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नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट: जेवर में ₹11,200 करोड़ का ग्रीनफील्ड हब, 45 शहरों के लिए 65 उड़ानें शुरू

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नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट: जेवर में ₹11,200 करोड़ का ग्रीनफील्ड हब, 45 शहरों के लिए 65 उड़ानें शुरू

सारांश

जेवर में ₹11,200 करोड़ से तैयार नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट सिर्फ एक हवाई अड्डा नहीं — यह NCR की एविएशन क्षमता का पुनर्लेखन है। 45 शहरों से जुड़ाव, RRTS, एक्सप्रेसवे नेटवर्क और भविष्य में एशिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट बनने का दावा इसे उत्तर भारत के सबसे महत्वाकांक्षी बुनियादी ढाँचा प्रयोगों में से एक बनाता है।

मुख्य बातें

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश के जेवर में ₹11,200 करोड़ की लागत से PPP मॉडल पर विकसित किया गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 मार्च को इसका उद्घाटन किया; शुरुआती चरण में 45 शहरों के लिए 65 उड़ानें संचालित होंगी।
पहले चरण में 1,334 हेक्टेयर में निर्माण पूरा; सभी चार चरणों के बाद एशिया का सबसे बड़ा और विश्व का छठा सबसे बड़ा एयरपोर्ट बनने का दावा।
विकास की जिम्मेदारी स्विट्जरलैंड की कंपनी ज्यूरिख इंटरनेशनल एयरपोर्ट एजी को सौंपी गई है।
गाजियाबाद से एयरपोर्ट तक 71.1 किमी लंबे RRTS कॉरिडोर की योजना, अनुमानित लागत ₹16,000 करोड़ , 11 स्टेशन ।
उबर, रैपिडो, ओला, मेकमायट्रिप और UPSRTC बस सेवाएँ लास्ट माइल कनेक्टिविटी के लिए तैयार।

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट — उत्तर प्रदेश के जेवर में ₹11,200 करोड़ की लागत से पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर विकसित यह ग्रीनफील्ड परियोजना भारत के सबसे बड़े एविएशन बुनियादी ढाँचा प्रयासों में शुमार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 मार्च को इसका उद्घाटन किया, जिसके बाद देश के लगभग 45 शहरों के लिए करीब 65 वाणिज्यिक उड़ानें संचालित होने की शुरुआत हुई। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) की हवाई कनेक्टिविटी को वैश्विक स्तर पर ले जाने की दिशा में यह एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।

परियोजना की पृष्ठभूमि और विकास

प्रधानमंत्री मोदी ने 25 नवंबर 2021 को इस परियोजना का शिलान्यास किया था। एयरपोर्ट के विकास और संचालन की जिम्मेदारी स्विट्जरलैंड की कंपनी ज्यूरिख इंटरनेशनल एयरपोर्ट एजी को सौंपी गई है। पहले चरण में 1,334 हेक्टेयर क्षेत्र में निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, जिस पर करीब ₹11,000 करोड़ व्यय हुए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली का इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा अपनी क्षमता की सीमा पर पहुँच रहा है और NCR को एक वैकल्पिक वृहद हवाई अड्डे की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी।

भविष्य की क्षमता और महत्वाकांक्षा

सभी चार चरणों के पूरा होने के बाद यह एयरपोर्ट एशिया का सबसे बड़ा और विश्व का छठा सबसे बड़ा एयरपोर्ट बनने का दावा रखता है। गौरतलब है कि यह दावा अभी भविष्य की योजना पर आधारित है और इसकी पुष्टि चरणबद्ध विस्तार पर निर्भर करेगी। यात्री सुविधा के लिहाज से एयरपोर्ट को विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया है — प्रवेश द्वार से बोर्डिंग गेट तक पहुँचने में 20 मिनट से भी कम समय लगेगा, और सुरक्षा जाँच के बाद केवल 60 मीटर का कॉरिडोर पार कर यात्री गेट तक पहुँच सकेंगे।

मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी का जाल

एयरपोर्ट की सामरिक स्थिति इसे सड़क, रेल और मेट्रो नेटवर्क से जोड़ती है। यह यमुना एक्सप्रेसवे के निकट है, जो ग्रेटर नोएडा से आगरा को जोड़ता है। इसे ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से भी जोड़ा जा रहा है। प्रस्तावित दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का एक स्टेशन भी एयरपोर्ट के समीप प्रस्तावित है।

