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आईआईटी रुड़की और डब्ल्यूआरआई इंडिया का एमओयू: टिकाऊ बैटरी व स्वच्छ ऊर्जा अनुसंधान को मिलेगी नई दिशा

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आईआईटी रुड़की और डब्ल्यूआरआई इंडिया का एमओयू: टिकाऊ बैटरी व स्वच्छ ऊर्जा अनुसंधान को मिलेगी नई दिशा

सारांश

आईआईटी रुड़की और डब्ल्यूआरआई इंडिया का यह एमओयू महज एक औपचारिकता नहीं — यह भारत की बैटरी और स्वच्छ ऊर्जा नीति को शैक्षणिक-नीतिगत आधार देने की कोशिश है। ऐसे समय में जब देश EV और नवीकरणीय ऊर्जा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है, यह साझेदारी अनुसंधान से नीति तक की खाई को पाटने का वादा करती है।

मुख्य बातें

आईआईटी रुड़की और डब्ल्यूआरआई इंडिया ने 20 जून 2026 को समझौता ज्ञापन ( एमओयू ) पर हस्ताक्षर किए।
साझेदारी के तहत टिकाऊ बैटरी , इलेक्ट्रिक मोबिलिटी , बैटरी रीसाइक्लिंग , महत्वपूर्ण खनिज मूल्य शृंखला और सर्कुलर इकोनॉमी पर संयुक्त कार्य होगा।
संयुक्त अनुसंधान, कार्यशालाएँ, नीति अध्ययन और छात्र-शिक्षक आदान-प्रदान कार्यक्रम शामिल हैं।
एमओयू पर प्रोफेसर विवेक कुमार मलिक (आईआईटी रुड़की) और पवन कुमार मुलुकुटला (डब्ल्यूआरआई इंडिया) ने हस्ताक्षर किए।
यह कदम भारत के बढ़ते नवीकरणीय ऊर्जा और EV क्षेत्र की ज़रूरतों को शैक्षणिक-नीतिगत समर्थन देने की दिशा में उठाया गया है।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की और डब्ल्यूआरआई इंडिया ने 20 जून 2026 को एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए, जिसका उद्देश्य टिकाऊ बैटरी तकनीक, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, बैटरी रीसाइक्लिंग और स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन जैसे अहम क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान को गति देना है। यह साझेदारी ऐसे समय में सामने आई है जब भारत अपने नवीकरणीय ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में तेज़ विस्तार के दौर से गुज़र रहा है।

साझेदारी के मुख्य क्षेत्र

इस एमओयू के तहत दोनों संस्थान संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं, नीति अध्ययन, ज्ञान-साझाकरण कार्यक्रमों, कार्यशालाओं, प्रशिक्षण और सम्मेलनों के साथ-साथ छात्रों और शिक्षकों के आदान-प्रदान को भी प्रोत्साहित करेंगे। सहयोग के प्रमुख विषयों में टिकाऊ परिवहन, बैटरी तकनीक, महत्वपूर्ण खनिज मूल्य शृंखला और सर्कुलर इकोनॉमी शामिल हैं।

गौरतलब है कि भारत में नवीकरणीय ऊर्जा और उन्नत विनिर्माण क्षेत्र के तेज़ विस्तार के चलते मजबूत आपूर्ति शृंखलाओं और संसाधनों के कुशल उपयोग की माँग लगातार बढ़ रही है। यह साझेदारी उसी ज़रूरत को संबोधित करने की दिशा में एक ठोस कदम है।

संस्थान प्रमुखों की प्रतिक्रिया

आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रोफेसर कमल किशोर पंत ने कहा, "टिकाऊ और आत्मनिर्भर ऊर्जा भविष्य की ओर बढ़ने के लिए शिक्षा जगत, उद्योग, अनुसंधान संस्थानों और नीति निर्माताओं के बीच मजबूत सहयोग जरूरी है।"

उन्होंने आगे कहा, "डब्ल्यूआरआई इंडिया के साथ यह साझेदारी अनुसंधान, नवाचार, क्षमता निर्माण और ज्ञान सृजन के नए अवसर पैदा करेगी। इससे टिकाऊ बैटरियों, सर्कुलर इकोनॉमी, महत्वपूर्ण खनिजों और स्वच्छ परिवहन जैसे क्षेत्रों में भारत की ऊर्जा परिवर्तन यात्रा को मजबूती मिलेगी।"

