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क्या नई श्रम संहिताएं देश के निर्यात क्षेत्र को बढ़ावा देंगी?

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क्या नई श्रम संहिताएं देश के निर्यात क्षेत्र को बढ़ावा देंगी?

सारांश

नई श्रम संहिताएं निर्यात केंद्रित उद्योगों को आवश्यक लचीलापन, सरलीकरण और पूर्वानुमेयता प्रदान करती हैं। ये सुधार श्रमिकों के कल्याण को बढ़ाते हैं और सुनिश्चित करते हैं कि महिलाओं के लिए समानता और अवसर बढ़ें। जानिए इन सुधारों का निर्यात क्षेत्र पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

मुख्य बातें

नई श्रम संहिताएं निर्यात केंद्रित उद्योगों को लचीलापन प्रदान करती हैं।
ये सुधार श्रमिकों के कल्याण को प्राथमिकता देते हैं।
महिलाओं को रात्रि शिफ्ट में काम करने की अनुमति दी गई है।
सामाजिक सुरक्षा योगदान में एकरूपता सुनिश्चित की जाएगी।
भेदभाव के खिलाफ ठोस प्रावधान हैं।

नई दिल्ली, 30 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। नई श्रम संहिताएं निर्यात केंद्रित उद्योगों को गतिशील वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धा के लिए आवश्यक लचीलापन, सरलीकरण और पूर्वानुमेयता प्रदान करती हैं। इसके साथ ही, बढ़ते अंतरराष्ट्रीय अनुपालन मानकों को भी पूरा करती हैं। यह जानकारी सरकार की ओर से रविवार को दी गई।

सरकार ने कहा कि नए सुधार श्रमिकों को उचित वेतन, सामाजिक सुरक्षा, सुरक्षा, समानता और कौशल उन्नयन के अवसरों की गारंटी देते हैं, जिससे कार्यस्थल पर उनके कल्याण और सम्मान दोनों में वृद्धि होती है।

नई श्रम संहिताओं के तहत मजदूरी की एक समान परिभाषा तय की गई है। यह प्रावधान पहले के कानूनों में विविध एवं असंगत परिभाषाओं से उत्पन्न अस्पष्टता को दूर करता है।

सरकार ने बताया कि देश में चलने वाले निर्यात केंद्रित उद्योगों के लिए यह सुधार वेतन संबंधी प्रशासन एवं अनुपालन को सरल बनाता है, जिससे सामाजिक सुरक्षा योगदान, बोनस और ग्रेच्युटी के लिए मजदूरी की गणना में एकरूपता सुनिश्चित होती है।

नई श्रम संहिताओं में सरकारों (राज्य/केन्द्र, जहां जैसा लागू हो) को कामकाज के समय की सीमा तय करने की पूरी छूट दी गई है। पहले यह सीमा एक तिमाही में 75 ओवरटाइम घंटे की थी, जिसे अब सरकारें (राज्य/केन्द्र, जहां जैसा लागू हो) तय कर सकती हैं। कामकाज के समय के मामले में यह छूट उद्योग जगत को अपनी व्यावसायिक जरूरतों, जिसमें अधिकतम ऑर्डर मिलने की अवधि भी शामिल है, के अनुरूप काम के घंटे तय करने में समर्थ बनाएगा। इससे विकास और रोजगार में भी वृद्धि होगी।

नए सुधारों के तहत नियोक्ता, कर्मचारियों द्वारा किए जाने वाले समान कार्य या समान प्रकृति के कार्य के संबंध में भर्ती, वेतन या रोजगार की शर्तों से संबंधित मामलों में लैंगिक आधार पर, जिसमें ट्रांसजेंडर भी शामिल हैं, भेदभाव नहीं करेंगे।

सरकार के अनुसार, श्रमिकों, विशेषकर वस्त्र, चमड़ा और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्रों में निर्यात श्रमबल का एक बड़ा हिस्सा बनने वाली महिलाओं, के लिए यह प्रावधान समानता की गारंटी देता है, मनोबल बढ़ाता है और औपचारिक रोजगार में महिलाओं की अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित करता है।

सरकार द्वारा महिलाओं को रात्रि शिफ्ट करने की भी इजाजत दी गई है। यह सुधार वस्त्र, परिधान, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी-आधारित सेवाओं जैसे निर्यात केंद्रित उद्योगों, जहां चौबीसों घंटे काम करना आम बात है, में कार्यरत महिला कर्मचारियों के लिए बेहद लाभदायक है।

यह महिलाओं को उच्च-भुगतान वाली रात्रि पाली के अवसरों को सुलभता से हासिल करने में सक्षम बनाएगा और वैश्विक समय क्षेत्रों और जस्ट-इन-टाइम निर्यात कार्यक्रम द्वारा संचालित उद्योगों में उनकी रोजगार क्षमता और करियर की प्रगति को बढ़ाएगा।

नए सुधार श्रमिकों को कामकाज की स्थितियों, वेतन या कल्याण संबंधी चिंताओं को बिना किसी प्रतिशोध के भय के व्यक्त करने का एक सुलभ मंच प्रदान करती है। इसके अतिरिक्त, इसमें निहित ट्रेड यूनियनों और वार्ता परिषदों को मान्यता देने के प्रावधान सामूहिक सौदेबाजी को मजबूत करते हैं और एक सहकारी औद्योगिक माहौल को बढ़ावा देते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो न केवल उनके अधिकारों की सुरक्षा करता है, बल्कि निर्यात क्षेत्र की प्रतिस्पर्धा को भी बढ़ावा देता है। यह आवश्यक है कि हम इस दिशा में आगे बढ़ें और सुनिश्चित करें कि सभी श्रमिकों को उनके अधिकार मिले।
RashtraPress
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