9 अक्टूबर 2026
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नोएडा एयरपोर्ट नाम बदलने पर यूपी कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा मोना का पलटवार: 'किस्मत नहीं बदलेगी'

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नोएडा एयरपोर्ट नाम बदलने पर यूपी कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा मोना का पलटवार: 'किस्मत नहीं बदलेगी'

सारांश

योगी कैबिनेट ने जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम 'नरेंद्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट' रखने का प्रस्ताव पारित किया। लेकिन यूपी कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा मोना ने सीधा सवाल दागा — ₹30,000 करोड़ के एयरपोर्ट से प्रदेश के लोगों को रोजगार कितना मिला? नाम बदलने से किस्मत नहीं बदलती।

मुख्य बातें

उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने 9 अक्टूबर 2026 को नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) का नाम बदलकर नरेंद्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट करने का प्रस्ताव पारित किया।
यह फैसला PM मोदी के सार्वजनिक सेवा में 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में लिया गया।
यूपी कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा मोना ने ₹30,000 करोड़ की लागत वाले एयरपोर्ट से राज्य को मिले रोजगार पर सरकार से जवाब माँगा।
मोना ने एयरपोर्ट के बारिश में डूबने की घटना का हवाला देते हुए निर्माण गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए।
एयरपोर्ट की प्रारंभिक वार्षिक यात्री क्षमता 1.2 करोड़ है; सभी चार चरण पूरे होने पर यह एशिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट्स में शामिल होगा।
मोना ने SIR के तहत वोटर लिस्ट से हटाए गए 13 करोड़ नामों और सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग भी दोहराई।

उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा मोना ने 9 अक्टूबर 2026 को तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम बदलने से उसकी किस्मत नहीं बदलेगी। उन्होंने सवाल उठाया कि ₹30,000 करोड़ की लागत से बने इस एयरपोर्ट से उत्तर प्रदेश के आम लोगों को आखिर क्या ठोस लाभ मिल रहा है।

नाम बदलने का फैसला और उसकी पृष्ठभूमि

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार, 9 अक्टूबर को घोषणा की कि जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम बदलकर नरेंद्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट किया जाएगा। यह प्रस्ताव राज्य कैबिनेट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक सेवा में 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में पारित किया। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि यह उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा एयरपोर्ट है और भविष्य में देश का सबसे बड़ा एविएशन हब बनने की क्षमता रखता है।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी ने इस वर्ष मार्च में एयरपोर्ट के पहले चरण का उद्घाटन किया था। इसकी प्रारंभिक वार्षिक यात्री क्षमता लगभग 1.2 करोड़ (12 मिलियन) यात्री आँकी गई है। सभी चार चरणों के पूरा होने पर यह एशिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट्स में से एक बन सकता है।

कांग्रेस की आपत्ति और सवाल

आराधना मिश्रा मोना ने नाम बदलने के फैसले को सतही करार देते हुए कहा कि पहले यह देखा गया था कि करदाताओं के हजारों करोड़ रुपए से बना एयरपोर्ट बारिश के बाद पानी में डूब गया था। उन्होंने सरकार से यह स्पष्ट करने की माँग की कि इस एयरपोर्ट से राज्य के लोगों को कितना रोजगार मिल रहा है और यदि स्थिति नहीं बदली, तो नाम बदलने का क्या औचित्य है।

उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकारें केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर कई सार्वजनिक परियोजनाओं का नामकरण प्रमुख नेताओं के नाम पर करती रही हैं — एक ऐसी प्रवृत्ति जिस पर विपक्ष लगातार सवाल उठाता आया है।

एसआईआर और चुनाव आयोग पर निशाना

मोना ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि भाजपा को उन 13 करोड़ नामों के बारे में जवाब देना चाहिए जिन्हें एसआईआर के आधार पर वोटर लिस्ट से हटाया गया है। उन्होंने यह भी माँग की कि बताया जाए कि मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार अपने पद से कब इस्तीफा देंगे, जिन पर उनके अनुसार वोट चोरी की जिम्मेदारी है।

एयरपोर्ट की संभावनाएँ और अपेक्षाएँ

जेवर एयरपोर्ट के विकास से उत्तर प्रदेश में हवाई कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। सरकार का तर्क है कि यह एयरपोर्ट न केवल राज्य की, बल्कि पूरे देश की एविएशन अर्थव्यवस्था को नई ऊँचाई देगा।

हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि बड़े बुनियादी ढाँचे के वादों और उनके ज़मीनी क्रियान्वयन के बीच का अंतर अक्सर स्थानीय रोजगार और आम जनता के लाभ के आँकड़ों में साफ़ दिखता है। यह बहस आने वाले समय में और तीखी हो सकती है, खासकर जब एयरपोर्ट के बाकी चरण पूरे होने की समयसीमा नजदीक आएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो ज्यादा धार रखता है। ₹30,000 करोड़ के बुनियादी ढाँचे में बारिश से जलभराव जैसी घटनाएँ और रोजगार के सत्यापन योग्य आँकड़ों की अनुपस्थिति — ये वो बिंदु हैं जिन पर सरकार के पास स्पष्ट जवाब अब तक नहीं आए हैं। एयरपोर्ट के नाम की राजनीति मीडिया में जगह पाएगी, लेकिन यूपी के मतदाताओं के लिए असली कसौटी यह होगी कि चार चरणों के बाद स्थानीय रोजगार और कनेक्टिविटी के वादे कितने पूरे होते हैं।
RashtraPress
9 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम क्यों बदला गया?
उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने 9 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक सेवा में 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम बदलकर 'नरेंद्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट' करने का प्रस्ताव पारित किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे राज्य को PM मोदी का उपहार बताया।
आराधना मिश्रा मोना ने एयरपोर्ट नामकरण पर क्या कहा?
यूपी कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा मोना ने कहा कि ₹30,000 करोड़ की लागत से बने एयरपोर्ट का नाम बदलने से उसकी किस्मत नहीं बदलेगी। उन्होंने सरकार से पूछा कि इस एयरपोर्ट से उत्तर प्रदेश के लोगों को कितना रोजगार मिल रहा है।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की यात्री क्षमता कितनी है?
एयरपोर्ट के पहले चरण की प्रारंभिक वार्षिक यात्री क्षमता लगभग 1.2 करोड़ (12 मिलियन) आँकी गई है। सभी चार चरण पूरे होने पर इसके एशिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट्स में से एक बनने की उम्मीद है।
मोना ने SIR और चुनाव आयोग पर क्या आरोप लगाए?
मोना ने माँग की कि भाजपा को SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) के आधार पर वोटर लिस्ट से हटाए गए 13 करोड़ नामों की सफाई देनी चाहिए। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की भी माँग की, जिन पर उन्होंने वोट चोरी का आरोप लगाया।
जेवर एयरपोर्ट का पहला चरण कब शुरू हुआ?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस वर्ष मार्च में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पहले चरण का उद्घाटन किया था। यह उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा एयरपोर्ट है और इसे भविष्य में देश का प्रमुख एविएशन हब बनाने का लक्ष्य है।
राष्ट्र प्रेस
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