30 जुलाई 2026
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मेटा को सरकार का नोटिस: PM मोदी की फेसबुक पोस्ट पर रोक का माँगा विस्तृत जवाब, 10 दिनों में बैठक

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मेटा को सरकार का नोटिस: PM मोदी की फेसबुक पोस्ट पर रोक का माँगा विस्तृत जवाब, 10 दिनों में बैठक

सारांश

PM मोदी की नीट पेपर लीक वाली फेसबुक पोस्ट पर अस्थायी रोक लगने के बाद सरकार ने मेटा को कड़ा संदेश दिया है — 10 दिनों में बैठक, नीतिगत और तकनीकी दोनों स्तरों पर जवाब माँगा। मेटा ने माफी माँगी और 28 जुलाई से नया प्रोटोकॉल लागू किया, पर सरकार संतुष्ट नहीं।

मुख्य बातें

MeitY ने मेटा के वरिष्ठ अधिकारियों को 7 से 10 दिनों के भीतर बैठक के लिए तलब किया है।
23 जुलाई को पोस्ट किए गए PM मोदी के नीट पेपर लीक संबंधी वीडियो पर फेसबुक ने अस्थायी रोक लगाई थी।
कृष्णन ने कहा कि मेटा का प्रारंभिक स्पष्टीकरण अपर्याप्त है और नीतिगत व तकनीकी दोनों स्तरों पर जवाब चाहिए।
मेटा ने घटना को तकनीकी खराबी बताते हुए माफी माँगी और 28 जुलाई से हाई-प्रोफाइल अकाउंट्स के लिए नया निगरानी प्रोटोकॉल लागू किया।
सरकार जानना चाहती है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए मेटा क्या ठोस उपाय कर रही है।

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने मेटा के वरिष्ठ अधिकारियों को तलब किया है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फेसबुक पोस्ट पर लगाई गई अस्थायी रोक के संदर्भ में नीतिगत एवं तकनीकी दोनों स्तरों पर विस्तृत स्पष्टीकरण देने को कहा है। मंत्रालय के अनुसार यह बैठक अगले सात से 10 दिनों के भीतर आयोजित होने की संभावना है।

मामले की पृष्ठभूमि

23 जुलाई को प्रधानमंत्री मोदी ने एक वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने देश के छात्रों को संबोधित करते हुए नीट परीक्षा पेपर लीक मामले में सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया था। इस पोस्ट पर फेसबुक ने कुछ समय के लिए अस्थायी रोक लगा दी थी, जिसके बाद सरकार ने मेटा के एक वरिष्ठ अधिकारी को तत्काल बुलाया। यह नया कदम उसी बुलावे के एक दिन बाद 30 जुलाई को उठाया गया है।

सरकार का रुख

MeitY के सचिव एस. कृष्णन ने स्पष्ट किया कि सरकार मामले की पूरी जानकारी चाहती है। उन्होंने कहा, 'भारत अपनी चिंताएं सीधे मेटा तक पहुँचाना चाहता है और उन हालात के बारे में पूरी जानकारी चाहता है जिनकी वजह से यह अस्थायी रोक लगाई गई थी।' कृष्णन ने यह भी बताया कि मेटा ने पहले ही खेद जताया है और प्रारंभिक स्पष्टीकरण दिया है, लेकिन केंद्र सरकार इसे अपर्याप्त मानती है और इसमें यह भी जानना चाहती है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या उपाय किए जा रहे हैं।

मेटा का जवाब और नया प्रोटोकॉल

मेटा ने इस घटना को तकनीकी खराबी करार देते हुए माफी माँगी है। कृष्णन के अनुसार, कंपनी ने सरकार को सूचित किया है कि ऐसी घटनाओं को दोबारा रोकने के लिए उसने 28 जुलाई से एक नया प्रोटोकॉल लागू किया है। इस अद्यतन प्रक्रिया में प्रधानमंत्री सहित अन्य हाई-प्रोफाइल अकाउंट्स द्वारा प्रकाशित सामग्री की अतिरिक्त निगरानी शामिल है, ताकि अनजाने में लगाई जाने वाली किसी भी रोक को रोका जा सके।

