क्या पर्यावरण संरक्षण की सीख परिवार से ही मिली? - मोहन नागर

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क्या पर्यावरण संरक्षण की सीख परिवार से ही मिली? - मोहन नागर

सारांश

मोहन नागर, मध्य प्रदेश के एक सामाजिक कार्यकर्ता, को पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। उन्होंने अपने कामों के लिए कृतज्ञता व्यक्त की और इसे अपने समुदाय को समर्पित किया। यह कहानी न केवल उनकी उपलब्धियों की है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का भी प्रतीक है।

Key Takeaways

  • पर्यावरण संरक्षण के लिए जन जागरूकता महत्वपूर्ण है।
  • पद्मश्री पुरस्कार व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि सामूहिक प्रयास का परिणाम है।
  • समाज सेवा में चुपचाप काम करने वाले लोगों की पहचान जरूरी है।
  • परिवार से मिली प्रेरणा से सामाजिक कार्यों में बढ़ावा मिलता है।
  • कार्यक्रमों के माध्यम से समाज के अनमोल हीरों को सामने लाना चाहिए।

भोपाल, 25 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पर्यावरण और जल संरक्षण के क्षेत्र में मध्य प्रदेश के मोहन नागर को पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा गया है। केंद्र सरकार ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर 2026 के पद्म पुरस्कारों की सूची में मोहन नागर का नाम शामिल किया है।

मोहन नागर ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें यह पुरस्कार मिलने पर गर्व महसूस हो रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया और यह पुरस्कार बैतूल के कार्यकर्ताओं और आदिवासी समुदाय को समर्पित किया।

उन्होंने बताया कि यह सम्मान मेरी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है। मैं इसे बैतूल के आदिवासी समुदायों और गंगा अवतरण अभियान के हजारों वॉलंटियर्स को समर्पित करता हूं। इस पहचान से पर्यावरण संरक्षण और समाज सेवा का संदेश पूरे देश और दुनिया में पहुंचेगा।

मोहन नागर ने अपनी पृष्ठभूमि साझा करते हुए कहा कि मैं एक साधारण किसान परिवार से हूं और मैंने गांव के स्कूल में पढ़ाई की। इसके बाद उज्जैन जाकर बैतूल में विद्या भारती के माध्यम से शिक्षा का प्रचार किया। मैंने लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता पैदा करने का प्रयास किया।

उन्होंने मोदी सरकार की सराहना करते हुए कहा, "जो लोग समाज के लिए चुपचाप काम करते हैं, मोदी सरकार ऐसे अनमोल हीरों को पहचानती है। इससे अन्य लोगों को प्रेरणा मिलती है।"

मोहन नागर ने बताया कि उन्हें अपने परिवार से भी पर्यावरण संरक्षण की प्रेरणा मिली। उनके दादाजी जब नदी में जाते थे, तो कचरा निकालते थे। गांव में सामाजिक जीवन की चुनौतियों का सामना करते हुए उन्होंने उन्हें अवसर में बदला।

उन्होंने कहा कि हर वर्ष पुरस्कारों की घोषणा होती है, और समाज के उन लोगों को चुना जाता है जो पुरस्कार की उम्मीद नहीं करते। पीएम मोदी ऐसे लोगों को सामने लाते हैं, जो प्रेरणा का स्रोत बनते हैं।

मोहन नागर ने पीएम मोदी के 'मन की बात' कार्यक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि वे हमेशा ऐसे लोगों की प्रशंसा करते हैं जो चुपचाप समाज सेवा में लगे हैं।

उन्होंने कहा कि अब जो कार्य कर रहे हैं, वह और तेजी से करेंगे। इस पुरस्कार से उत्साह मिला है। हम मध्य प्रदेश के 55 हजार गांवों में पर्यावरण और जल संरक्षण का कार्य और बढ़ाएंगे।

Point of View

बल्कि यह हमें यह भी याद दिलाती है कि समाज सेवा का कार्य चुपचाप किया जाता है। मोहन नागर जैसे लोग हमारे समाज में प्रेरणा का स्रोत हैं। उनकी कहानी हमें दिखाती है कि व्यक्तिगत प्रयासों से व्यापक बदलाव लाया जा सकता है।
NationPress
09/02/2026

Frequently Asked Questions

मोहन नागर को कौन सा पुरस्कार मिला है?
मोहन नागर को पद्मश्री पुरस्कार मिला है।
मोहन नागर किस क्षेत्र में काम करते हैं?
मोहन नागर पर्यावरण और जल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं।
मोहन नागर ने किस समुदाय को पुरस्कार समर्पित किया?
उन्होंने यह पुरस्कार बैतूल के आदिवासी समुदाय को समर्पित किया।
मोहन नागर की प्रेरणा कहां से मिली?
उन्हें अपने दादाजी से पर्यावरण संरक्षण की प्रेरणा मिली।
मोहन नागर का मुख्य कार्य क्या है?
उनका मुख्य कार्य पर्यावरण और जल संरक्षण का प्रचार करना है।
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