6 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

मेटा के एल्गोरिद्म और कंटेंट मॉडरेशन पर MeitY से नई बैठक, PM मोदी की पोस्ट ब्लॉक पर माफी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
मेटा के एल्गोरिद्म और कंटेंट मॉडरेशन पर MeitY से नई बैठक, PM मोदी की पोस्ट ब्लॉक पर माफी

सारांश

PM मोदी की फेसबुक पोस्ट पर रोक लगाने की गलती मानते हुए मेटा ने माफी माँगी — और अब सरकार कंपनी के एल्गोरिद्म व कंटेंट मॉडरेशन की गहरी पड़ताल करने की तैयारी में है। MeitY और मेटा के बीच यह नया दौर डीपफेक, CSAM और प्लेटफॉर्म जवाबदेही की बड़ी लड़ाई का हिस्सा है।

मुख्य बातें

केंद्र सरकार जल्द ही मेटा के साथ कंटेंट रिकमेंडेशन एल्गोरिद्म और कंटेंट मॉडरेशन प्रणाली पर नई बैठक करेगी।
मेटा के वैश्विक मामलों के प्रमुख जोएल कैपलन ने PM मोदी की फेसबुक पोस्ट पर अस्थायी रोक को कंपनी की गलती मानते हुए अश्विनी वैष्णव से माफी माँगी।
बुधवार को मेटा के वैश्विक प्रतिनिधिमंडल ने IT सचिव एस.
कृष्णन और मंत्री वैष्णव से अलग-अलग बैठकें कीं।
सरकार डीपफेक , CSAM और हानिकारक सामग्री के प्रसार को लेकर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से अधिक पारदर्शिता माँग रही है।
मेटा की वैश्विक टीम MeitY के साथ लगातार संपर्क में रहेगी और तकनीकी प्रणालियों की समीक्षा होगी।

केंद्र सरकार आने वाले दिनों में मेटा के साथ एक नए दौर की वार्ता की तैयारी में है, जिसमें कंपनी के कंटेंट रिकमेंडेशन एल्गोरिद्म और कंटेंट मॉडरेशन प्रणाली की कार्यप्रणाली पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है। यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब मेटा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फेसबुक पोस्ट पर अस्थायी रोक लगाए जाने के मामले में सार्वजनिक रूप से माफी माँगी है।

मुख्य घटनाक्रम

सरकारी सूत्रों के अनुसार, आगामी बैठकों में इस पर विस्तार से विचार किया जाएगा कि मेटा के एल्गोरिद्म उपयोगकर्ताओं को किस आधार पर कंटेंट दिखाते हैं और कंपनी की मॉडरेशन प्रणाली भारतीय कानूनों तथा नियामकीय आवश्यकताओं के अनुरूप काम कर रही है या नहीं। मेटा की वैश्विक टीम इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के साथ लगातार संपर्क में रहेगी।

जानकारी के मुताबिक, केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव गुरुवार को मेटा के प्रतिनिधियों के साथ एक और बैठक कर सकते हैं, जिसमें प्लेटफॉर्म की कार्यप्रणाली, जवाबदेही और भारतीय नियमों के पालन जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।

मेटा की माफी और पृष्ठभूमि

मेटा के मुख्य वैश्विक मामलों के अधिकारी जोएल कैपलन ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि प्रधानमंत्री मोदी की फेसबुक पोस्ट पर लगाई गई अस्थायी रोक कंपनी की गलती थी। कैपलन ने कहा, "प्रधानमंत्री मोदी की पोस्ट पर लगी रोक हमारी गलती थी और इसके लिए मैंने मेटा की ओर से मंत्री से माफी माँगी है।"

बीते बुधवार को मेटा के एक वैश्विक प्रतिनिधिमंडल ने अश्विनी वैष्णव से मुलाकात की थी, जिसमें कंपनी ने अपने प्लेटफॉर्म के संचालन में हुई कुछ कमियों को स्वीकार किया। मंत्री से मुलाकात से पहले प्रतिनिधिमंडल ने सूचना प्रौद्योगिकी सचिव एस. कृष्णन के साथ भी अलग से चर्चा की थी।

सरकार की चिंताएँ और निगरानी का दायरा

यह बातचीत ऐसे समय में हो रही है जब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर हानिकारक सामग्री, डीपफेक और बाल यौन शोषण से संबंधित सामग्री (CSAM) के प्रसार को लेकर चिंताएँ तेज हो गई हैं। सरकार इन मुद्दों पर सोशल मीडिया कंपनियों से अधिक जवाबदेही और पारदर्शिता की माँग कर रही है।

