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क्या ओडिशा में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की समीक्षा बैठक ने आदिवासी कल्याण योजनाओं को नए आयाम दिए?

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क्या ओडिशा में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की समीक्षा बैठक ने आदिवासी कल्याण योजनाओं को नए आयाम दिए?

सारांश

ओडिशा में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की हालिया बैठक ने आदिवासी कल्याण योजनाओं पर महत्वपूर्ण चर्चा की। क्या ये योजनाएँ वास्तव में आदिवासी समुदायों के जीवन में सुधार लाने में सक्षम होंगी? जानिए इस बैठक के प्रमुख बिंदुओं के बारे में।

मुख्य बातें

आदिवासी छात्रों के लिए आवासीय शिक्षा पर जोर वन अधिकारों का कार्यान्वयन महिला मैट्रन की नियुक्ति की आवश्यकता आदिवासी कल्याण योजनाओं के लिए बजट में वृद्धि सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित करना

भुवनेश्वर, 5 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) ने सोमवार को ओडिशा में अनुसूचित जनजातियों के कल्याण और विकास से संबंधित योजनाओं की समीक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया। इस बैठक की अध्यक्षता ओडिशा की मुख्य सचिव अनु गर्ग ने की, जिसमें एनसीएसटी की सदस्य डॉ. आशा लाकरा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

बैठक में अनुसूचित जनजाति एवं अनुसूचित जाति विकास, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के आयुक्त-सह-सचिव बी. परमेश्वरन, पंचायती राज एवं पेयजल विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए। आयोग ने राज्य सरकार द्वारा संचालित केंद्र एवं राज्य प्रायोजित योजनाओं के कार्यान्वयन की गहन समीक्षा की ताकि आदिवासी समुदायों तक योजनाओं का लाभ प्रभावी ढंग से पहुंच सके।

डॉ. आशा लाकरा ने विशेष रूप से आदिवासी छात्रों के लिए गुणवत्तापूर्ण आवासीय शिक्षा पर जोर दिया। उन्होंने आश्रय स्कूलों, एकलव्य मॉडल आवासीय स्कूलों और सेवाश्रमों के संचालन की समीक्षा की। विभाग ने जानकारी दी कि वर्तमान में राज्य में कुल 1,765 ऐसे स्कूल संचालित हैं। बैठक में लड़कियों के छात्रावासों में महिला मैट्रन की नियुक्ति, चारदीवारी निर्माण और शौचालयों की उपलब्धता जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। आयोग ने इन सुविधाओं को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।

वन अधिकारों के कार्यान्वयन पर भी महत्वपूर्ण चर्चा हुई। विभाग ने बताया कि अक्टूबर 2025 तक 7.32 लाख व्यक्तिगत वन भूमि अधिकारों के लिए आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 4.64 लाख व्यक्तिगत वन भूमि अधिकार प्रदान किए जा चुके हैं। सामुदायिक वन अधिकारों के मामले में भी प्रगति दर्ज की गई।

बैठक में नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 तथा एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के प्रभावी क्रियान्वयन पर ध्यान केंद्रित किया गया। पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) अधिनियम (पीईएसए) के कार्यान्वयन में आदिवासी समुदायों की सक्रिय भागीदारी को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया।

आयोग ने पीएम-जनमन, मुख्यमंत्री जनजाति जीविका मिशन, पीवीटीजी आजीविका मिशन और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान जैसी प्रमुख योजनाओं की समीक्षा की। इन योजनाओं के माध्यम से आदिवासी समुदायों में आजीविका, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे के विकास पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

डॉ. आशा लाकरा ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर तालमेल और फील्ड स्तर पर प्रभावी निगरानी से ही योजनाओं का वास्तविक लाभ जमीनी स्तर तक पहुंचेगा। उन्होंने आदिवासी लड़कियों के लिए कौशल विकास प्रशिक्षण और उनके लिए उपयुक्त रोजगार अवसरों पर विशेष ध्यान देने की सिफारिश की। आयोग ने विभाग द्वारा आदिवासी कल्याण योजनाओं के लिए बढ़े हुए बजट आवंटन के अनुरोध पर भी सकारात्मक प्रतिक्रिया दी।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह बैठक ओडिशा में आदिवासी कल्याण योजनाओं को सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आयोग की चिंताएँ और उनकी सिफारिशें इस बात को दर्शाती हैं कि सरकार को अपने प्रयासों को और अधिक प्रभावी बनाना होगा। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि ये योजनाएँ न केवल कागजों पर बल्कि वास्तविकता में भी कार्यान्वित हों।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की समीक्षा बैठक का उद्देश्य क्या था?
इस बैठक का उद्देश्य ओडिशा में अनुसूचित जनजातियों के कल्याण और विकास से जुड़े योजनाओं की गहन समीक्षा करना था।
बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा की गई?
बैठक में शिक्षा, स्वास्थ्य, आवासीय सुविधाएँ, वन अधिकार और बजट आवंटन जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई।
राष्ट्र प्रेस
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