20 अक्टूबर 2026
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मेरठ में ₹200 करोड़ की क्रिटिकल मिनरल रिफाइनरी, सर्कुलॉजी ने इन्वेस्ट यूपी से किया MOU

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मेरठ में ₹200 करोड़ की क्रिटिकल मिनरल रिफाइनरी, सर्कुलॉजी ने इन्वेस्ट यूपी से किया MOU

सारांश

मेरठ का एक DPIIT-मान्यता प्राप्त डीप टेक स्टार्टअप ₹200 करोड़ की लागत से क्रिटिकल मिनरल और रेयर अर्थ रिफाइनरी लगाने जा रहा है — ऐसे समय में जब भारत लिथियम, कोबाल्ट और नियोडिमियम जैसे खनिजों के लिए लगभग पूरी तरह आयात पर निर्भर है। यह परियोजना पश्चिमी यूपी में हाई-टेक औद्योगिक बदलाव की एक नई कड़ी हो सकती है।

मुख्य बातें

सर्कुलॉजी क्लींटेक प्राइवेट लिमिटेड ने 20 अक्टूबर 2026 को इन्वेस्ट यूपी के साथ ₹200 करोड़ की रिफाइनरी परियोजना के लिए MOU साइन किया।
रिफाइनरी पूर्ण क्षमता पर प्रतिवर्ष 10,000 टन सामग्री का प्रसंस्करण करेगी और लिथियम, कोबाल्ट, निकेल, नियोडिमियम, डिस्प्रोसियम व टर्बियम जैसे खनिज पुनः प्राप्त करेगी।
परियोजना से 300 प्रत्यक्ष और 1,000 अप्रत्यक्ष रोज़गार सृजित होने का अनुमान है।
केंद्र सरकार ने क्रिटिकल मिनरल रीसाइक्लिंग के लिए ₹1,500 करोड़ की प्रोत्साहन योजना और रेयर अर्थ चुंबक विनिर्माण के लिए ₹7,280 करोड़ (नवंबर 2025) आवंटित किए हैं।
योगी सरकार MOU के तहत स्वीकृतियाँ, मंजूरियाँ और प्रोत्साहन योजनाओं का लाभ दिलाने में सहयोग करेगी।

मेरठ की डीप टेक स्टार्टअप सर्कुलॉजी क्लींटेक प्राइवेट लिमिटेड ने 20 अक्टूबर 2026 को इन्वेस्ट यूपी के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता-ज्ञापन (MOU) साइन किया, जिसके तहत मेरठ में ₹200 करोड़ के निवेश से लिथियम-आयन बैटरी और रेयर अर्थ रिफाइनरी स्थापित की जाएगी। इस परियोजना से लगभग 300 लोगों को प्रत्यक्ष और 1,000 लोगों को अप्रत्यक्ष रोज़गार मिलने का अनुमान है।

परियोजना की मुख्य विशेषताएँ

रिफाइनरी को चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जाएगा। पूर्ण क्षमता पर पहुँचने के बाद, इसमें प्रतिवर्ष 10,000 टन सामग्री के प्रसंस्करण की योजना है। इस्तेमाल हो चुकी लिथियम-आयन बैटरियों से लिथियम, कोबाल्ट और निकेल जैसे महत्वपूर्ण खनिज पुनः प्राप्त किए जाएँगे।

इसके अतिरिक्त, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, हार्ड ड्राइव और इलेक्ट्रिक वाहनों की मोटरों में उपयोग होने वाले पुराने स्थायी चुंबकों से नियोडिमियम, डिस्प्रोसियम और टर्बियम जैसे रेयर अर्थ तत्व भी निकाले जाएँगे। ये खनिज इलेक्ट्रिक वाहन, नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा क्षेत्र के लिए अपरिहार्य हैं।

आयात निर्भरता और राष्ट्रीय संदर्भ

यूपी स्टार्टअप मिशन के मुख्य कार्यपालक अधिकारी सुमित महाजन के अनुसार, लिथियम, कोबाल्ट और निकेल की घरेलू जरूरतों का लगभग पूरा हिस्सा आयात से पूरा होता है। रेयर अर्थ चुंबकों की आपूर्ति में भी आयात पर भारी निर्भरता एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। ऐसे में देश के भीतर रीसाइक्लिंग और रिफाइनिंग क्षमता विकसित करना रणनीतिक दृष्टि से ज़रूरी हो गया है।

यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल्स मिशन के तहत ई-कचरे और पुरानी बैटरियों से खनिज रीसाइक्लिंग को प्रोत्साहित करने के लिए ₹1,500 करोड़ की प्रोत्साहन योजना चला रही है। इसके अलावा, नवंबर 2025 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने रेयर अर्थ स्थायी चुंबकों के विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए ₹7,280 करोड़ की योजना को मंजूरी दी थी, जिसका लक्ष्य सालाना 6,000 टन उत्पादन क्षमता विकसित करना है।

