उत्तर प्रदेश: मिर्जापुर के मड़िहान में ‘दीदी कैफे’ - महिलाओं के सशक्तिकरण का नया उदाहरण

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उत्तर प्रदेश: मिर्जापुर के मड़िहान में ‘दीदी कैफे’ - महिलाओं के सशक्तिकरण का नया उदाहरण

सारांश

मिर्जापुर के मड़िहान में अदाणी फाउंडेशन द्वारा स्थापित ‘दीदी कैफे’ ने महिलाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता का एक नया अवसर प्रदान किया है। यह कैफे न केवल लोगों को स्वच्छ भोजन उपलब्ध कराता है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण का एक प्रेरणादायक मॉडल भी बन चुका है।

Key Takeaways

  • महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर
  • स्वच्छता और गुणवत्ता का महत्व
  • स्थानीय बुनियादी ढांचे में सुधार
  • आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम
  • समुदाय की सक्रिय भागीदारी

लखनऊ, 4 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के मड़िहान क्षेत्र में अदाणी फाउंडेशन की पहल से आरंभ हुआ ‘दीदी कैफे’ न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में साफ और किफायती भोजन की कमी को समाप्त कर रहा है, बल्कि यह महिलाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता की नई दिशा भी दिखा रहा है।

उत्तर प्रदेश के छोटे कस्बों और ग्रामीण इलाकों में स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण भोजन की उपलब्धता अक्सर एक गंभीर समस्या बन जाती है। इसी समस्या को हल करने के उद्देश्य से अदाणी फाउंडेशन ने मिर्जापुर जिले के मड़िहान में ‘दीदी कैफे’ की स्थापना की है, जो महिलाओं के सशक्तिकरण और स्थानीय रोजगार का एक सफल उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है।

जनगणना 2011 के अनुसार, मिर्जापुर में महिलाओं की वर्क पॉपुलेशन रेशियो लगभग 22.7 प्रतिशत है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में सीमित रोजगार के अवसरों का संकेत देती है। ऐसे में ‘बेटी बचाओ स्वयं सहायता समूह’ के द्वारा शुरू किए गए इस कैफे ने महिलाओं को न केवल नियमित आय का साधन प्रदान किया है, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

कैफे का संचालन स्वयं सहायता समूह ‘बेटी बचाओ’ की 10 महिलाओं द्वारा किया जा रहा है। समूह की अध्यक्ष रिंकू देवी, सचिव बिट्टन और कोषाध्यक्ष जय ललिता के नेतृत्व में सोनी, जोहरा बेगम, नजबुल, सायरुन, हसीना बेगम, सोना बेगम और पार्वती समेत अन्य महिलाएं कैफे के समस्त कार्यों की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। भोजन की गुणवत्ता और स्वाद को बरकरार रखने के लिए एक पुरुष शेफ की भी नियुक्ति की गई है।

देवरी कलां गांव की ये महिलाएं सुबह से शाम तक भोजन बनाने, परोसने और साफ-सफाई की जिम्मेदारी निभाती हैं। कैफे में स्थानीय स्नैक्स, मिठाइयाँ, लंच और डिनर की सुविधाएँ उपलब्ध हैं, जिनकी कीमतें आम जनता की पहुंच में हैं। यह कैफे मड़िहान तहसील कार्यालय के सामने और यूपी राज्य राजमार्ग संख्या-5 पर स्थित है, जिससे यहाँ स्थानीय लोगों के साथ-साथ राहगीरों के लिए भी पहुंचना सरल है।

लगभग 35 व्यक्तियों की बैठने की क्षमता वाला यह कैफे अदाणी थर्मल पावर प्लांट के कर्मचारियों, तहसील कर्मियों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के स्टाफ, छात्रों, मजदूरों और आम नागरिकों के बीच तेजी से लोकप्रिय होता जा रहा है। ‘दीदी कैफे’ की सबसे बड़ी विशेषता यहाँ की स्वच्छता और गुणवत्ता है। कैफे में प्रीमियम गुणवत्ता के तेल और खाद्य सामग्री का उपयोग किया जाता है और भोजन बनाने एवं परोसने के दौरान सख्त हाइजीन मानकों का पालन किया जाता है। इसके अलावा, ग्राहकों के लिए साफ और आरामदायक बैठने की व्यवस्था भी उपलब्ध है, जो छोटे कस्बों में बहुत कम देखने को मिलती है।

यह पहल इस बात का प्रमाण है कि यदि महिलाओं को अवसर और संसाधन प्रदान किए जाएं, तो वे न केवल अपने परिवार बल्कि समाज की आर्थिक और सामाजिक संरचना में बदलाव ला सकती हैं। मड़िहान का ‘दीदी कैफे’ आज ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने और लोगों को बेहतर भोजन उपलब्ध कराने की दिशा में एक प्रेरणादायक मॉडल बन चुका है।

Point of View

NationPress
04/04/2026

Frequently Asked Questions

‘दीदी कैफे’ क्या है?
यह एक कैफे है जो मिर्जापुर के मड़िहान में अदाणी फाउंडेशन द्वारा स्थापित किया गया है, जो महिलाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता का अवसर प्रदान करता है।
कैफे में क्या-क्या उपलब्ध है?
कैफे में स्थानीय स्नैक्स, मिठाइयाँ, लंच और डिनर की सुविधाएँ उपलब्ध हैं।
कैफे का संचालन कौन करता है?
कैफे का संचालन ‘बेटी बचाओ स्वयं सहायता समूह’ की 10 महिलाओं द्वारा किया जा रहा है।
कैफे की विशेषता क्या है?
कैफे की विशेषता इसकी स्वच्छता और गुणवत्तापूर्ण भोजन है।
क्या इस कैफे का सामाजिक प्रभाव है?
हाँ, यह कैफे महिलाओं के सशक्तिकरण और आर्थिक स्थिति में सुधार लाने का कार्य कर रहा है।
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