सीबीआई ने ड्रग तस्करी के भगोड़े प्रभदीप सिंह को अजरबैजान से भारत वापस लाने में हासिल की सफलता
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 13 मई 2026 को अजरबैजान से वांछित भगोड़े प्रभदीप सिंह को भारत सुपुर्द कराने में सफलता हासिल की। यह कार्रवाई विदेश मंत्रालय, गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस के संयुक्त समन्वय से संभव हो सकी। प्रभदीप सिंह मादक पदार्थों की तस्करी के एक बड़े गिरोह का कथित मुख्य साजिशकर्ता और प्रमुख आयोजक बताया जाता है।
मामले की पृष्ठभूमि
प्रभदीप सिंह नई दिल्ली के स्पेशल सेल पुलिस स्टेशन में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेस (एनडीपीएस) एक्ट, 1985 के विभिन्न प्रावधानों के तहत दर्ज एक मामले में वांछित था। अधिकारियों के अनुसार, इस मामले में भारी मात्रा में मादक पदार्थ बरामद किए गए हैं और जांच के दौरान कई सह-आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।
अंतरराष्ट्रीय समन्वय और गिरफ्तारी
निरंतर अंतरराष्ट्रीय समन्वय और खुफिया जानकारी साझा करने के बाद, अजरबैजान के अधिकारियों ने भगोड़े का भौगोलिक स्थान पता लगाया और उसे गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद भारतीय अधिकारियों ने राजनयिक और कानूनी माध्यमों से औपचारिक प्रत्यर्पण कार्यवाही शुरू की। अजरबैजान में सभी कानूनी औपचारिकताएँ पूरी होने के बाद प्रत्यर्पण अनुरोध स्वीकार कर लिया गया, जिससे उसके भारत लौटने का मार्ग प्रशस्त हुआ।
वापसी की प्रक्रिया
दिल्ली पुलिस की तीन सदस्यीय एस्कॉर्ट टीम आरोपी को हिरासत में लेने के लिए अजरबैजान की राजधानी बाकू गई थी। यह टीम प्रभदीप सिंह के साथ बुधवार सुबह नई दिल्ली पहुँची। गौरतलब है कि यह प्रत्यर्पण इंटरपोल चैनलों और भारतपोल प्लेटफॉर्म के माध्यम से समन्वित प्रयासों का परिणाम है।
व्यापक प्रत्यर्पण अभियान
सीबीआई ने कहा कि वह इंटरपोल चैनलों और भारतपोल प्लेटफॉर्म के माध्यम से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर काम करना जारी रखे हुए है। अधिकारियों ने बताया कि विदेश मंत्रालय, गृह मंत्रालय, सीबीआई और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों के समन्वित प्रयासों के कारण हाल के वर्षों में 160 से अधिक वांछित अपराधियों और भगोड़ों को सफलतापूर्वक भारत वापस लाया जा चुका है।
आगे क्या होगा
प्रभदीप सिंह को अब भारतीय न्यायिक प्रक्रिया के तहत पेश किया जाएगा, जहाँ एनडीपीएस एक्ट के प्रावधानों के अंतर्गत उस पर मुकदमा चलाया जाएगा। यह मामला उन मादक पदार्थ तस्करी नेटवर्कों पर भारत की बढ़ती कानूनी पकड़ का संकेत देता है जो देश से बाहर बैठकर संचालन करते हैं।