क्या मेरठ में बेटी के अपहरण और मां की हत्या ने उत्तर प्रदेश सरकार को चुनौती दी?
सारांश
Key Takeaways
- मेरठ में दलित महिला की हत्या और बेटी का अपहरण एक गंभीर मुद्दा है।
- विपक्ष ने उत्तर प्रदेश सरकार की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।
- पुलिस ने आरोपियों की पहचान कर ली है।
नई दिल्ली/मेरठ, 10 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। मेरठ में एक महिला की हत्या और उसकी बेटी के अपहरण के बाद, विपक्षी दलों ने उत्तर प्रदेश सरकार की तीखी आलोचना की है। नेताओं का कहना है कि उत्तर प्रदेश को कानून-व्यवस्था की अराजकता के गर्त में धकेला जा रहा है।
कांग्रेस के नेता उदित राज ने शनिवार को 'एक्स' पर लिखा, "मेरठ के कपसाड़ गांव में एक दलित महिला अपनी बेटी के साथ खेत जाने के लिए निकली थी। रास्ते में गुंडों ने बेटी का किडनैप करने का प्रयास किया। मां ने रोकने की कोशिश की, जिसके फलस्वरूप उसकी हत्या कर दी गई और बेटी को अगवा कर लिया गया। इस घटना को लगभग 48 घंटे हो चुके हैं, लेकिन अब तक कोई सुराग नहीं मिला है।"
उदित राज ने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश में दलितों के खिलाफ उत्पीड़न की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया, "क्या आरोपियों के घरों पर बुलडोजर चलाया गया?"
समाजवादी पार्टी के नेता योगेश वर्मा ने कहा, "यह घटना बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाली है। इसने पूरे जिले के दलित समुदाय को हिलाकर रख दिया है। ऐसे क्रूर कार्यों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।"
मेरठ पुलिस के मुताबिक, कपसाड़ गांव में अपराधियों ने 20 वर्षीय लड़की का अपहरण किया। इस दौरान, 50 वर्षीय महिला ने अपनी बेटी को बचाने की कोशिश की, लेकिन अपराधियों ने उस पर धारदार हथियार से हमला किया। बाद में महिला की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई।
इस घटना से क्षेत्र में गुस्सा फैल गया है। पुलिस ने आरोपियों की पहचान पारस सोम और सुनील कुमार के रूप में की है, जो उसी गांव के निवासी हैं। फिलहाल, पुलिस आरोपियों और अगवा की गई लड़की की तलाश में जुटी है।