मेरठ में ₹200 करोड़ की क्रिटिकल मिनरल रिफाइनरी, सर्कुलॉजी ने इन्वेस्ट यूपी से किया MOU
सारांश
मुख्य बातें
मेरठ की डीप टेक स्टार्टअप सर्कुलॉजी क्लींटेक प्राइवेट लिमिटेड ने 20 अक्टूबर 2026 को इन्वेस्ट यूपी के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता-ज्ञापन (MOU) साइन किया, जिसके तहत मेरठ में ₹200 करोड़ के निवेश से लिथियम-आयन बैटरी और रेयर अर्थ रिफाइनरी स्थापित की जाएगी। इस परियोजना से लगभग 300 लोगों को प्रत्यक्ष और 1,000 लोगों को अप्रत्यक्ष रोज़गार मिलने का अनुमान है।
परियोजना की मुख्य विशेषताएँ
रिफाइनरी को चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जाएगा। पूर्ण क्षमता पर पहुँचने के बाद, इसमें प्रतिवर्ष 10,000 टन सामग्री के प्रसंस्करण की योजना है। इस्तेमाल हो चुकी लिथियम-आयन बैटरियों से लिथियम, कोबाल्ट और निकेल जैसे महत्वपूर्ण खनिज पुनः प्राप्त किए जाएँगे।
इसके अतिरिक्त, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, हार्ड ड्राइव और इलेक्ट्रिक वाहनों की मोटरों में उपयोग होने वाले पुराने स्थायी चुंबकों से नियोडिमियम, डिस्प्रोसियम और टर्बियम जैसे रेयर अर्थ तत्व भी निकाले जाएँगे। ये खनिज इलेक्ट्रिक वाहन, नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा क्षेत्र के लिए अपरिहार्य हैं।
आयात निर्भरता और राष्ट्रीय संदर्भ
यूपी स्टार्टअप मिशन के मुख्य कार्यपालक अधिकारी सुमित महाजन के अनुसार, लिथियम, कोबाल्ट और निकेल की घरेलू जरूरतों का लगभग पूरा हिस्सा आयात से पूरा होता है। रेयर अर्थ चुंबकों की आपूर्ति में भी आयात पर भारी निर्भरता एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। ऐसे में देश के भीतर रीसाइक्लिंग और रिफाइनिंग क्षमता विकसित करना रणनीतिक दृष्टि से ज़रूरी हो गया है।
यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल्स मिशन के तहत ई-कचरे और पुरानी बैटरियों से खनिज रीसाइक्लिंग को प्रोत्साहित करने के लिए ₹1,500 करोड़ की प्रोत्साहन योजना चला रही है। इसके अलावा, नवंबर 2025 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने रेयर अर्थ स्थायी चुंबकों के विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए ₹7,280 करोड़ की योजना को मंजूरी दी थी, जिसका लक्ष्य सालाना 6,000 टन उत्पादन क्षमता विकसित करना है।
योगी सरकार का समर्थन
महाजन ने बताया कि योगी सरकार स्थानीय उद्यमियों, स्टार्टअप और तकनीक आधारित उद्योगों को प्रोत्साहित करने पर विशेष ज़ोर दे रही है। MOU के तहत सरकार आवश्यक स्वीकृतियाँ और मंजूरियाँ दिलाने में सुविधा प्रदान करेगी। साथ ही, लागू नियमों के अनुसार केंद्र और राज्य सरकार की प्रोत्साहन योजनाओं का लाभ दिलाने में भी सहयोग किया जाएगा।
गौरतलब है कि सर्कुलॉजी DPIIT से मान्यता प्राप्त एक डीप टेक स्टार्टअप है, जो सर्कुलर इकोनॉमी — अर्थात् संसाधनों की रीसाइक्लिंग और पुनः उपयोग — पर केंद्रित है। कंपनी को यूपी स्टार्टअप मिशन के अंतर्गत राज्य के स्टार्टअप इकोसिस्टम से भी सहयोग मिला है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश पर असर
यह परियोजना पश्चिमी उत्तर प्रदेश में नई तकनीक आधारित उद्योगों के विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मेरठ की पहचान अब तक पारंपरिक उद्योगों — खेल सामग्री, कैंची, ताले — के लिए होती रही है; रिफाइनरी से क्रिटिकल मिनरल रीसाइक्लिंग जैसे अत्याधुनिक क्षेत्र में शहर की एक नई औद्योगिक पहचान बन सकती है।
सर्कुलॉजी की प्रस्तावित रिफाइनरी से प्राप्त रीसाइकिल्ड खनिज और रेयर अर्थ ऑक्साइड घरेलू औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने में सहायक हो सकते हैं। आने वाले वर्षों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि परियोजना किस गति से ज़मीन पर उतरती है और रोज़गार तथा आत्मनिर्भरता के वादे कहाँ तक पूरे होते हैं।