मेटा को सरकार का नोटिस: PM मोदी की फेसबुक पोस्ट पर रोक का माँगा विस्तृत जवाब, 10 दिनों में बैठक
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने मेटा के वरिष्ठ अधिकारियों को तलब किया है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फेसबुक पोस्ट पर लगाई गई अस्थायी रोक के संदर्भ में नीतिगत एवं तकनीकी दोनों स्तरों पर विस्तृत स्पष्टीकरण देने को कहा है। मंत्रालय के अनुसार यह बैठक अगले सात से 10 दिनों के भीतर आयोजित होने की संभावना है।
मामले की पृष्ठभूमि
23 जुलाई को प्रधानमंत्री मोदी ने एक वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने देश के छात्रों को संबोधित करते हुए नीट परीक्षा पेपर लीक मामले में सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया था। इस पोस्ट पर फेसबुक ने कुछ समय के लिए अस्थायी रोक लगा दी थी, जिसके बाद सरकार ने मेटा के एक वरिष्ठ अधिकारी को तत्काल बुलाया। यह नया कदम उसी बुलावे के एक दिन बाद 30 जुलाई को उठाया गया है।
सरकार का रुख
MeitY के सचिव एस. कृष्णन ने स्पष्ट किया कि सरकार मामले की पूरी जानकारी चाहती है। उन्होंने कहा, 'भारत अपनी चिंताएं सीधे मेटा तक पहुँचाना चाहता है और उन हालात के बारे में पूरी जानकारी चाहता है जिनकी वजह से यह अस्थायी रोक लगाई गई थी।' कृष्णन ने यह भी बताया कि मेटा ने पहले ही खेद जताया है और प्रारंभिक स्पष्टीकरण दिया है, लेकिन केंद्र सरकार इसे अपर्याप्त मानती है और इसमें यह भी जानना चाहती है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या उपाय किए जा रहे हैं।
मेटा का जवाब और नया प्रोटोकॉल
मेटा ने इस घटना को तकनीकी खराबी करार देते हुए माफी माँगी है। कृष्णन के अनुसार, कंपनी ने सरकार को सूचित किया है कि ऐसी घटनाओं को दोबारा रोकने के लिए उसने 28 जुलाई से एक नया प्रोटोकॉल लागू किया है। इस अद्यतन प्रक्रिया में प्रधानमंत्री सहित अन्य हाई-प्रोफाइल अकाउंट्स द्वारा प्रकाशित सामग्री की अतिरिक्त निगरानी शामिल है, ताकि अनजाने में लगाई जाने वाली किसी भी रोक को रोका जा सके।
आम जनता और डिजिटल संप्रभुता पर असर
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब भारत सरकार बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ अपने नियामकीय संबंधों को पुनः परिभाषित कर रही है। गौरतलब है कि सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश) नियम, 2021 के तहत सरकार पहले से ही सोशल मीडिया कंपनियों पर अनुपालन का दबाव बनाए हुए है। किसी सत्तारूढ़ देश के प्रमुख की पोस्ट पर रोक लगने की यह घटना डिजिटल मंचों की सामग्री-नियंत्रण नीतियों और राष्ट्रीय संप्रभुता के बीच के तनाव को उजागर करती है।
आगे क्या होगा
अगले सात से 10 दिनों में होने वाली बैठक में मेटा के वरिष्ठ अधिकारियों से तकनीकी और नीतिगत दोनों स्तरों पर जवाब माँगा जाएगा। सरकार यह भी सुनिश्चित करना चाहती है कि भविष्य में किसी भी राजनीतिक या सार्वजनिक महत्व के अकाउंट के साथ ऐसी चूक न हो। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकरण का असर भारत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के नियमन की दिशा पर भी पड़ सकता है।