आम जनता और डिजिटल संप्रभुता पर असर

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब भारत सरकार बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ अपने नियामकीय संबंधों को पुनः परिभाषित कर रही है। गौरतलब है कि सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश) नियम, 2021 के तहत सरकार पहले से ही सोशल मीडिया कंपनियों पर अनुपालन का दबाव बनाए हुए है। किसी सत्तारूढ़ देश के प्रमुख की पोस्ट पर रोक लगने की यह घटना डिजिटल मंचों की सामग्री-नियंत्रण नीतियों और राष्ट्रीय संप्रभुता के बीच के तनाव को उजागर करती है।

आगे क्या होगा

अगले सात से 10 दिनों में होने वाली बैठक में मेटा के वरिष्ठ अधिकारियों से तकनीकी और नीतिगत दोनों स्तरों पर जवाब माँगा जाएगा। सरकार यह भी सुनिश्चित करना चाहती है कि भविष्य में किसी भी राजनीतिक या सार्वजनिक महत्व के अकाउंट के साथ ऐसी चूक न हो। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकरण का असर भारत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के नियमन की दिशा पर भी पड़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल बना रहता है कि क्या एक देश के प्रधानमंत्री के अकाउंट के लिए पहले से कोई सुरक्षा प्रोटोकॉल क्यों नहीं था। सरकार का यह दबाव IT नियम 2021 के बाद से जारी उस रणनीतिक रुख का हिस्सा है जिसमें वह बड़े प्लेटफॉर्म्स को भारतीय नियामकीय ढाँचे के प्रति जवाबदेह बनाना चाहती है — लेकिन आलोचक यह भी पूछते हैं कि क्या यह जवाबदेही सभी राजनीतिक दलों के नेताओं पर समान रूप से लागू होगी।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी की फेसबुक पोस्ट पर रोक क्यों लगाई गई थी?
मेटा ने इसे तकनीकी खराबी बताया है। 23 जुलाई को पोस्ट किए गए वीडियो में PM मोदी ने नीट पेपर लीक मामले में सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया था, जिस पर फेसबुक ने कुछ समय के लिए अस्थायी रोक लगा दी। कंपनी ने माफी माँगते हुए इसे अनजाने में हुई गलती करार दिया।
भारत सरकार ने मेटा से क्या माँगा है?
MeitY ने मेटा के वरिष्ठ अधिकारियों को 7 से 10 दिनों के भीतर बैठक के लिए बुलाया है। सरकार नीतिगत और तकनीकी दोनों स्तरों पर विस्तृत स्पष्टीकरण चाहती है, जिसमें यह भी शामिल है कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या उपाय किए जा रहे हैं।
मेटा ने भविष्य में ऐसी घटनाएँ रोकने के लिए क्या कदम उठाए हैं?
मेटा ने 28 जुलाई से एक नया प्रोटोकॉल लागू किया है जिसमें प्रधानमंत्री और अन्य हाई-प्रोफाइल अकाउंट्स की सामग्री की अतिरिक्त निगरानी की व्यवस्था की गई है। इसका उद्देश्य अनजाने में लगाई जाने वाली किसी भी रोक को रोकना है।
MeitY सचिव एस. कृष्णन ने इस मामले पर क्या कहा?
कृष्णन ने कहा कि मेटा का प्रारंभिक स्पष्टीकरण अपर्याप्त है और सरकार सीधे मेटा से उन परिस्थितियों की पूरी जानकारी चाहती है जिनके कारण यह रोक लगाई गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि भारत अपनी चिंताएं सीधे कंपनी तक पहुँचाना चाहता है।
इस मामले का भारत में सोशल मीडिया नियमन पर क्या असर हो सकता है?
यह घटना IT नियम 2021 के तहत पहले से जारी नियामकीय दबाव को और तेज कर सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार इस प्रकरण को बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए सख्त जवाबदेही तंत्र बनाने के आधार के रूप में उपयोग कर सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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