सऊदी अरब में फंसे 4,000 भारतीय उमरा यात्री: ओवैसी ने जयशंकर, रिजिजू से तत्काल हस्तक्षेप माँगा
सारांश
मुख्य बातें
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने 22 अक्टूबर 2026 को केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की माँग की, क्योंकि मक्का, मदीना और जिद्दा में लगभग 4,000 भारतीय उमरा यात्री फंसे हुए हैं। इंडिगो, अकासा एयर और एयर इंडिया की वापसी उड़ानें रद्द होने के कारण पिछले दो से तीन सप्ताह से यह यात्री सऊदी अरब में अटके हैं और उन्हें गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
क्या है पूरा मामला
ओवैसी के अनुसार, ये सभी तीर्थयात्री उमरा अदा करने के लिए सऊदी अरब गए थे, लेकिन तकनीकी एवं प्रशासनिक कारणों से उनकी वापसी उड़ानें रद्द हो गईं। नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) की ओर से इंडिगो, अकासा एयर और एयर इंडिया को जिद्दा के लिए उड़ान संचालन की अनुमति न मिलने के कारण यात्रियों की वापसी का रास्ता बाधित हो गया है।
ओवैसी ने यह भी आरोप लगाया कि कई ट्रैवल एजेंट यात्रियों को उनके हाल पर छोड़ चुके हैं, जिससे स्थिति और जटिल हो गई है। कुछ यात्रियों को हैदराबाद में ठहराने की अस्थायी व्यवस्था की गई है, लेकिन समग्र हालात अभी भी गंभीर बने हुए हैं।
ओवैसी की केंद्र सरकार से माँगें
AIMIM प्रमुख ने केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू से तत्काल संज्ञान लेने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट रूप से दो सूत्रीय माँग रखी — पहली, DGCA तीनों एयरलाइनों को फौरन उड़ान की अनुमति दे; और दूसरी, यदि यह संभव न हो तो सरकार विशेष विमान भेजकर सभी फंसे यात्रियों को सुरक्षित भारत वापस लाए।
आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग सबसे अधिक प्रभावित
ओवैसी ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि फंसे हुए अधिकतर यात्री आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग से आते हैं। उनके पास सऊदी एयरलाइंस का महँगा टिकट खरीदकर स्वयं वापस लौटने की सामर्थ्य नहीं है। यह ऐसे समय में आया है जब सऊदी अरब और भारत के बीच उड़ान संचालन से जुड़े नियामकीय विवादों की चर्चा पहले भी उठती रही है।
व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि भारत से प्रतिवर्ष लाखों तीर्थयात्री उमरा और हज के लिए सऊदी अरब जाते हैं, और उड़ान रद्द होने की स्थिति में उनकी निर्भरता सरकारी हस्तक्षेप पर होती है। यह पहली बार नहीं है जब किसी भारतीय नेता ने विदेश में फंसे तीर्थयात्रियों के लिए केंद्र से विशेष निकासी की माँग की हो। केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया और DGCA का रुख इस मामले में निर्णायक होगा।
आने वाले दिनों में यदि सरकार शीघ्र कार्रवाई नहीं करती, तो यह मुद्दा संसद में और व्यापक राजनीतिक बहस का विषय बन सकता है।