क्या मणिपुर के कांगपोखी में ड्रग्स का सफाया होगा?
सारांश
Key Takeaways
- 306 एकड़ अवैध पोप्पी खेती को नष्ट किया गया।
- इस ऑपरेशन में 43 झोपड़ियां भी ध्वस्त की गईं।
- कृषि से 2,080 किलो अफीम का उत्पादन होने की संभावना थी।
- एक सफल अभियान ने करोड़ों रुपये की अफीम उत्पादन योजना को विफल किया।
- असम राइफल्स की जीरो टॉलरेंस नीति के अंतर्गत कार्रवाई की गई।
इम्फाल, 18 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। मणिपुर में ड्रग्स पर एक महत्वपूर्ण कार्रवाई की गई है। केंद्रीय एवं राज्य सुरक्षा बलों ने मणिपुर के पहाड़ी जिले कांगपोखी में 6 दिनों में 306 एकड़ से अधिक अवैध अफीम की खेती को नष्ट कर दिया। अधिकारियों के अनुसार, इससे करोड़ों रुपये की अफीम उत्पादन की योजना विफल हो गई है।
यह ऑपरेशन 12 से 17 जनवरी के बीच संपन्न हुआ। इसमें केंद्रीय और राज्य सुरक्षा बलों के साथ-साथ नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) तथा राज्य का वन विभाग भी शामिल था। टीमों ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों में अवैध पोप्पी के खेतों को तहस-नहस किया।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि असम राइफल्स, सीआरपीएफ और मणिपुर पुलिस की टीमों ने न केवल खेती को नष्ट किया, बल्कि 43 अस्थायी झोपड़ियां भी गिरा दीं, जो पोप्पी उगाने वालों द्वारा बनाई गई थीं। इसके साथ ही, कई स्प्रे पंप, पाइप, साल्ट और कीटनाशक भी जब्त किए गए।
अधिकारी ने कहा कि ये पोप्पी खेत लगभग 2,080 किलो अफीम पैदा कर सकते थे, जिसकी अवैध बाजार में कीमत करोड़ों रुपये थी। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले साल नवंबर और दिसंबर में अलग-अलग ऑपरेशनों में आर्मी, असम राइफल्स, सीआरपीएफ, बीएसएफ, एनसीबी और मणिपुर पुलिस ने राज्य के पहाड़ी जिलों में 1,000 एकड़ से अधिक अवैध पोप्पी खेती को नष्ट किया था।
अवैध खेती मुख्य रूप से 6 जिलों - कांगपोखी, उख्रुल, तामेंगलॉन्ग, चांदेल, टेंगनूपाल और सेनापति में फैली हुई थी।
पुलिस अधिकारी ने कहा कि पिछले दो महीनों में 1,000 एकड़ से अधिक पोप्पी खेती को नष्ट करने से लगभग 9,000 किलो अफीम बनने से रोका गया, जिसकी कीमत लाखों करोड़ों रुपये में थी।
एक रक्षा प्रवक्ता ने बताया कि यह ऑपरेशन अत्यंत कठिन इलाके और खराब मौसम में किया गया। असम राइफल्स और अन्य बलों की मेहनत से न केवल ड्रग्स की खेती को रोका गया, बल्कि आतंकवाद और अन्य गैर-कानूनी गतिविधियों को वित्तपोषित करने वाले नेटवर्क को भी कमजोर किया गया।
राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि मणिपुर में 'नशे के खिलाफ युद्ध' के तहत सुरक्षा बल और प्रवर्तन एजेंसियां लगातार काम कर रही हैं। कई वर्षों से, सरकारी और वन भूमि पर अवैध पोप्पी खेती को नष्ट किया गया है। 2020 में 8,057 एकड़ पोप्पी खेती की पहचान की गई थी, जिसमें से 1,695 एकड़ नष्ट किए गए।
आगे के वर्षों में भी ये अभियान जारी रहेगा। 2024 और 2025 तक खेती के क्षेत्र में काफी कमी आई, जो राज्य और केंद्रीय सरकार की रणनीति की सफलता को दर्शाता है।
राज्य के नेताओं और अधिकारियों ने कहा कि मणिपुर में चल रहे जातीय संकट और बढ़ती ड्रग्स की समस्या राज्य की मौजूदा स्थिति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
रक्षा प्रवक्ता ने कहा कि असम राइफल्स की ड्रग्स के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति है। इसके तहत केवल खेती करने वालों ही नहीं, बल्कि फैसिलिटेटर और फाइनेंसर पर भी कानूनी कार्रवाई की जाती है।
उन्होंने कहा कि सीमा के पास पोप्पी खेती को पूरी तरह खत्म करने की प्रतिबद्धता असम राइफल्स की प्राथमिकता है। यह ऑपरेशन मणिपुर और आसपास के क्षेत्रों में दीर्घकालिक सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने की कोशिश है।