क्या एनडीए सांसदों ने 'जी राम जी' बिल को ऐतिहासिक बताया?

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क्या एनडीए सांसदों ने 'जी राम जी' बिल को ऐतिहासिक बताया?

सारांश

एनडीए सांसदों ने 'जी राम जी' बिल को ऐतिहासिक बताया है, उनका मानना है कि यह केवल नाम बदलने की बात नहीं है। यह एक नई योजना है जो मौजूदा योजनाओं का विस्तार करती है। जानिए इस योजना के पीछे की सोच और क्यों इसे ऐतिहासिक माना जा रहा है।

मुख्य बातें

'जी राम जी' योजना का उद्देश्य गांवों का सशक्तिकरण है।
यह नया युग और सुनहरा अमृत काल का प्रतीक है।
महात्मा गांधी के विचारों को ध्यान में रखते हुए यह योजना लाई गई है।
विपक्ष की चिंताओं का समाधान होना चाहिए।
यह योजना मौजूदा योजनाओं का विस्तार है।

नई दिल्ली, 18 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। एनडीए के नेताओं ने मनरेगा का नाम बदलकर 'जी राम जी' करने के निर्णय को ऐतिहासिक करार दिया है। उनका कहना है कि भारत में खुशी की लहर है और यह केवल नाम बदलने का मुद्दा नहीं है। यह एक नई योजना है और मौजूदा योजनाओं का विस्तार है।

जब लोकसभा में 'विकसित भारत- जी राम जी' बिल पारित हुआ, तब भाजपा सांसद कंगना रनौत ने कहा, "भारत में खुशी की लहर है। भारत वह देश है जिसने राम मंदिर का निर्माण किया, यह एक बहुत बड़ा उत्सव है। अब, 'जी राम जी' योजना को इतना बड़ा बजट मिलने के बाद, हम नई जागरूकता का संचार करना चाहते हैं। रामराज का सपना जो सबने देखा था, अब सच हो रहा है और इससे बड़ी खुशी की बात और क्या हो सकती है?"

उन्होंने कहा कि यह एक नया युग है, सुनहरा अमृत काल है और हम इसे परिभाषित करेंगे। सभी सरकारें और राजाओं ने पहले भी चीजों का नाम अपनी मर्जी के अनुसार रखा है। जब भगवान राम का समय है, तो चीजों का नाम उनके नाम पर रखा जाएगा। इसमें विपक्ष को क्या परेशानी हो रही है, यह समझ से परे है।

केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा, "'जी राम जी' योजना देश के गांवों को मजबूत करने, गरीबों को सशक्त बनाने और गांवों-शहरों के बीच की खाई को कम करने के विजन के साथ शुरू की गई है। महात्मा गांधी ने कहा था कि भारत की आत्मा गांवों में बसी है और यह योजना उसी सोच के साथ उनके सशक्तीकरण के लिए लाई गई है।"

उन्होंने कहा कि यह केवल नाम बदलने का मामला नहीं है, यह एक नई योजना है और मौजूदा योजनाओं का विस्तार है। क्या नरेगा का नाम बदलकर मनरेगा नहीं किया गया था? समय-समय पर, योजनाओं का विस्तार किया जाता है और उन्हें आगे बढ़ाया जाता है, जिससे नई सोच और कभी-कभी नए नाम भी आते हैं। ऐसे में, महात्मा गांधी के विचारों को कोई कैसे नकार सकता है?

विपक्ष पर निशाना साधते हुए चिराग पासवान ने कहा कि अब आप किसी भी चीज का विरोध कर सकते हैं, यह आपका अधिकार है। अगर किसी को कोई परेशानी है तो वह अपनी समस्या व्यक्त कर सकता है। लेकिन अगर आप मर्यादा को ध्वस्त करके अपनी सोच को बढ़ाना चाहें, तो यह सही नहीं है। आज संसद भवन में विपक्ष का व्यवहार ठीक नहीं था।

भाजपा सांसद रवि किशन ने कहा, "महात्मा गांधी हमेशा भगवान राम का नाम लेते थे। अब, जब भी 'जी राम जी' बोला जाएगा, तो सबके मन में महात्मा गांधी की दिव्य छवि आएगी। इससे बड़ा दिन कोई नहीं हो सकता। यह प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा सरकार का विजन है। वास्तव में, भगवान राम का नाम लेने से भी विपक्ष को बेचैनी होती है। उन्हें दर्द हो रहा है क्योंकि जी राम जी बिल पास हो गया है।"

संपादकीय दृष्टिकोण

यह कहा जा सकता है कि 'जी राम जी' योजना का उद्देश्य ग्रामीण विकास और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना है। हालांकि, विपक्ष की चिंताओं को भी ध्यान में रखना आवश्यक है। यह योजना किस तरह से लागू होती है और इसके प्रभाव क्या होंगे, यह समय बताएगा।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या 'जी राम जी' योजना सिर्फ नाम बदलने का प्रयास है?
यह योजना केवल नाम बदलने का प्रयास नहीं है, बल्कि यह मौजूदा योजनाओं का विस्तार है।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
'जी राम जी' योजना का मुख्य उद्देश्य गांवों को सशक्त करना और गरीबों के लिए अवसर पैदा करना है।
क्या विपक्ष ने इस योजना का विरोध किया है?
हां, विपक्ष ने इस योजना पर आपत्ति जताई है, लेकिन सरकार का कहना है कि यह एक सकारात्मक कदम है।
राष्ट्र प्रेस