मेटा ने PM मोदी की फेसबुक पोस्ट ब्लॉक होने पर माँगी माफी, IT मंत्री वैष्णव को जताया खेद
सारांश
मुख्य बातें
सोशल मीडिया दिग्गज मेटा ने 5 अगस्त 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फेसबुक पोस्ट पर अस्थायी रूप से लगी रोक के लिए औपचारिक माफी माँगी। कंपनी के मुख्य वैश्विक मामलों के अधिकारी जोएल कैपलन ने केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव से सीधे खेद व्यक्त किया और इसे कंपनी की गलती स्वीकार किया।
मुलाकात और माफी का घटनाक्रम
जोएल कैपलन बुधवार को नई दिल्ली में मेटा के एक वैश्विक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे थे, जिसने मंत्री वैष्णव से मुलाकात की। कैपलन ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'प्रधानमंत्री मोदी की पोस्ट पर लगी रोक हमारी गलती थी और इसके लिए मैंने मेटा की ओर से मंत्री से माफी माँगी है।' इस बैठक से पहले प्रतिनिधिमंडल ने सूचना प्रौद्योगिकी सचिव एस. कृष्णन के साथ भी अलग से विचार-विमर्श किया।
जुकरबर्ग ने भी जताया खेद
सरकारी सूत्रों के अनुसार, उसी दिन मेटा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जुकरबर्ग ने भी प्लेटफॉर्म पर आपत्तिजनक एवं भ्रामक सामग्री के प्रसार तथा संचालन संबंधी कमियों पर खेद व्यक्त किया। सूत्रों के मुताबिक, जुकरबर्ग ने सरकार द्वारा उठाई गई चिंताओं को स्वीकार करते हुए प्लेटफॉर्म प्रबंधन में हुई त्रुटियों पर अफसोस जताया।
सरकार की कड़ी चेतावनी
सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारतीय अधिकारियों ने मेटा को स्पष्ट रूप से बताया कि यदि कोई प्लेटफॉर्म यह तय करने लगे कि कौन-सा कंटेंट किस उपयोगकर्ता तक पहुँचेगा, तो सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत मिलने वाली 'सेफ हार्बर' यानी कानूनी संरक्षण की सुविधाएँ उस पर लागू नहीं हो सकतीं। यह चेतावनी भारत में डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही को लेकर सरकार के कड़े रुख को दर्शाती है।
व्यापक संदर्भ और बहस
यह माफी ऐसे समय में आई है जब भारत में मेटा की कंटेंट मॉडरेशन नीतियों और प्लेटफॉर्म संचालन को लेकर गहन बहस चल रही है। PM मोदी की फेसबुक पोस्ट का कुछ समय के लिए अनुपलब्ध रहना एक संवेदनशील घटना मानी गई, जिसने कंपनी की भूमिका और निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए। गौरतलब है कि भारत मेटा के सबसे बड़े उपयोगकर्ता बाज़ारों में से एक है, और यहाँ कंपनी के लिए नियामकीय अनुपालन अत्यंत महत्वपूर्ण है।
आगे क्या होगा
इस घटनाक्रम के बाद डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही और कंटेंट प्रबंधन को लेकर नीतिगत चर्चा और तेज़ होने की संभावना है। सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि 'सेफ हार्बर' संरक्षण की शर्तों पर पुनर्विचार किया जा सकता है यदि प्लेटफॉर्म तटस्थ मध्यस्थ की भूमिका से हटते हैं।