अनुसंधान एवं औद्योगिक सहयोग का ढाँचा

आईआईटी रुड़की के प्रायोजित अनुसंधान एवं औद्योगिक परामर्श (एसआरआईसी) के डीन प्रोफेसर विवेक कुमार मलिक ने कहा, "यह एमओयू संयुक्त अनुसंधान, शैक्षणिक आदान-प्रदान और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के लिए एक मजबूत आधार उपलब्ध कराता है।"

उन्होंने यह भी कहा, "आईआईटी रुड़की की अनुसंधान क्षमताओं और डब्ल्यूआरआई इंडिया की सतत विकास एवं नीति निर्माण संबंधी विशेषज्ञता को मिलाकर हम ऐसे परिणाम हासिल करना चाहते हैं जो तकनीकी प्रगति और तथ्य-आधारित निर्णय लेने में योगदान दें।"

एमओयू पर हस्ताक्षर करने वाले प्रतिनिधि

इस समझौते पर आईआईटी रुड़की की ओर से एसआरआईसी के डीन प्रोफेसर विवेक कुमार मलिक और डब्ल्यूआरआई इंडिया की ओर से एकीकृत परिवहन, स्वच्छ वायु और हाइड्रोजन कार्यक्रम के कार्यकारी निदेशक पवन कुमार मुलुकुटला ने हस्ताक्षर किए।

आगे की राह

यह साझेदारी भारत के ऊर्जा परिवर्तन एजेंडे को शैक्षणिक और नीतिगत धरातल पर मज़बूत करने का प्रयास है। आने वाले समय में दोनों संस्थानों द्वारा संयुक्त शोध पत्र, नीति अनुशंसाएँ और प्रशिक्षण कार्यक्रम सामने आने की उम्मीद है, जो भारत की बैटरी और स्वच्छ ऊर्जा नीति को नई दिशा दे सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

या इसके निष्कर्ष सरकार की बैटरी और EV नीति को वास्तविक रूप से प्रभावित करेंगे। भारत में बैटरी रीसाइक्लिंग का ढाँचा अभी शैशवावस्था में है और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति शृंखला पर निर्भरता एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। ऐसे में इस तरह की संस्थागत साझेदारियाँ दिशा तो सही दिखाती हैं, परंतु उनकी सफलता क्रियान्वयन की गति और नीतिगत जुड़ाव की गहराई पर निर्भर करेगी।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईआईटी रुड़की और डब्ल्यूआरआई इंडिया के बीच एमओयू क्या है?
यह 20 जून 2026 को हस्ताक्षरित एक समझौता ज्ञापन है, जिसके तहत दोनों संस्थान टिकाऊ बैटरी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, बैटरी रीसाइक्लिंग, महत्वपूर्ण खनिज मूल्य शृंखला और स्वच्छ ऊर्जा नीति अनुसंधान में मिलकर काम करेंगे। इसमें संयुक्त शोध परियोजनाएँ, कार्यशालाएँ और छात्र-शिक्षक आदान-प्रदान भी शामिल हैं।
इस साझेदारी में किन क्षेत्रों पर काम होगा?
दोनों संस्थान टिकाऊ बैटरी तकनीक, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, संसाधन दक्षता, बैटरी रीसाइक्लिंग, महत्वपूर्ण खनिज मूल्य शृंखला, सर्कुलर इकोनॉमी और स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन से जुड़े नीति अनुसंधान पर संयुक्त रूप से काम करेंगे।
इस एमओयू पर हस्ताक्षर किसने किए?
आईआईटी रुड़की की ओर से एसआरआईसी के डीन प्रोफेसर विवेक कुमार मलिक और डब्ल्यूआरआई इंडिया की ओर से एकीकृत परिवहन, स्वच्छ वायु और हाइड्रोजन कार्यक्रम के कार्यकारी निदेशक पवन कुमार मुलुकुटला ने हस्ताक्षर किए।
यह साझेदारी भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत में नवीकरणीय ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र तेज़ी से बढ़ रहा है, जिससे टिकाऊ बैटरी तकनीक और मज़बूत आपूर्ति शृंखलाओं की माँग बढ़ी है। यह साझेदारी शैक्षणिक अनुसंधान को नीति निर्माण से जोड़कर इस माँग को पूरा करने की दिशा में काम करेगी।
इस एमओयू के तहत छात्रों को क्या लाभ मिलेगा?
एमओयू के अंतर्गत छात्रों और शिक्षकों के आदान-प्रदान कार्यक्रम, प्रशिक्षण, कार्यशालाएँ और सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। इससे स्वच्छ ऊर्जा और बैटरी तकनीक के क्षेत्र में शोधार्थियों को व्यावहारिक अनुभव और नीतिगत समझ दोनों विकसित करने का अवसर मिलेगा।
राष्ट्र प्रेस
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