वैश्विक संघर्षों के प्रभाव में मार्च में मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई में कमी, लेकिन रोजगार में मजबूती: रिपोर्ट
सारांश
Key Takeaways
- मार्च 2023 में भारत का मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई 53.9 पर आ गया।
- कंपनियों ने बढ़ती लागत का एक बड़ा हिस्सा स्वंय संभाला।
- रोजगार सृजन में वृद्धि, पिछले सात महीनों में सबसे ज्यादा।
- सप्लायर्स ने समय पर कच्चा माल पहुँचाया।
- एक्सपोर्ट ऑर्डर में वृद्धि, विशेषकर पश्चिमी देशों से।
नई दिल्ली, 2 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। एचएसबीसी के फ्लैश इंडिया पीएमआई डेटा के अनुसार, पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्षों के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा है, और इसका प्रभाव भारतीय उद्योगों पर भी स्पष्ट है। मार्च महीने में भारत का मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई 53.9 पर पहुँच गया है।
कंपनियों पर लागत का दबाव बढ़ गया है, जो अगस्त 2022 के बाद का सबसे ऊँचा स्तर है। हालांकि, पीएमआई डेटा तैयार करने वाली एसएंडपी ग्लोबल के अनुसार, कंपनियों ने बढ़ती लागत का एक बड़ा हिस्सा स्वंय संभाला है, क्योंकि बिक्री कीमतों में वृद्धि पिछले दो वर्षों में सबसे कम रही है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कंपनियों ने संभावित जोखिम से बचने के लिए अतिरिक्त स्टॉक जमा किया, जिससे रोजगार सृजन और कच्चे माल की खरीद में वृद्धि देखने को मिली।
एचएसबीसी के मुख्य अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने कहा, "उत्पादन और नए ऑर्डर में कमी आई है, जो मांग में नरमी और बढ़ती अनिश्चितता को दर्शाता है। वहीं, एल्युमिनियम, केमिकल और ईंधन जैसी चीजों की लागत तेजी से बढ़ी है। वर्तमान में कंपनियाँ इस बढ़ोतरी का प्रभाव खुद सहन कर रही हैं, जिससे कीमतों में अधिक वृद्धि नहीं हुई है।"
मार्च के आंकड़ों के अनुसार, इनपुट लागत में साढ़े तीन साल में सबसे तेज वृद्धि दर्ज की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि एल्युमिनियम, केमिकल्स, ईंधन, जूट, लेदर, कपड़ा, तेल, रबर और स्टील जैसी चीजों के दाम में बढ़ोतरी हुई है।
इसके अलावा, भारतीय कंपनियाँ उत्पादन के लिए अतिरिक्त कच्चा माल खरीदना जारी रखे हुए हैं और अपने स्टॉक को भी बढ़ा रही हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कुल वृद्धि की रफ्तार तीन महीने के निचले स्तर पर आई है, लेकिन यह ऐतिहासिक रूप से अब भी मजबूत बनी हुई है। कंपनियों ने बिक्री में बढ़ोतरी और सप्लाई को सुचारू बनाए रखने के प्रयासों को इस सुधार का कारण बताया है।
एक सकारात्मक संकेत यह भी है कि सप्लायर्स समय पर कच्चा माल पहुँचाने में सफल रहे हैं, जिससे वेंडर परफॉर्मेंस में सुधार देखा गया।
भारतीय कंपनियों के एक्सपोर्ट ऑर्डर में पिछले साल सितंबर के बाद सबसे तेज वृद्धि हुई है। ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, यूरोप, जापान, मध्य पूर्व, तुर्की और वियतनाम जैसे देशों से मांग में वृद्धि हुई है।
रिपोर्ट के अनुसार, कंपनियों ने पिछले सात महीनों में सबसे ज्यादा रोजगार बढ़ाया है और आने वाले वर्ष के लिए उत्पादन को लेकर अधिक आशावादी हैं।