क्या नर्मदा जयंती पर घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी?

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क्या नर्मदा जयंती पर घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी?

सारांश

नर्मदा जयंती पर, नरसिंहपुर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। भक्तों ने मां नर्मदा के जल और घाटों की स्वच्छता का संकल्प लिया। इस अवसर पर गणतंत्र दिवस की झलक भी दिखाई दी। मां नर्मदा का पर्व आस्था और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का संदेश देता है।

मुख्य बातें

नर्मदा जयंती पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा।
भक्तों ने जल और घाटों की स्वच्छता का संकल्प लिया।
गणतंत्र दिवस का भी आयोजन हुआ।
स्वच्छता अभियान का संदेश दिया गया।
प्रकृति और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का महत्त्व।

नरसिंहपुर, 25 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश की जीवन रेखा के रूप में जानी जाने वाली मां नर्मदा की जयंती पर रविवार को एक अद्वितीय दृश्य देखने को मिला। नरसिंहपुर जिले से प्रवाहित होने वाली यह नदी न केवल क्षेत्र की उर्वरा भूमि को समृद्ध बनाती है, बल्कि पूरे प्रदेश की सुंदरता और जीवनधारा से भी जुड़ी हुई है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पदयात्राओं और शोभायात्राओं के साथ नर्मदा की ओर प्रवाहित हुए।

नरसिंहपुर के सतधारा सहित सभी घाटों पर भक्तों का सैलाब देखने को मिला। इस दिन गणतंत्र दिवस की झलक भी दिखाई दी, जहां स्कूली छात्र-छात्राएं तिरंगे की चूनर मां नर्मदा को अर्पित कर रहे थे।

मां नर्मदा का यह पर्व केवल आस्था का प्रतीक नहीं है, बल्कि प्रकृति और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का संदेश भी देता है। उनके जल से प्रदेश के लोगों की प्यास बुझती है और भूमि उर्वरा होती है। इसलिए उनकी निर्मलता और पवित्रता बनाए रखना हर भक्त के लिए अनिवार्य है। आज के दिन भक्त केवल पूजा नहीं करते, बल्कि यह संकल्प भी लेते हैं कि वे मां नर्मदा के जल और घाटों को साफ और स्वच्छ रखेंगे।

इस अवसर पर सैकड़ों किलोमीटर दूर से भी श्रद्धालु पैदल चलकर घाटों पर पहुंचे। सिवनी जिले की लखनादौन तहसील के आदेगांव से आए गोलू कुशवाहा ने बताया कि वह 2017 से हर साल पैदल नर्मदा जयंती में भाग ले रहे हैं। उनका कहना है कि मां नर्मदा की कृपा इतनी बड़ी है कि मांगने से पहले ही मां अपने भक्तों के भंडार भर देती हैं। इस वर्ष घाटों पर इतनी बड़ी भीड़ थी कि गांवों के रास्ते खाली हो गए।

गोलू ने आशीर्वाद की कामना करते हुए कहा कि मां नर्मदा की कृपा हमेशा सबके ऊपर बनी रहे और वे भविष्य में भी इसी भक्ति के साथ आते रहेंगे।

कार्यक्रम में स्वच्छता का संदेश भी दिया गया। स्वच्छता अभियान की मेंटर शिवानी विश्वकर्मा ने बताया कि घाटों पर आने वाले लोग अक्सर पाउच, पानी की बोतल या पॉलिथीन छोड़ जाते हैं। जन-जागरूकता अभियान चला कर लोगों को बताया जा रहा है कि श्रद्धा के साथ स्वच्छता भी आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि अगर हम मां के जल और घाटों में कचरा डालते हैं, तो यह आस्था और श्रद्धा के विपरीत है। श्रद्धा अच्छी है, लेकिन स्वच्छता उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है।

स्वच्छता अभियान के अन्य मेंटर, भगवान उपाध्याय ने कहा, "त्वदीय पाद पंकजम, नमामि देवी नर्मदा।" उनका कहना था कि नर्मदा जयंती पर नारियल फोड़ना या स्नान करना केवल दिखावे का पुण्य नहीं है। असली पुण्य तब मिलता है, जब हम मां के आंचल को पवित्र बनाए रखें और वहां गंदगी न फैलाएं।

उन्होंने लोगों से कहा कि हर व्यक्ति आज संकल्प ले कि घाट पर आने के बाद भी कचरा अपने साथ ले जाएगा और कोई भी पॉलीथिन या गंदगी न छोड़ेगा। ऐसा करने से न केवल घाट और नदी का वातावरण स्वच्छ रहेगा, बल्कि हमारी आस्था भी और मजबूत होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह समाज में स्वच्छता और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी को भी उजागर करते हैं। नर्मदा जयंती पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ यह दर्शाती है कि लोग अपनी संस्कृति और परंपराओं के प्रति कितने समर्पित हैं।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नर्मदा जयंती पर लोग क्या करते हैं?
नर्मदा जयंती पर लोग पूजा करते हैं, पदयात्राएं निकालते हैं और मां नर्मदा के जल और घाटों की स्वच्छता का संकल्प लेते हैं।
क्यों नर्मदा नदी को जीवन रेखा कहा जाता है?
नर्मदा नदी मध्य प्रदेश की प्रमुख नदी है, जो कृषि और जल आपूर्ति का मुख्य स्रोत है।
इस वर्ष नर्मदा जयंती पर कितनी भीड़ थी?
इस वर्ष नर्मदा जयंती पर घाटों पर भारी भीड़ देखने को मिली, जिससे गांवों के रास्ते खाली हो गए।
राष्ट्र प्रेस
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