जेवर में बन रहा देश का सबसे बड़ा एयरपोर्ट: भारतीय संस्कृति और आधुनिक तकनीक का अद्भुत मेल

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जेवर में बन रहा देश का सबसे बड़ा एयरपोर्ट: भारतीय संस्कृति और आधुनिक तकनीक का अद्भुत मेल

सारांश

उत्तर प्रदेश के जेवर में बन रहा नोएडा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट देश का सबसे बड़ा एयरपोर्ट बनने जा रहा है। इसकी डिज़ाइन में भारतीय संस्कृति की झलक मिलेगी, जो इसे अद्वितीय बनाती है।

मुख्य बातें

जेवर का एयरपोर्ट भारत का सबसे बड़ा एयरपोर्ट होगा।
इसका डिज़ाइन भारतीय संस्कृति को दर्शाएगा।
यात्री क्षमता ७० मिलियन प्रति वर्ष होगी।
यह एयरपोर्ट देश की अर्थव्यवस्था को गति देगा।
आधुनिक तकनीकी सुविधाएं यात्रियों को बेहतर अनुभव देंगी।

ग्रेटर नोएडा, २५ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश के जेवर में बन रहा नोएडा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट देश के सबसे बड़े और महत्वाकांक्षी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से एक के रूप में उभर रहा है। यह एयरपोर्ट न केवल क्षेत्रफल के हिसाब से देश का सबसे बड़ा होगा, बल्कि इसमें आधुनिक तकनीक और भारतीय संस्कृति का अनूठा संगम भी देखने को मिलेगा।

इस एयरपोर्ट का कंसेशन उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ४० वर्षों के लिए दिया गया है, जिसकी शुरुआत १ अक्टूबर २०२१ से हो चुकी है। परियोजना का निर्माण चार चरणों में किया जा रहा है। पहले चरण में १३३४ हेक्टेयर भूमि पर एक रनवे और एक टर्मिनल तैयार किया गया है, जिसकी सालाना यात्री क्षमता १२ मिलियन होगी।

टर्मिनल, एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) और रनवे का काम पूरा हो चुका है। इस एयरपोर्ट की सबसे खास बात इसकी डिज़ाइनिंग है, जिसमें भारतीय संस्कृति को प्राथमिकता दी गई है। खासकर उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को ध्यान में रखते हुए मुख्य प्रवेश द्वार को वाराणसी और हरिद्वार के घाटों से प्रेरित होकर तैयार किया गया है। इससे यात्रियों को पारंपरिक और आध्यात्मिक भारत की झलक मिलेगी।

यह एयरपोर्ट देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाला साबित होगा। पीएम नरेंद्र मोदी के ५ ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य और सीएम योगी आदित्यनाथ के १ ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के विजन को साकार करने में यह परियोजना महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। एयरपोर्ट पर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों तरह की उड़ानें संचालित होंगी। साथ ही यहां एक बड़ा मल्टीमॉडल कार्गो टर्मिनल भी विकसित किया जा रहा है, जो आयात-निर्यात गतिविधियों को बढ़ावा देगा और औद्योगिक विकास को नई दिशा देगा।

परियोजना की पैरेंट कंपनी ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी है, जो इसे विश्वस्तरीय सुविधाओं के साथ विकसित कर रही है। भविष्य में यहां दो टर्मिनल कॉम्प्लेक्स बनाए जाएंगे, जिनमें टर्मिनल-१ की क्षमता ३० मिलियन और टर्मिनल-२ की क्षमता ४० मिलियन यात्रियों की होगी।

चौथे चरण के पूरा होने पर एयरपोर्ट की कुल यात्री क्षमता ७० मिलियन प्रति वर्ष तक पहुंच जाएगी। तकनीक के मामले में भी यह एयरपोर्ट पूरी तरह डिजिटल होगा। इसमें इनडोर नेविगेशन, स्मार्टफोन आधारित चेक-इन, बैगेज ड्रॉप और डिजिटल सुरक्षा जांच जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिससे यात्रियों को सहज और तेज अनुभव मिलेगा।

जेवर का यह नोएडा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश के लिए आर्थिक, सांस्कृतिक और तकनीकी दृष्टि से एक बड़ी उपलब्धि साबित होने जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर को भी प्रदर्शित करेगा।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नोएडा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट कब बन रहा है?
यह एयरपोर्ट १ अक्टूबर २०२१ से निर्माणाधीन है और इसके चार चरणों में पूरा होने की योजना है।
इस एयरपोर्ट की यात्री क्षमता क्या होगी?
चौथे चरण के पूरा होने पर, इसकी कुल यात्री क्षमता ७० मिलियन प्रति वर्ष तक पहुंच जाएगी।
यह एयरपोर्ट भारतीय संस्कृति को कैसे दर्शाएगा?
इसके डिज़ाइन में भारतीय संस्कृति को प्राथमिकता दी गई है, खासकर उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को ध्यान में रखते हुए।
इस एयरपोर्ट का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस एयरपोर्ट का उद्देश्य देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देना और यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं प्रदान करना है।
कौन सी कंपनी इस एयरपोर्ट का निर्माण कर रही है?
यह परियोजना ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी द्वारा विकसित की जा रही है।
राष्ट्र प्रेस