क्या हिंदू समाज न्यायप्रिय है, अन्याय का प्रतिकार स्वीकार्य है?: नितेश राणे

सारांश
Key Takeaways
- हिंदू समाज की एकता और धार्मिक स्वतंत्रता पर जोर
- वराह जयंती का भव्य आयोजन
- अन्याय के खिलाफ प्रतिकार की आवश्यकता
- संविधान का सम्मान और धार्मिक स्वतंत्रता
- शैक्षणिक संस्थानों में पर्व का महत्व सिखाना
मुंबई, २५ अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। महाराष्ट्र सरकार के कैबिनेट मंत्री नितेश राणे ने सोमवार को मुंबई में वराह जयंती के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण बयान दिया।
अपने भाषण में उन्होंने हिंदू समाज की एकता और धार्मिक स्वतंत्रता पर जोर देते हुए कहा कि हिंदू समाज कभी किसी के साथ अन्याय नहीं करता है, लेकिन यदि कोई उनके साथ गलत करता है, तो उसे सहन नहीं किया जाएगा।
राणे ने वराह जयंती के महत्व को उजागर करते हुए कहा कि हमने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि इस पर्व को सम्पूर्ण राज्य में आदर के साथ मनाया जाए।
उन्होंने कहा कि सभी जिलों में वराह जयंती का आयोजन भव्य रूप से किया जाए और स्कूलों और कॉलेजों में विद्यार्थियों को इस पर्व और हिंदू संस्कृति के महत्व के बारे में बताया जाए।
नितेश राणे ने आशा व्यक्त की कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस इस मांग को अवश्य पूरा करेंगे और जल्द ही शैक्षणिक संस्थानों में इस विषय पर कदम उठाए जाएंगे।
राणे ने कहा, “जब हमने वराह जयंती को मान्यता देने की बात की, तो कुछ लोगों को यह ‘हरी मिर्च’ की तरह चुभ गई। जब दूसरे धर्मों के लोग अपने त्योहार मनाते हैं, तो हम उसमें हस्तक्षेप नहीं करते। उसी तरह हमें भी अपने धर्म के पर्व मनाने का अधिकार है।”
उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र के कई जिलों में वराह जयंती बड़े उत्साह और भक्ति के साथ मनाई जा रही है। इस अवसर पर मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। यह पर्व हिंदू समाज की एकता और शक्ति का प्रतीक है।
नितेश राणे ने संविधान का हवाला देते हुए चेतावनी दी कि यदि कोई वराह जयंती के आयोजन में बाधा डालने की कोशिश करता है, तो उसे उचित जवाब दिया जाएगा। संविधान हमें धार्मिक स्वतंत्रता देता है और हम अपने पर्व मनाएंगे।