11 अक्टूबर 2026
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नवरात्रि के पहले दिन सूरत के 400 साल पुराने अंबाजी मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब, शिवाजी-गांधी का भी है जुड़ाव

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नवरात्रि के पहले दिन सूरत के 400 साल पुराने अंबाजी मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब, शिवाजी-गांधी का भी है जुड़ाव

सारांश

सूरत के 400 साल पुराने अंबाजी मंदिर में नवरात्रि के पहले ही दिन हजारों श्रद्धालु उमड़ पड़े। मुख्य पुजारी जितेंद्र भारती गोस्वामी के अनुसार इस मंदिर में छत्रपति शिवाजी महाराज और महात्मा गांधी भी दर्शन के लिए आ चुके हैं — जो इसे गुजरात के सबसे ऐतिहासिक शक्तिपीठों में से एक बनाता है।

मुख्य बातें

11 अक्टूबर 2026 को शारदीय नवरात्रि के प्रथम दिन सूरत के गोपीपुरा स्थित अंबाजी मंदिर में हजारों श्रद्धालु उमड़े।
मंदिर लगभग 400 वर्ष पुराना है और मुख्य पुजारी जितेंद्र भारती गोस्वामी पिछले 60 साल से यहाँ सेवा कर रहे हैं।
मान्यता के अनुसार छत्रपति शिवाजी महाराज और महात्मा गांधी दोनों इस मंदिर में दर्शन के लिए आ चुके हैं।
सुबह 4 बजे से प्रातःकालीन मंगला आरती शुरू हुई, 'जय माता दी' के जयकारों से गोपीपुरा का पूरा इलाका गूंजा।
मंदिर समिति और स्थानीय प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्था की।

शारदीय नवरात्रि के प्रथम दिन, 11 अक्टूबर 2026 को सूरत के गोपीपुरा इलाके में स्थित अंबाजी मंदिर में हजारों श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए उमड़ पड़े। लगभग 400 वर्ष पुराने इस ऐतिहासिक मंदिर में सुबह 4 बजे से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। प्रातःकालीन मंगला आरती में हजारों भक्तों ने भाग लिया और माता रानी का आशीर्वाद प्राप्त किया।

मंदिर का ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व

मंदिर के मुख्य पुजारी जितेंद्र भारती गोस्वामी के अनुसार, इस पावन स्थल का इतिहास मुगल काल से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज भी इस मंदिर में मां अंबा के दर्शन के लिए आए थे। इसके अलावा, महात्मा गांधी ने भी इस मंदिर में दर्शन किए थे — ये तथ्य इस स्थान के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक गौरव को कई गुना बढ़ा देते हैं।

पुजारी गोस्वामी ने कहा, 'मैं पिछले 60 साल से अंबाजी मंदिर में सेवा कार्य में हूँ। यह मंदिर लगभग 400 साल पुराना है। यहाँ शिवाजी महाराज भी आए थे, वे यहाँ दर्शन करके जाते थे। महात्मा गांधी ने भी इस मंदिर में दर्शन किए थे।'

भक्तों की आस्था और अनुभव

गोपीपुरा का पूरा इलाका सुबह से ही 'जय माता दी' के जयकारों से गूंज उठा। भक्तों ने बताया कि इस मंदिर में आने पर उन्हें एक अलग ही मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा की अनुभूति होती है। श्रद्धालु कपिल मुकातिवाला ने बताया, 'मैं पिछले एक साल से अंबाजी मंदिर में आ रहा हूँ। नवरात्र के उपवास भी रखता हूँ और पिछले 7-8 साल से माता रानी की उपासना कर रहा हूँ। आरती में शामिल होकर हमें बहुत शांति मिलती है।'

दर्शन के लिए पहुंचीं उन्नति जरीवाला ने कहा कि अंबाजी मंदिर में माताजी के दर्शन करते ही आंखों में आंसू आ जाते हैं, क्योंकि यहाँ का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय है। वहीं, वृंदा पटेल ने बताया कि वे पिछले 11 साल से नवरात्र का व्रत कर रही हैं और इस मंदिर के साथ उनका रिश्ता बेहद पुराना है।

सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था

भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर समिति और स्थानीय प्रशासन ने विशेष सुरक्षा और व्यवस्था के प्रबंध किए। दर्शन के क्रम को सुगम बनाने के लिए प्रशासन की ओर से पर्याप्त बल तैनात किया गया, ताकि सभी श्रद्धालु बिना किसी असुविधा के माता रानी के दर्शन कर सकें।

आगे के नौ दिन

नवरात्रि के शेष नौ दिनों में भी भक्तों की भारी संख्या उमड़ने की संभावना है। मंदिर प्रबंधन ने बताया कि पूरे नवरात्र उत्सव के दौरान विशेष आरती, पूजन और अनुष्ठानों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें सूरत और आसपास के जिलों से लाखों श्रद्धालुओं के पहुँचने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि मुगल काल, मराठा गौरव और स्वतंत्रता आंदोलन की स्मृतियों को एक साथ समेटे हुआ एक जीवंत इतिहास है। शिवाजी महाराज और महात्मा गांधी जैसी विभूतियों से जुड़ी मान्यताएँ इसे गुजरात के सामाजिक-सांस्कृतिक परिदृश्य में एक विशिष्ट स्थान देती हैं। नवरात्रि पर उमड़ने वाली यह भीड़ केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि सामूहिक सांस्कृतिक पहचान का भी उत्सव है। हालाँकि, ऐसे ऐतिहासिक मंदिरों के संरक्षण और व्यवस्थित दस्तावेज़ीकरण की ज़रूरत पर मुख्यधारा का ध्यान कम ही जाता है।
RashtraPress
11 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सूरत का अंबाजी मंदिर कितना पुराना है और कहाँ स्थित है?
सूरत का अंबाजी मंदिर लगभग 400 वर्ष पुराना है और शहर के ऐतिहासिक गोपीपुरा इलाके में स्थित है। मंदिर के मुख्य पुजारी जितेंद्र भारती गोस्वामी के अनुसार इसका इतिहास मुगल काल से जुड़ा हुआ है।
क्या छत्रपति शिवाजी महाराज इस मंदिर में आए थे?
मान्यता है कि मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज इस मंदिर में मां अंबा के दर्शन के लिए आए थे। मंदिर के पुजारी जितेंद्र भारती गोस्वामी ने यह भी बताया कि महात्मा गांधी ने भी यहाँ दर्शन किए थे।
नवरात्रि 2026 के पहले दिन सूरत के अंबाजी मंदिर में क्या हुआ?
11 अक्टूबर 2026 को शारदीय नवरात्रि के पहले दिन हजारों श्रद्धालु सुबह 4 बजे से मंदिर में दर्शन के लिए पहुँचे। प्रातःकालीन मंगला आरती में भारी संख्या में भक्तों ने भाग लिया और 'जय माता दी' के जयकारों से गोपीपुरा का पूरा क्षेत्र गूंज उठा।
नवरात्रि के दौरान मंदिर में भीड़ प्रबंधन के लिए क्या व्यवस्था की गई?
मंदिर समिति और स्थानीय प्रशासन ने भारी भीड़ को देखते हुए विशेष सुरक्षा और व्यवस्था के प्रबंध किए। इसका उद्देश्य यह था कि सभी श्रद्धालु सुगमता और सुरक्षित तरीके से मां के दर्शन कर सकें।
अंबाजी मंदिर, सूरत का क्या धार्मिक महत्व है?
यह मंदिर सूरत के सबसे पुराने और श्रद्धेय शक्तिपीठों में से एक है, जहाँ मां अंबा की पूजा-आराधना होती है। मंदिर से छत्रपति शिवाजी महाराज और महात्मा गांधी जैसी ऐतिहासिक विभूतियों का जुड़ाव इसे धार्मिक के साथ-साथ सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण बनाता है।
राष्ट्र प्रेस
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