भारत-यूरोपीय संघ का ₹169 करोड़ का ईवी बैटरी रीसाइक्लिंग मिशन शुरू, 15 सितंबर तक आमंत्रित प्रस्ताव

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भारत-यूरोपीय संघ का ₹169 करोड़ का ईवी बैटरी रीसाइक्लिंग मिशन शुरू, 15 सितंबर तक आमंत्रित प्रस्ताव

सारांश

भारत और यूरोपीय संघ ने ₹169 करोड़ की संयुक्त ईवी बैटरी रीसाइक्लिंग पहल शुरू की है — यह TTC के तहत तीसरा बड़ा सहयोग है। लिथियम, कोबाल्ट और ग्रेफाइट जैसे दुर्लभ खनिजों की रिकवरी और सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देना इसका लक्ष्य है। प्रस्ताव 15 सितंबर 2026 तक आमंत्रित हैं।

मुख्य बातें

भारत और यूरोपीय संघ ने 6 मई 2026 को ₹169 करोड़ की ईवी बैटरी रीसाइक्लिंग पहल लॉन्च की।
यह भारत-ईयू TTC के ग्रीन एनर्जी वर्किंग ग्रुप-2 के तहत तीसरी संयुक्त पहल है।
फंडिंग का हिस्सा होराइजन यूरोप से; भारत में भारी उद्योग मंत्रालय का समर्थन।
लिथियम, ग्रेफाइट और कोबाल्ट की प्रभावी रिकवरी और सेकंड लाइफ बैटरी उपयोग पर फोकस।
भारत में संयुक्त पायलट प्रोजेक्ट स्थापित होगा; प्रस्ताव 15 सितंबर 2026 तक आमंत्रित।

भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने 6 मई 2026 को स्वच्छ ऊर्जा सहयोग को नई ऊँचाई देते हुए इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) बैटरियों की रीसाइक्लिंग के लिए ₹169 करोड़ की तीसरी संयुक्त पहल की शुरुआत की। यह कार्यक्रम भारत-ईयू ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल (TTC) के अंतर्गत शुरू किया गया है और प्रस्ताव जमा करने की अंतिम तिथि 15 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है।

मिशन में क्या शामिल है

यह कार्यक्रम ग्रीन और क्लीन एनर्जी टेक्नोलॉजी वर्किंग ग्रुप-2 का हिस्सा है। इसका मुख्य उद्देश्य ईवी बैटरियों की सुरक्षित रीसाइक्लिंग और लिथियम, ग्रेफाइट तथा कोबाल्ट जैसे कीमती खनिजों की अधिकतम रिकवरी सुनिश्चित करना है। फंडिंग का एक हिस्सा यूरोपीय संघ के 'होराइजन यूरोप' कार्यक्रम से आएगा, जबकि भारत में घरेलू भागीदारी को भारी उद्योग मंत्रालय का समर्थन प्राप्त होगा।

तकनीकी प्राथमिकताएँ और पायलट प्रोजेक्ट

इस पहल के तहत आधुनिक रीसाइक्लिंग तकनीकों में नवाचार को प्रोत्साहन दिया जाएगा। सुरक्षित और डिजिटल प्रणालियों के माध्यम से बैटरी संग्रह को बेहतर बनाने और नई तकनीकों के परीक्षण के लिए पायलट प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता दी जाएगी। विशेष रूप से, भारत में एक भारत-ईयू संयुक्त पायलट प्रोजेक्ट स्थापित किया जाएगा, जहाँ वास्तविक परिस्थितियों में नई तकनीकों का परीक्षण कर उन्हें तेज़ी से उद्योग में लागू किया जा सकेगा।

यह कार्यक्रम उच्च रिकवरी दर हासिल करने, विभिन्न प्रकार की बैटरियों को संभालने, लॉजिस्टिक्स को सुदृढ़ करने और सुरक्षा मानकों को मजबूत करने पर केंद्रित रहेगा। बैटरियों के सेकंड लाइफ यानी दोबारा उपयोग को भी इस योजना में प्रमुखता दी गई है।

सर्कुलर इकोनॉमी पर असर

इन प्रयासों से देश में सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा मिलेगा और जरूरी खनिजों के आयात पर निर्भरता में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है। गौरतलब है कि भारत अभी लिथियम और कोबाल्ट जैसे महत्त्वपूर्ण खनिजों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है, जो ईवी क्षेत्र की दीर्घकालिक आपूर्ति शृंखला के लिए एक संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है।

विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया

भारत सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार अजय कुमार सूद ने इस पहल को भारत-ईयू रणनीतिक साझेदारी को सुदृढ़ करने की दिशा में बड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा,

संपादकीय दृष्टिकोण

भारत का ईवी विस्तार उसी आपूर्ति शृंखला जोखिम को पुनर्जीवित करता रहेगा जिससे वह बचना चाहता है। ₹169 करोड़ की राशि प्रतीकात्मक रूप से महत्त्वपूर्ण है, लेकिन वास्तविक परिणाम पायलट प्रोजेक्ट से उद्योग-स्तरीय तैनाती तक की यात्रा पर निर्भर करेगा — एक ऐसी छलाँग जिसमें पिछले कई द्विपक्षीय तकनीकी कार्यक्रम अटक गए हैं।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-ईयू ईवी बैटरी रीसाइक्लिंग मिशन क्या है?
यह भारत और यूरोपीय संघ की ₹169 करोड़ की संयुक्त पहल है, जो TTC के ग्रीन एनर्जी वर्किंग ग्रुप-2 के तहत शुरू की गई है। इसका उद्देश्य ईवी बैटरियों की सुरक्षित रीसाइक्लिंग और लिथियम, कोबाल्ट व ग्रेफाइट जैसे खनिजों की प्रभावी रिकवरी सुनिश्चित करना है।
इस मिशन के लिए प्रस्ताव जमा करने की अंतिम तिथि क्या है?
प्रस्ताव जमा करने की अंतिम तिथि 15 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है। इच्छुक संस्थाएँ और शोधकर्ता इस तारीख तक अपने प्रस्ताव प्रस्तुत कर सकते हैं।
इस पहल में फंडिंग कहाँ से आएगी?
फंडिंग का एक हिस्सा यूरोपीय संघ के 'होराइजन यूरोप' कार्यक्रम से आएगा, जबकि भारत में भारी उद्योग मंत्रालय घरेलू भागीदारों को समर्थन देगा। कुल फंड ₹169 करोड़ है।
इस मिशन से भारत को क्या फायदा होगा?
इस मिशन से भारत में सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा मिलेगा और लिथियम व कोबाल्ट जैसे खनिजों के आयात पर निर्भरता कम होगी। साथ ही एक संयुक्त पायलट प्रोजेक्ट के ज़रिए नई रीसाइक्लिंग तकनीकों को वास्तविक परिस्थितियों में परखा जा सकेगा।
भारत-ईयू TTC क्या है और इसमें यह कौन-सी पहल है?
भारत-ईयू ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल (TTC) भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार, तकनीक और सुरक्षा सहयोग का एक उच्च-स्तरीय मंच है। यह ईवी बैटरी रीसाइक्लिंग कार्यक्रम TTC के तहत तीसरी संयुक्त पहल है।
राष्ट्र प्रेस
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