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सऊदी में फंसे हज-उमरा यात्रियों को सरकार अपने खर्च पर वापस लाए: NCP-SP प्रवक्ता नसीम सिद्दीकी

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सऊदी में फंसे हज-उमरा यात्रियों को सरकार अपने खर्च पर वापस लाए: NCP-SP प्रवक्ता नसीम सिद्दीकी

सारांश

ईरान-हूती संघर्ष के चलते रियाद समेत सऊदी अरब के कई शहरों पर हमलों के बाद उड़ानें ठप हो गई हैं और सैकड़ों भारतीय हज-उमरा यात्री वहाँ फंसे हैं। NCP-SP प्रवक्ता नसीम सिद्दीकी ने इसे 'आपातकालीन परिस्थिति' बताते हुए सरकार से सरकारी खर्च पर तत्काल वापसी की माँग की है।

मुख्य बातें

NCP-SP के राष्ट्रीय प्रवक्ता नसीम सिद्दीकी ने सऊदी अरब में फंसे हज और उमरा यात्रियों की स्थिति को आपातकालीन परिस्थिति करार दिया।
ईरान युद्ध और हूती विद्रोहियों के संघर्ष के चलते रियाद समेत कई सऊदी शहरों पर हमले हुए हैं, जिससे अनेक उड़ानें रद्द हुई हैं।
सिद्दीकी ने सरकार से माँग की कि फंसे यात्रियों के रहने, खाने-पीने की व्यवस्था की जाए और उन्हें सरकारी खर्च पर स्वदेश लाया जाए।
उन्होंने कहा कि अधिकतर फंसे यात्री गरीब या मध्यमवर्गीय परिवारों से हैं और उन पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
जामिया मिलिया इस्लामिया और JNU के नारे विवाद पर उन्होंने कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बताया और साजिश की जाँच की माँग की।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-शरदचंद्र पवार (NCP-SP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता नसीम सिद्दीकी ने 26 अक्टूबर 2026 को मुंबई में मांग की कि सऊदी अरब में हज और उमरा के लिए गए और वहाँ फंसे भारतीय यात्रियों को सरकार अपने खर्च पर तत्काल स्वदेश वापस लाए। उन्होंने इस स्थिति को 'आपातकालीन परिस्थिति' करार देते हुए कहा कि ईरान और हूती विद्रोहियों के संघर्ष के चलते रियाद समेत सऊदी अरब के कई शहरों पर हमले हुए हैं, जिससे अनेक उड़ानें रद्द हो गई हैं।

संकट की पृष्ठभूमि

सिद्दीकी के अनुसार, चल रहे क्षेत्रीय संघर्ष के कारण सऊदी अरब में हवाई सेवाएँ बाधित हुई हैं, जिससे हज और उमरा के लिए गए सैकड़ों भारतीय यात्री वहाँ फंसे हुए हैं। उन्होंने कहा, 'यह एक आसमानी मुसीबत और आफत है।' उनके अनुसार अधिकतर फंसे यात्री गरीब या मध्यमवर्गीय परिवारों से हैं, जिन पर ठहरने और खाने-पीने का अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है।

यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव के चलते कई देशों की एयरलाइनें अपनी उड़ानें निलंबित कर चुकी हैं। गौरतलब है कि भारत सरकार इससे पहले भी यमन (2015) और यूक्रेन (2022) में फंसे नागरिकों को निकालने के लिए विशेष अभियान चला चुकी है।

सरकार से माँगें

सिद्दीकी ने केंद्र सरकार से तीन स्पष्ट माँगें रखीं — पहली, फंसे यात्रियों के रहने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए; दूसरी, उनके खाने-पीने का इंतजाम किया जाए; और तीसरी, सरकारी खर्च पर उन्हें जल्द से जल्द भारत वापस लाया जाए। उन्होंने कहा कि यह कोई सामान्य असुविधा नहीं, बल्कि 'जान-माल का खतरा' है, इसलिए सरकार को विशेष ध्यान देना चाहिए।

