नोएडा में हर्षित भट्ट की मौत: निर्माण स्थल पर सुरक्षा की लापरवाही पर सवाल
सारांश
Key Takeaways
- हर्षित भट्ट की मौत ने निर्माण स्थलों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
- घटना के समय तीन अन्य छात्र भी मौके पर मौजूद थे।
- अधूरे निर्माण स्थल में गहरा गड्ढा सुरक्षा की कमी को दर्शाता है।
- पुलिस ने पूरे मामले की गहन जांच शुरू की है।
- निर्माण कार्य के लिए सख्त नियमों की आवश्यकता है।
नोएडा, 9 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। नोएडा में एक दुखद घटना ने निर्माण स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। 21 वर्षीय छात्र हर्षित भट्ट की मौत एक अधूरे निर्माण स्थल के गहरे गड्ढे में डूबने से हुई। इस मामले में बीती रात डॉक्टरों के पैनल की मौजूदगी में पोस्टमार्टम किया गया, जिसकी वीडियोग्राफी भी की गई है, ताकि जांच में पारदर्शिता बनी रहे।
सूत्रों के अनुसार, घटना के समय हर्षित अपने तीन साथियों के साथ मौके पर था। पुलिस ने तीनों छात्रों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि घटना की हर पहलू से जांच की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि हादसा किन परिस्थितियों में हुआ।
जानकारी के अनुसार, यह निर्माण स्थल एक प्रस्तावित हैबिटेट सेंटर का था, जिसकी जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम (यूपीआरएनएन) को सौंपी गई थी। इस परियोजना की लागत लगभग 395.26 करोड़ रुपए बताई गई थी और इसे 5 मई 2021 तक पूरा किया जाना था, जबकि संपत्ति हस्तांतरण की तिथि 30 अक्टूबर 2023 तय की गई थी।
हालांकि, मामला कोर्ट में पहुंचने के बाद निर्माण कार्य रोक दिया गया और साइट को अधूरा छोड़ दिया गया। निर्माण रुकने के बाद यहां करीब 25 से 30 फीट गहरा गड्ढा खुला रह गया, जिसमें बारिश का पानी भरकर दलदल जैसी स्थिति बन गई।
बताया जा रहा है कि साइट के चारों ओर कुछ हिस्सों में शेड लगाए गए थे, लेकिन जिस दिशा से छात्र अंदर गए, वहां सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। इसी लापरवाही के कारण छात्र उस खतरनाक गड्ढे तक पहुंच गए। स्थानीय लोगों और परिजनों का आरोप है कि इतने बड़े और खतरनाक गड्ढे को बिना सुरक्षा के छोड़ना गंभीर लापरवाही है।
वर्तमान में जमीन की देखरेख की जिम्मेदारी यूपीआरएनएन के पास है, ऐसे में सुरक्षा इंतजामों की कमी पर सवाल उठना स्वाभाविक है। फिलहाल, पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। यह घटना एक बार फिर अधूरे निर्माण स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सख्त नियमों की आवश्यकता को उजागर करती है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।