नासिक का 'कॉर्पोरेट जिहाद': शिवसेना (यूबीटी) ने उठाए गंभीर सवाल
सारांश
Key Takeaways
- शिवसेना (यूबीटी) ने नासिक में उठे 'कॉर्पोरेट जिहाद' के आरोपों पर सवाल उठाए हैं।
- नासिक की घटना में हिंदू महिलाओं के साथ यौन शोषण के आरोप लगे हैं।
- भाजपा के नेता इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
- राजनीतिक रंग देने की आलोचना की गई है।
- महिलाओं के शोषण पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
मुंबई, 11 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। नासिक में 'कॉर्पोरेट जिहाद' के आरोपों के संदर्भ में शिवसेना (यूबीटी) ने कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं। पार्टी के मुखपत्र 'सामना' में कहा गया है कि महाराष्ट्र में एक नई पीढ़ी के हिंदुत्ववादियों का उदय हुआ है, जो अपने स्वार्थ के अनुसार हिंदुत्व का पालन करते हैं और चुनावी समय में उनका हिंदुत्व बहुत अधिक प्रकट होता है।
अशोक खरात मामले और नासिक की घटना की तुलना करते हुए 'सामना' के संपादकीय में कहा गया है, "यदि किसी मुस्लिम मौलवी का प्रेम प्रसंग उजागर होता है तो ये हिंदुत्ववादी खुशी से उस पर चर्चा करते हैं, लेकिन जब वही बुरा काम किसी हिंदू बाबा से जुड़ता है, तब ये चुप्पी साध लेते हैं। वर्तमान में नासिक में ऐसी ही ढोंगबाजी ने हंगामा मचाया है।"
वास्तव में, नासिक की एक बहुराष्ट्रीय आईटी कंपनी के मुस्लिम कर्मचारियों पर हिंदू महिलाओं को नौकरी के ऑफर देकर लुभाने, उनका यौन शोषण करने और कथित रूप से धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डालने का आरोप है।
संपादकीय में कहा गया है कि भाजपा के समर्थक राजनीतिक व्यक्तियों ने, जिनमें मंत्री नितेश राणे और विधायक गोपीचंद पडलकर शामिल हैं, विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया है। कहा गया है कि यद्यपि इस तरह के शोषण के खिलाफ गुस्सा सही है, परंतु इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने का तरीका बहुत ही भड़काऊ रहा है, जिसमें नेताओं ने 'लव जिहाद' की 'खौफनाक' प्रकृति पर उत्तेजक भाषण दिए हैं।
इन राजनीतिक गुटों की कड़ी निंदा करते हुए संपादकीय में कहा गया है, "'कॉर्पोरेट जिहाद' और 'हिंदुत्व खतरे में' होने की आवाज भाजपा के राजनीतिक नेता उठा रहे हैं, और इसी बहाने हिंदू समाज को एकजुट होकर मुकाबला करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। लेकिन वही नासिक की भूमि पर खरात और एरंडे ने महिलाओं का शोषण किया है, और इन नेताओं की आवाज़ इस पर चुप है।"
अशोक खरात के मामले का जिक्र करते हुए शिवसेना (यूबीटी) के मुखपत्र में कहा गया है, "जब इन मामलों में आरोपी मुस्लिम होता है, तब 'जिहाद' के नाम पर आंदोलन होते हैं, लेकिन जब आरोपी हिंदू बाबा होते हैं, तब इसे 'व्यक्तिगत मामला' और 'हिंदू समाज को बदनाम न करें' कहकर टाल दिया जाता है।"
'सामना' के संपादकीय में आगे लिखा है, "नासिक की गोदावरी में आज ढोंगी हिंदुत्ववादियों के पापकर्म स्पष्ट रूप से देखे जा रहे हैं। महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों का विरोध कम से कम धार्मिकता से परे होना चाहिए।"