जवाहरलाल नेहरू की काली करतूतें: देश को तबाह करने के लिए जिम्मेदार निशिकांत दुबे
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, २५ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड के गोड्डा से चौथी बार भाजपा के सांसद निशिकांत दुबे लगातार कांग्रेस पर आक्रमण कर रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस के खिलाफ एक नई शृंखला "कांग्रेस का काला अध्याय" की शुरुआत की है। इस श्रृंखला के अंतर्गत, वह सोशल मीडिया एक्स पर तिथि के अनुसार कांग्रेस सरकार के समझौतों और निर्णयों के दस्तावेज साझा करते हुए टिप्पणियाँ कर रहे हैं।
निशिकांत दुबे ने "कांग्रेस का काला अध्याय 9 एपिसोड" को एक्स पर साझा करते हुए लिखा है, "आज, यानी २५ मार्च १९१४ को, शिमला में ब्रिटिश इंडिया, चीन सरकार और तिब्बत के बीच एक समझौता हुआ था, जिसके अंतर्गत नेपाल और तिब्बती समझौता १८५६ तथा जम्मू कश्मीर तिब्बती समझौता १८४२ लागू हुआ। तिब्बत और भारत के बीच सीमा निर्धारण मैकमोहन लाइन के तहत किया गया।
हालांकि, मई १९५१ में नेहरू ने चीन के अधिपत्य के अनुसार तिब्बतियों को चीनी नागरिक बना दिया। शेष कार्य २९ अप्रैल १९५४ को तिब्बत पर चीन के पूर्ण नियंत्रण का समझौता कर लिया गया और इस समझौते के अंतर्गत चीन को भारत में बिना रुकावट आने की अनुमति दे दी गई। देश को तबाह करने की काली करतूत के लिए केवल और केवल नेहरू जी ही जिम्मेदार हैं।
इससे पहले, २४ मार्च को निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा था, "२४ मार्च १९९० को श्रीलंका से भारतीय सेना हारकर मजबूरी में वापस आई। भारतीय सेना की अंतिम टुकड़ी को विदा करने वालों में आज के हमारे विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर भी थे, जो उन दिनों श्रीलंका में कार्यरत थे। भारतीय सेना तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के जुनून के कारण १९८७ में अपने ही तमिल भाइयों के खिलाफ भेजी गई थी। गांधी परिवार का यह जुनून नया नहीं था। इसके पहले २४ मार्च १९७१ को भी इंदिरा गांधी ने भारतीय सेना को श्रीलंका के छात्र आंदोलन पर नियंत्रण के लिए भेजा था, लेकिन १९७१ के पाकिस्तान युद्ध के दौरान श्रीलंका ने पाकिस्तान का साथ दिया। हमारे हजारों जवान १९८७ से लेकर १९९० तक मारे गए। श्रीलंका के तत्कालीन राष्ट्रपति प्रेमदास ने भारतीय जवानों पर तरह-तरह के आरोप लगाए और राजीव गांधी को चिट्ठी लिखी। पहली बार विदेशी धरती पर भारतीय प्रधानमंत्री पर हमला हुआ और देश के सम्मान को ठेस पहुंची।