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क्या माकपा ने चेन्नई में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के पास विरोध प्रदर्शन किया?

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क्या माकपा ने चेन्नई में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के पास विरोध प्रदर्शन किया?

सारांश

चेन्नई में माकपा के कार्यकर्ताओं ने अमेरिका की सैन्य कार्रवाई के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में 150 से अधिक लोग शामिल हुए, जिनमें महिलाएं भी थीं। क्या यह विरोध भारत में लोकतांत्रिक असहमति के दबाव का प्रतीक है? जानें इस महत्वपूर्ण घटना के बारे में।

मुख्य बातें

अमेरिकी अखंडता के खिलाफ माकपा का विरोध प्रदर्शन प्रदर्शन में महिलाओं का योगदान पुलिस की सुरक्षा कार्रवाई लोकतांत्रिक असहमति का महत्व संवेदनशील राजनयिक क्षेत्र में प्रदर्शन

चेन्नई, 5 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिका की सैन्य कार्रवाई के चलते वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के कथित अपहरण की निंदा करते हुए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (माकपा) के कार्यकर्ताओं ने सोमवार को चेन्नई के तेयनाम्पेट में स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के निकट एक विरोध प्रदर्शन आयोजित किया। इस दौरान लगभग 150 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया, जिनमें 25 महिलाएं भी शामिल थीं。

यह विरोध प्रदर्शन वेनेजुएला के आंतरिक मामलों में, पार्टी के अनुसार, “साम्राज्यवादी हस्तक्षेप” के खिलाफ आयोजित किया गया। प्रदर्शनकारी रॉयपेट्टा स्थित पीटर्स रोड पर, वाणिज्य दूतावास से कुछ दूरी पर एकत्र हुए और अमेरिका के खिलाफ नारे लगाते हुए वेनेजुएला की संप्रभुता का सम्मान करने की मांग की।

प्रदर्शन का नेतृत्व पार्टी के वरिष्ठ नेता जी. रामकृष्णन, पूर्व मदुरावायल विधायक भीमा राव और सेंट्रल चेन्नई जिला अध्यक्ष सेल्वम ने किया। पार्टी के झंडे और अमेरिका की कार्रवाई की निंदा करने वाले पोस्टर प्रमुखता से प्रदर्शित किए गए। नेताओं ने सभा को संबोधित किया और दूतावास की ओर मार्च के लिए समर्थकों को जुटाने का प्रयास किया।

प्रदर्शन की आशंका को देखते हुए पुलिस ने इलाके में कड़े सुरक्षा इंतजाम किए थे। पीटर्स रोड और उसके आसपास बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया और दूतावास तक पहुंच रोकने के लिए धातु की बैरिकेडिंग लगाई गई। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही अस्थायी रूप से प्रतिबंधित कर दी गई।

पुलिस की बार-बार चेतावनियों और निषेधाज्ञा के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने दूतावास की ओर बढ़ने की कोशिश की और कथित तौर पर बैरिकेड तोड़ने का प्रयास किया, जिसके बाद पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। संक्षिप्त धक्का-मुक्की और तीखी नोकझोंक के बाद स्थिति को बिगड़ने से रोकने के लिए प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।

हिरासत में लिए गए लोगों को दो पुलिस बसों में रॉयपेट्टा के एक नजदीकी सामुदायिक भवन में ले जाया गया, जहां उन्हें कई घंटों तक रखा गया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, बाद में उन्हें निषेधाज्ञा के उल्लंघन से बचने की चेतावनी देकर रिहा कर दिया गया।

वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने कहा कि यह कार्रवाई सार्वजनिक सुरक्षा और संवेदनशील राजनयिक क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए की गई। एक अधिकारी ने कहा, “हम विरोध के अधिकार का सम्मान करते हैं, लेकिन विदेशी मिशनों के पास प्रदर्शन सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत आते हैं।”

वहीं, पार्टी नेताओं ने प्रशासन पर लोकतांत्रिक असहमति को दबाने का आरोप लगाया और भारत सरकार से वेनेजुएला के खिलाफ कथित अमेरिकी आक्रामकता पर कड़ा रुख अपनाने की मांग दोहराई।

बाद में एक्स पर एक पोस्ट में माकपा ने कहा, “माकपा कंट्रोल कमीशन के चेयरपर्सन जी. रामकृष्णन, उत्तर, मध्य और दक्षिण चेन्नई जिला समितियों के सचिवों तथा पार्टी कार्यकर्ताओं को चेन्नई में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के सामने वेनेजुएला पर ट्रंप प्रशासन के हमले और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के अपहरण के विरोध में प्रदर्शन करते समय हिरासत में लिया गया।”

संपादकीय दृष्टिकोण

वहीं दूसरी ओर प्रशासन की सुरक्षा कार्रवाई दर्शाती है कि संवेदनशील राजनयिक क्षेत्रों में शांति बनाए रखना कितना महत्वपूर्ण है। लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विरोध का महत्व है, परंतु इसे जिम्मेदारी से करना चाहिए।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

माकपा ने क्यों प्रदर्शन किया?
माकपा ने अमेरिका की सैन्य कार्रवाई के खिलाफ और वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के अपहरण के विरोध में प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन में कितने लोग शामिल हुए?
प्रदर्शन में लगभग 150 लोग शामिल हुए, जिनमें 25 महिलाएं भी थीं।
पुलिस ने प्रदर्शन पर क्या कार्रवाई की?
पुलिस ने सुरक्षा कारणों से प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया और इलाके में कड़े सुरक्षा इंतजाम किए।
क्या प्रदर्शन का आयोजन शांतिपूर्ण था?
प्रदर्शन के दौरान कुछ धक्का-मुक्की हुई, लेकिन पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में रखा।
माकपा ने प्रशासन पर क्या आरोप लगाया?
माकपा ने प्रशासन पर लोकतांत्रिक असहमति को दबाने का आरोप लगाया।
राष्ट्र प्रेस
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