गौरतलब है कि भारत सरकार डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही और नियामकीय अनुपालन को लेकर अपनी निगरानी लगातार बढ़ाती आ रही है। दोनों पक्ष इस बात की समीक्षा करेंगे कि कंपनी की तकनीकी प्रणालियाँ कंटेंट की पहुँच और वितरण को किस प्रकार प्रभावित करती हैं।

आम जनता और डिजिटल पारिस्थितिकी पर असर

सरकार और मेटा के बीच चल रही यह वार्ता सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए सुरक्षा उपायों को मजबूत बनाने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है। सरकार चाहती है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का दुरुपयोग रोका जाए और वे भारतीय कानूनों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करें, जिसका सीधा असर भारत के करोड़ों फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप उपयोगकर्ताओं पर पड़ेगा।

क्या होगा आगे

आने वाले दिनों में MeitY और मेटा के बीच तकनीकी स्तर पर विस्तृत समीक्षा बैठकें होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रक्रिया भारत में बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए नियामकीय ढाँचे को और अधिक स्पष्ट और बाध्यकारी बनाने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या ये बैठकें केवल संबंध-प्रबंधन हैं या भारत वास्तव में एल्गोरिद्म की जाँच के लिए बाध्यकारी तंत्र बनाने की ओर बढ़ रहा है। यूरोपीय संघ का डिजिटल सेवा अधिनियम (DSA) इसका एक मॉडल है, जहाँ प्लेटफॉर्म्स को एल्गोरिद्म ऑडिट देना अनिवार्य है — भारत अभी तक ऐसी किसी वैधानिक बाध्यता से दूर है। बिना स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट के, ये बैठकें कंपनी के लिए छवि-प्रबंधन का अवसर बनकर रह सकती हैं। CSAM और डीपफेक पर सरकार की चिंताएँ वाजिब हैं, पर उनका समाधान बंद कमरे की बातचीत से नहीं, बल्कि पारदर्शी और जाँच-योग्य नियामकीय ढाँचे से ही होगा।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत सरकार और मेटा के बीच नई बैठक किस बारे में होगी?
आगामी बैठकों में मेटा के कंटेंट रिकमेंडेशन एल्गोरिद्म और कंटेंट मॉडरेशन प्रणाली की समीक्षा होगी। सरकार यह जाँचना चाहती है कि ये प्रणालियाँ भारतीय कानूनों और नियामकीय आवश्यकताओं के अनुरूप काम कर रही हैं या नहीं।
मेटा ने PM मोदी की फेसबुक पोस्ट ब्लॉक होने पर माफी क्यों माँगी?
मेटा के मुख्य वैश्विक मामलों के अधिकारी जोएल कैपलन ने स्वीकार किया कि प्रधानमंत्री मोदी की पोस्ट पर अस्थायी रोक कंपनी की गलती थी। उन्होंने केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव से सीधे माफी माँगी।
MeitY और मेटा की बुधवार की बैठक में क्या हुआ?
बुधवार को मेटा के वैश्विक प्रतिनिधिमंडल ने पहले IT सचिव एस. कृष्णन और फिर मंत्री अश्विनी वैष्णव से अलग-अलग बैठकें कीं। इस दौरान कंपनी ने अपने प्लेटफॉर्म के संचालन में हुई कुछ कमियों को स्वीकार किया।
सरकार डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से किन मुद्दों पर जवाबदेही माँग रही है?
सरकार मुख्य रूप से हानिकारक सामग्री, डीपफेक और बाल यौन शोषण से संबंधित सामग्री (CSAM) के प्रसार पर अंकुश लगाने के लिए सोशल मीडिया कंपनियों से अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही की माँग कर रही है।
इन बैठकों का भारतीय उपयोगकर्ताओं पर क्या असर पड़ेगा?
यदि सरकार और मेटा के बीच बाध्यकारी नियामकीय सहमति बनती है, तो भारत के करोड़ों फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप उपयोगकर्ताओं को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी डिजिटल अनुभव मिल सकता है। हालाँकि, इसका व्यावहारिक असर नियामकीय ढाँचे की मजबूती पर निर्भर करेगा।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. कल
  3. कल
  4. कल
  5. कल
  6. कल
  7. कल
  8. 1 सप्ताह पहले