जेवर एयरपोर्ट नामकरण पर कांग्रेस का हमला: आराधना मिश्रा बोलीं, बंद उड़ानों का जवाब दे UP सरकार
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष आराधना मिश्रा 'मोना' ने 10 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि जेवर एयरपोर्ट का नाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर रखने की घोषणा उस समय की जा रही है, जब प्रदेश के कई हवाई अड्डों पर नियमित उड़ान सेवाएँ ठप पड़ी हैं। मिश्रा ने माँग की कि सरकार सार्वजनिक धन के उपयोग का हिसाब दे।
नामकरण की राजनीति पर सवाल
मिश्रा ने कहा कि दिसंबर 2020 में जेवर स्थित हवाई अड्डे का नाम 'नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट' तय किया गया था। अब उसे प्रधानमंत्री के नाम पर रखने की घोषणा की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि विकास कार्यों के वास्तविक परिणामों पर उठ रहे सवालों से ध्यान हटाने के लिए नामकरण की राजनीति की जा रही है। उनके शब्दों में, 'लोग काम करके नाम कमाते हैं, लेकिन BJP सरकार नाम बदलकर काम चलाने में विश्वास रखती है।'
किसानों की ज़मीन और सार्वजनिक धन
कांग्रेस अध्यक्ष ने बताया कि जेवर एयरपोर्ट परियोजना के पहले और दूसरे चरण में कथित तौर पर लगभग 2,699 हेक्टेयर ज़मीन अधिग्रहित किए जाने का दावा है, जिससे 15,000 से अधिक किसान प्रभावित हुए हैं। तीसरे चरण सहित परियोजना के लिए प्रस्तावित कुल भूमि लगभग 6,200 हेक्टेयर बताई गई है। उन्होंने कहा कि इतने बड़े पैमाने पर सार्वजनिक संसाधन और किसानों की ज़मीन लगाने के बाद सरकार की ज़िम्मेदारी है कि वह परियोजना का वास्तविक लाभ जनता तक पहुँचाए।
बंद उड़ानों का ब्यौरा
मिश्रा ने दावा किया कि जून-जुलाई 2026 के दौरान नोएडा से नवी मुंबई और बेंगलुरु के लिए अकासा एयर की उड़ानें बंद हुईं। नोएडा-चंडीगढ़ मार्ग पर इंडिगो की उड़ान बंद होने और एयर इंडिया एक्सप्रेस की ओर से उड़ान शुरू करने की योजना टाले जाने की बात भी सामने आई है। इसके अलावा उन्होंने कमज़ोर सड़क और रेल संपर्क, महँगी टैक्सी सेवाओं, सीधी मेट्रो की कमी तथा एयरपोर्ट शुल्क जैसी समस्याओं का उल्लेख किया।
छोटे शहरों के हवाई अड्डों की स्थिति
कांग्रेस अध्यक्ष ने कुशीनगर, आजमगढ़, अलीगढ़, चित्रकूट, श्रावस्ती, मुरादाबाद और सरसावा (सहारनपुर) के हवाई अड्डों की परिचालन स्थिति पर सवाल उठाए। उनके अनुसार, कुशीनगर में नवंबर 2023 से, आजमगढ़ में नवंबर 2024 से और चित्रकूट में दिसंबर 2024 से उड़ानें बंद होने की जानकारी सामने आई है। मुरादाबाद में भी सेवाएँ शुरू होने के कुछ समय बाद बंद होने की बात कही गई है। गौरतलब है कि इन हवाई अड्डों पर कथित तौर पर ₹1,500 से ₹2,000 करोड़ तक खर्च किए जाने का दावा किया जा रहा है।
सरकार से जवाबदेही की माँग
मिश्रा ने कहा कि सार्वजनिक धन से तैयार बुनियादी ढाँचे का उपयोग सुनिश्चित करना सरकार की ज़िम्मेदारी है — 'केवल उद्घाटन कर देना विकास नहीं है।' उन्होंने माँग की कि सरकार इन परियोजनाओं पर हुए खर्च और उनके वास्तविक उपयोग की जानकारी सार्वजनिक रूप से साझा करे। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश सरकार हवाई संपर्क को अपनी विकास उपलब्धियों में प्रमुखता से गिनाती रही है। आने वाले समय में यह मुद्दा विधानसभा सत्र में भी गूँजने की संभावना है।