मेटा विवाद पर साइबर एक्सपर्ट रितेश भाटिया: 'माफी नहीं, जवाबदेही चाहिए' — नए IT कानून की माँग
सारांश
मुख्य बातें
साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञ रितेश भाटिया ने 6 अगस्त 2026 को मेटा द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फेसबुक पोस्ट पर अस्थायी रोक लगाने और बाद में माफी माँगने के मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। भाटिया का कहना है कि केवल माफी पर्याप्त नहीं है — सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की ठोस जवाबदेही तय होनी चाहिए। मेटा के मुख्य वैश्विक मामलों के अधिकारी जोएल कैपलन ने केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव से सीधे माफी माँगी थी।
मेटा का विवादों से पुराना नाता
रितेश भाटिया ने कहा कि यह पहला मौका नहीं है जब मेटा को किसी बड़े डिजिटल विवाद के बाद सफाई देनी पड़ी हो। उनके अनुसार, इससे पहले चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटेरियल (CSAM) और डीपफेक जैसे अत्यंत गंभीर मामलों में आपत्तिजनक डिजिटल और भौतिक कंटेंट का व्यापक प्रसार हुआ था, जिस पर बड़ा हंगामा मचा था। उन्होंने कहा कि उन मामलों में की गई ठोस कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई।
भाटिया ने रेखांकित किया कि बच्चों से जुड़ी यौन शोषण सामग्री का प्रसार एक बेहद गंभीर कानूनी अपराध है, फिर भी अपेक्षित स्तर पर कड़े कदम नहीं उठाए गए।
प्राथमिकताओं में अंतर पर सवाल
भाटिया ने कहा कि प्रधानमंत्री से जुड़े इस मामले में लगातार दबाव और कड़ी प्रतिक्रिया के बाद मेटा ने मात्र तीन दिनों के भीतर माफी माँग ली। उन्होंने कहा, 'यह स्थिति इस बात को दर्शाती है कि अलग-अलग मामलों में कार्रवाई की गति और प्राथमिकताओं में स्पष्ट अंतर दिखाई देता है।' उनका मानना है कि CSAM जैसे संवेदनशील मामलों में जिस स्तर की तत्परता अपेक्षित थी, वैसी प्रतिक्रिया नहीं मिली, जबकि प्रधानमंत्री से जुड़े मामले में अपेक्षाकृत तेज़ी से कदम उठाए गए।
माफी नहीं, जवाबदेही का तंत्र बने
साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञ ने कहा कि मेटा का रिकॉर्ड कई देशों में विवादों से भरा रहा है, लेकिन अधिकांश मामलों में कंपनी माफी माँगकर आगे बढ़ जाती है। उनके अनुसार, 'केवल माफी मांग लेना पर्याप्त नहीं है — ऐसे मामलों में जवाबदेही तय करने और भविष्य में पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था भी आवश्यक है।' उन्होंने यह भी कहा कि मेटा का यह तर्क कि वह 'केवल एक प्लेटफॉर्म' है और यूजर की गलत गतिविधि की जिम्मेदारी कंपनी पर नहीं, मौजूदा डिजिटल दौर में अब स्वीकार्य नहीं है।
नए IT कानून की ज़रूरत
भाटिया ने कहा कि भारत का सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम वर्ष 2000 में बना था और 2008 में संशोधित हुआ था। अब 2026 में डिजिटल तकनीक, सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेज़ी से बदलते परिदृश्य को देखते हुए एक नए, आधुनिक IT कानून की ज़रूरत पहले से कहीं अधिक महसूस हो रही है। उन्होंने सरकार से जल्द से जल्द यह कदम उठाने की माँग की।
AI और डीपफेक पर विशेष ध्यान देने की अपील
रितेश भाटिया ने कहा कि सरकार और संबंधित एजेंसियों को स्पष्ट शर्तें तय करनी चाहिए — CSAM जैसे कंटेंट के लिए किसी भी प्रकार की सहनशीलता नहीं होनी चाहिए। साथ ही, AI से तैयार कंटेंट और डीपफेक की पहचान करने और उन्हें रोकने के लिए सोशल मीडिया कंपनियों की स्पष्ट रणनीति होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देशों में AI के कारण बड़ी चुनौतियाँ उभरी हैं और भारत को अपनी प्राथमिकताओं के आधार पर इस पर चर्चा करनी चाहिए, न कि केवल मेटा के दृष्टिकोण से। यह विवाद भारत में सोशल मीडिया नियमन के भविष्य पर एक व्यापक बहस को नई धार दे सकता है।