योगी सरकार का समर्थन

महाजन ने बताया कि योगी सरकार स्थानीय उद्यमियों, स्टार्टअप और तकनीक आधारित उद्योगों को प्रोत्साहित करने पर विशेष ज़ोर दे रही है। MOU के तहत सरकार आवश्यक स्वीकृतियाँ और मंजूरियाँ दिलाने में सुविधा प्रदान करेगी। साथ ही, लागू नियमों के अनुसार केंद्र और राज्य सरकार की प्रोत्साहन योजनाओं का लाभ दिलाने में भी सहयोग किया जाएगा।

गौरतलब है कि सर्कुलॉजी DPIIT से मान्यता प्राप्त एक डीप टेक स्टार्टअप है, जो सर्कुलर इकोनॉमी — अर्थात् संसाधनों की रीसाइक्लिंग और पुनः उपयोग — पर केंद्रित है। कंपनी को यूपी स्टार्टअप मिशन के अंतर्गत राज्य के स्टार्टअप इकोसिस्टम से भी सहयोग मिला है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश पर असर

यह परियोजना पश्चिमी उत्तर प्रदेश में नई तकनीक आधारित उद्योगों के विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मेरठ की पहचान अब तक पारंपरिक उद्योगों — खेल सामग्री, कैंची, ताले — के लिए होती रही है; रिफाइनरी से क्रिटिकल मिनरल रीसाइक्लिंग जैसे अत्याधुनिक क्षेत्र में शहर की एक नई औद्योगिक पहचान बन सकती है।

सर्कुलॉजी की प्रस्तावित रिफाइनरी से प्राप्त रीसाइकिल्ड खनिज और रेयर अर्थ ऑक्साइड घरेलू औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने में सहायक हो सकते हैं। आने वाले वर्षों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि परियोजना किस गति से ज़मीन पर उतरती है और रोज़गार तथा आत्मनिर्भरता के वादे कहाँ तक पूरे होते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका रणनीतिक महत्व इससे कहीं बड़ा है — भारत अपनी EV और रक्षा महत्वाकांक्षाओं के लिए लिथियम, कोबाल्ट और नियोडिमियम का लगभग पूरा आयात करता है, और घरेलू रीसाइक्लिंग क्षमता की यह कमी एक वास्तविक आपूर्ति-श्रृंखला जोखिम है। असली सवाल यह है कि क्या MOU ज़मीन पर उतरेगा — उत्तर प्रदेश में स्टार्टअप के लिए नियामकीय मंजूरियाँ पाना अब भी समय लेने वाला काम है। केंद्र की ₹1,500 करोड़ रीसाइक्लिंग प्रोत्साहन योजना के बावजूद, इस क्षेत्र में सत्यापित परिणाम अभी दिखने बाकी हैं; सर्कुलॉजी की सफलता इसी बात का पैमाना बनेगी।
RashtraPress
20 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मेरठ में प्रस्तावित क्रिटिकल मिनरल रिफाइनरी क्या है?
यह मेरठ की डीप टेक स्टार्टअप सर्कुलॉजी क्लींटेक प्राइवेट लिमिटेड द्वारा ₹200 करोड़ के निवेश से स्थापित होने वाली रिफाइनरी है, जो इस्तेमाल हो चुकी लिथियम-आयन बैटरियों और पुराने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से लिथियम, कोबाल्ट, निकेल और रेयर अर्थ तत्व पुनः प्राप्त करेगी। इन्वेस्ट यूपी के साथ MOU 20 अक्टूबर 2026 को साइन किया गया।
इस परियोजना से कितने रोज़गार मिलेंगे?
परियोजना के अनुसार लगभग 300 लोगों को प्रत्यक्ष और 1,000 लोगों को अप्रत्यक्ष रोज़गार मिलने का अनुमान है। रिफाइनरी चरणबद्ध तरीके से विकसित होगी और पूर्ण क्षमता पर प्रतिवर्ष 10,000 टन सामग्री का प्रसंस्करण करेगी।
रेयर अर्थ और क्रिटिकल मिनरल रीसाइक्लिंग क्यों ज़रूरी है?
भारत लिथियम, कोबाल्ट और निकेल की घरेलू ज़रूरतों के लिए लगभग पूरी तरह आयात पर निर्भर है। EV, नवीकरणीय ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र में इन खनिजों की बढ़ती माँग को देखते हुए देश के भीतर रीसाइक्लिंग क्षमता विकसित करना आत्मनिर्भरता के लिए ज़रूरी माना जा रहा है।
केंद्र सरकार क्रिटिकल मिनरल क्षेत्र में क्या कदम उठा रही है?
केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल्स मिशन के तहत ई-कचरे और पुरानी बैटरियों से रीसाइक्लिंग को प्रोत्साहित करने के लिए ₹1,500 करोड़ की प्रोत्साहन योजना शामिल की है। इसके अलावा, नवंबर 2025 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने रेयर अर्थ स्थायी चुंबक विनिर्माण के लिए ₹7,280 करोड़ की योजना को भी मंजूरी दी थी।
योगी सरकार इस परियोजना में क्या भूमिका निभाएगी?
MOU के तहत योगी सरकार आवश्यक स्वीकृतियाँ और मंजूरियाँ प्राप्त करने में सुविधा प्रदान करेगी। साथ ही, लागू नियमों के अनुसार केंद्र और राज्य सरकार की प्रोत्साहन योजनाओं का लाभ दिलाने में भी सहयोग किया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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