणिपाल में जैव सुरक्षा और प्रकोप सिमुलेशन प्रशिक्षण की शुरुआत की। इस पहल का उद्देश्य शोध वैज्ञानिकों को उभरते स्वास्थ्य संकटों का सामना करने के लिए सशक्त बनाना है। यह कार्यशाला 6 से 10 अक्टूबर तक जारी रहेगी।

मुख्य बातें

अनुसंधान वैज्ञानिकों के लिए आवश्यक कौशल का विकास।
संक्रामक रोगों से निपटने में होम्योपैथी की क्षमता को उजागर करना।
सामर्थ्यवान स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के निर्माण के लिए सहयोग।
जैव सुरक्षा प्रथाओं में सुधार।
राष्ट्रीय स्तर पर जन स्वास्थ्य पहलों को सशक्त बनाना।

नई दिल्ली, 7 अक्टूबर (राष्ट्र प्रेस)। आयुष मंत्रालय के अधीन केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद (सीसीआरएच) ने मणिपाल उच्च शिक्षा अकादमी (एमएएचई) की एक घटक इकाई, मणिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एमआईवी) के सहयोग से एक महत्वपूर्ण पहल का शुभारंभ किया है। यह कार्यक्रम 6 से 10 अक्टूबर तक एमएएचई परिसर, मणिपाल, कर्नाटक में आयोजित किया जा रहा है।

यह कार्यक्रम 'जैव सुरक्षा और प्रकोप सिमुलेशन प्रशिक्षण 2025' शीर्षक वाली एक पांच दिवसीय आवासीय कार्यशाला है।

कार्यशाला का उद्घाटन सीसीआरएच के महानिदेशक डॉ. सुभाष कौशिक ने मुख्य अतिथि के रूप में किया। उन्होंने सीसीआरएच और एमएएचई के बीच सहयोग के माध्यम से एक सक्षम स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के निर्माण की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने उभरते स्वास्थ्य संकटों से निपटने के लिए अनुसंधान वैज्ञानिकों को आवश्यक कौशल प्रदान करने के महत्व पर बल दिया और संक्रामक रोगों और वैश्विक महामारियों से लड़ने में होम्योपैथी की क्षमता को उजागर किया।

एमआईवी के निदेशक डॉ. चिरंजय मुखोपाध्याय ने सभी गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत किया।

यह विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम सीसीआरएच के अनुसंधान वैज्ञानिकों की क्षमता को बढ़ाने के लिए बनाया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य तैयारियों, जैव सुरक्षा प्रथाओं और रोगों के प्रकोप के दौरान त्वरित प्रतिक्रिया क्षमताओं को सशक्त करना है, जिससे आयुष मंत्रालय के तहत सार्वजनिक स्वास्थ्य पहलों को सशक्त किया जा सके।

इस क्षमता निर्माण कार्यक्रम को पूरे देश में व्यापक रुचि मिली है। सीसीआरएच के 33 संस्थानों और इकाइयों के अनुसंधान वैज्ञानिकों ने इसमें भाग लेने के लिए आवेदन किया था, जिनमें से गहन ऑनलाइन मूल्यांकन के बाद 14 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 30 प्रतिभाशाली अनुसंधान वैज्ञानिकों का चयन किया गया है।

इस अवसर पर, अनुसंधान, शिक्षा और प्रशिक्षण के प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए सीसीआरएच और एमएएचई के बीच एक समझौता ज्ञापन (MOUs) का आदान-प्रदान किया गया। इस पर डॉ. सुभाष कौशिक और एमएएचई के रजिस्ट्रार डॉ. पी गिरिधर किनी ने हस्ताक्षर किए।

एमएएचई में स्वास्थ्य विज्ञान के प्रो-वाइस चांसलर, डॉ. शरत कुमार राव ने सहयोगी अनुसंधान परियोजनाओं में हर प्रकार के सहयोग का आश्वासन दिया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम डॉ. सुहाना पी अजीस, डॉ. श्रीकांत गोपीनाथन पिल्लई, डॉ. सुधीश एन और अनुप जयराम की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि पूरे देश के स्वास्थ्य प्रणाली के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। उभरते स्वास्थ्य संकटों को ध्यान में रखते हुए, यह पहल उन विशेषज्ञताओं को विकसित करने में मदद करेगी जो भविष्य में हमारे स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने में सहायक सिद्ध होंगी।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम कब से कब तक चलेगा?
यह कार्यक्रम 6 से 10 अक्टूबर तक आयोजित किया जा रहा है।
कार्यशाला का उद्देश्य क्या है?
कार्यशाला का उद्देश्य अनुसंधान वैज्ञानिकों को स्वास्थ्य संकटों से निपटने के लिए आवश्यक कौशल प्रदान करना है।
कौन-कौन से संस्थान इस कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं?
इस कार्यक्रम में सीसीआरएच के 33 संस्थान और इकाइयां भाग ले रही हैं।
कार्यक्रम का उद्घाटन किसने किया?
कार्यक्रम का उद्घाटन डॉ. सुभाष कौशिक ने किया।
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य जैव सुरक्षा प्रथाओं और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमताओं को मजबूत करना है।
राष्ट्र प्रेस
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