इसके अतिरिक्त, गाजियाबाद से एयरपोर्ट तक 71.1 किलोमीटर लंबे RRTS कॉरिडोर के निर्माण की योजना है, जिसमें 11 स्टेशन होंगे और अनुमानित लागत ₹16,000 करोड़ बताई गई है।

लास्ट माइल कनेक्टिविटी और परिवहन सेवाएँ

उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) ने एयरपोर्ट तक बस सेवाएँ शुरू कर दी हैं। महिंद्रा लॉजिस्टिक्स कैब सेवाओं के लिए ड्राइवर प्रशिक्षण, वाहन ट्रैकिंग और डिजिटल भुगतान व्यवस्था विकसित कर रही है। उबर, रैपिडो और मेकमायट्रिप जैसी ऐप-आधारित सेवाएँ भी संचालन के लिए तैयार हैं, जबकि ओला को भी लाइसेंस प्रदान किया जा चुका है। स्व-चालित और चालक-सहित कार रेंटल सेवाओं के लिए भी कई कंपनियों को लाइसेंस जारी किए गए हैं।

आर्थिक और क्षेत्रीय प्रभाव

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट न केवल उत्तर प्रदेश, बल्कि समूचे NCR और देश के लिए आर्थिक विकास, पर्यटन और निवेश को नई गति देने वाला साबित हो सकता है। जेवर और आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों के बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। आने वाले वर्षों में यह एयरपोर्ट NCR को एक वैश्विक एविएशन हब के रूप में स्थापित करने में केंद्रीय भूमिका निभाएगा — बशर्ते चरणबद्ध विस्तार और कनेक्टिविटी परियोजनाएँ समयसीमा में पूरी हों।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की गति होगी। RRTS कॉरिडोर और हाई-स्पीड रेल स्टेशन अभी 'प्रस्तावित' हैं — और भारत में बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं का इतिहास बताता है कि घोषणा और धरातल के बीच की खाई अक्सर चौड़ी होती है। ₹16,000 करोड़ का RRTS और एक्सप्रेसवे नेटवर्क यदि समय पर नहीं आए, तो शुरुआती उड़ानों का बोझ सड़क यातायात पर पड़ेगा। एशिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट का दावा चार चरणों की परिकल्पना पर टिका है — निवेश और यात्री माँग दोनों को उस गति से बढ़ना होगा जो अभी सिद्ध नहीं हुई।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट कहाँ स्थित है और इसका उद्घाटन कब हुआ?
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश के जेवर (ग्रेटर नोएडा के निकट) में स्थित है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 मार्च को इसका उद्घाटन किया, जबकि परियोजना का शिलान्यास 25 नवंबर 2021 को हुआ था।
जेवर एयरपोर्ट की लागत कितनी है और इसे किसने बनाया?
पहले चरण में इस एयरपोर्ट पर लगभग ₹11,200 करोड़ खर्च हुए हैं। इसे PPP मॉडल पर विकसित किया गया है और विकास एवं संचालन की जिम्मेदारी स्विट्जरलैंड की कंपनी ज्यूरिख इंटरनेशनल एयरपोर्ट एजी को सौंपी गई है।
नोएडा एयरपोर्ट से शुरुआत में कितने शहरों के लिए उड़ानें होंगी?
शुरुआती चरण में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से देश के लगभग 45 शहरों के लिए करीब 65 वाणिज्यिक उड़ानें संचालित की जाएंगी। आगे चरणबद्ध विस्तार के साथ यह संख्या बढ़ने की संभावना है।
जेवर एयरपोर्ट तक पहुँचने के लिए कौन-सी परिवहन सुविधाएँ उपलब्ध हैं?
एयरपोर्ट यमुना एक्सप्रेसवे, ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जुड़ा है। UPSRTC बस सेवाएँ शुरू हो चुकी हैं और उबर, ओला, रैपिडो, मेकमायट्रिप जैसी ऐप-आधारित सेवाएँ भी उपलब्ध हैं। गाजियाबाद से 71.1 किमी लंबे RRTS कॉरिडोर की भी योजना है।
क्या नोएडा एयरपोर्ट वाकई एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट बनेगा?
सभी चार चरणों के पूरा होने के बाद यह एयरपोर्ट एशिया का सबसे बड़ा और विश्व का छठा सबसे बड़ा एयरपोर्ट बनने का दावा रखता है। हालाँकि यह दावा भविष्य के चरणबद्ध विस्तार पर निर्भर है और अभी केवल पहले चरण का निर्माण पूरा हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
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