क्या नोएडा में कंस्ट्रक्शन साइट पर इंजीनियर की मौत के मामले में दो बिल्डर कंपनियों पर एफआईआर हुई?
सारांश
Key Takeaways
- सुरक्षा मानकों का पालन करना आवश्यक है।
- बिल्डर कंपनियों की जिम्मेदारी सुनिश्चित होनी चाहिए।
- नोएडा प्राधिकरण की भूमिका पर प्रश्न चिन्ह।
- जांच एजेंसियों द्वारा कार्रवाई आवश्यक।
- सुरक्षा के लिए कड़े नियम बनाना जरूरी।
नोएडा, 19 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। नोएडा के सेक्टर-150 में एक इंजीनियर की मृत्यु ने नोएडा प्राधिकरण और नामित बिल्डर कंपनियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न उठाए हैं। इस प्रकरण में दो बिल्डर कंपनियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
सूत्रों के अनुसार, इन पर नोएडा प्राधिकरण का लगभग 3000 करोड़ रुपए का बकाया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इतना बड़ा बकाया होने के बावजूद प्राधिकरण न तो अपनी राशि वसूल कर पाया और न ही निर्माण स्थल पर न्यूनतम सुरक्षा उपाय सुनिश्चित कर सका।
सेक्टर-150 में जिस स्थान पर यह घटना हुई, वहां सुरक्षा मानकों की खुली अनदेखी की जा रही थी। वहां न तो सेफ्टी बेरिकेट्स थे और न ही चेतावनी संकेतक। इसी लापरवाही के कारण एक इंजीनियर की जान चली गई। घटना के बाद प्राधिकरण और बिल्डर की मिलीभगत पर सवाल उठने लगे हैं।
7 जुलाई 2014 को लोटस ग्रीन बिल्डर को स्पोर्ट्स सिटी परियोजना के लिए इस भूमि का आवंटन किया गया था। नियमों के अनुसार, इस भूमि का उपयोग खेल और उससे संबंधित बुनियादी ढांचे के विकास के लिए किया जाना था, लेकिन आरोप है कि बिल्डर कंपनी ने नियमों को नजरअंदाज करते हुए इस भूमि को विभिन्न व्यक्तियों और संस्थाओं को बेच दिया। इससे न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान हुआ, बल्कि परियोजना का मूल उद्देश्य भी समाप्त हो गया।
इस पूरी स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी जांच कर रहे हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि स्पोर्ट्स सिटी के नाम पर आवंटित भूमि की बिक्री कैसे हुई और इसमें किन-किन अधिकारियों और बिल्डर कंपनियों की भूमिका रही।
सबसे बड़ा प्रश्न नोएडा प्राधिकरण की भूमिका पर उठ रहा है। जिस प्राधिकरण से अपने हजारों करोड़ रुपए का बकाया तक नहीं वसूला गया, वही प्राधिकरण स्थल पर कार्यरत लोगों की सुरक्षा के लिए आवश्यक उपकरण और व्यवस्था भी नहीं करा सका। लोगों का कहना है कि यदि समय पर बकाया वसूली और सख्त निगरानी की गई होती, तो शायद यह हादसा टल सकता था।