जामिया और JNU नारे विवाद पर बयान

जामिया मिलिया इस्लामिया और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) की दीवारों पर लिखे गए कथित विवादित नारों पर सिद्दीकी ने कहा कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और इसे कोई नहीं ले सकता। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर को वापस लेने की बात होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह के नारों में साजिश हो सकती है और सत्ता पक्ष के लोग भी वेश बदलकर विपक्षी आयोजनों में शामिल हो सकते हैं — हालाँकि इस दावे के समर्थन में उन्होंने कोई ठोस साक्ष्य नहीं दिया।

उन्होंने यह भी कहा कि मुसलमानों के नाम से फर्जी पहचान बनाकर देश में अव्यवस्था फैलाने की कथित साजिश के मामलों में गहन जाँच की आवश्यकता है।

राहुल गांधी के मामले पर टिप्पणी

कांग्रेस नेता राहुल गांधी से जुड़े एक अदालती मामले में फैसले का स्वागत करते हुए सिद्दीकी ने कहा, 'सत्य की हमेशा जीत होती है। इस देश की न्याय व्यवस्था अभी जिंदा है।' उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की हर बात को अनावश्यक रूप से मुद्दा बनाया जाता है।

रैलियों में हिंसा पर चेतावनी

सिद्दीकी ने किसी भी रैली या प्रदर्शन में हिंसा की निंदा करते हुए कहा कि रैलियों के रूट की पहले से जाँच होनी चाहिए और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि कोई आपत्तिजनक नारा न लगाया जाए। उनके अनुसार हिंसा से किसी का फायदा नहीं, बल्कि देश का नुकसान होता है। आने वाले दिनों में सरकार की प्रतिक्रिया और यात्रियों की वास्तविक संख्या पर अधिक स्पष्टता की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें एक महत्त्वपूर्ण तथ्य अनुपस्थित है — सऊदी अरब में फंसे भारतीय यात्रियों की वास्तविक संख्या और उनकी स्थिति का कोई आधिकारिक या स्वतंत्र सत्यापन अब तक सामने नहीं आया है। भारत सरकार ने यमन (2015) और यूक्रेन (2022) में 'ऑपरेशन राहत' और 'ऑपरेशन गंगा' जैसे सफल निकासी अभियान चलाए हैं, इसलिए क्षमता पर सवाल नहीं, बल्कि इच्छाशक्ति और प्राथमिकता का प्रश्न है। इस बयान में हज-उमरा संकट के साथ JNU-जामिया विवाद और राहुल गांधी के मामले को एक ही साँस में जोड़ना, मुद्दे की केंद्रीयता को कमज़ोर करता है। मुख्यधारा की कवरेज इस बात को नज़रअंदाज़ कर रही है कि मध्यमवर्गीय मुस्लिम यात्रियों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ एक व्यापक नीतिगत सवाल उठाता है — युद्धग्रस्त क्षेत्रों में धार्मिक यात्राओं के लिए यात्रा बीमा और आकस्मिक निधि का अभाव।
RashtraPress
26 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सऊदी अरब में भारतीय हज-उमरा यात्री क्यों फंसे हैं?
ईरान युद्ध और हूती विद्रोहियों के संघर्ष के कारण सऊदी अरब के रियाद समेत कई शहरों पर हमले हुए हैं, जिससे अनेक अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द या निलंबित कर दी गई हैं। इस स्थिति में हज और उमरा के लिए गए भारतीय यात्री वहाँ फंस गए हैं और उनके लिए वापसी की व्यवस्था नहीं हो पा रही है।
NCP-SP ने सरकार से क्या माँगें रखी हैं?
NCP-SP के राष्ट्रीय प्रवक्ता नसीम सिद्दीकी ने सरकार से तीन माँगें रखी हैं — फंसे यात्रियों के ठहरने की व्यवस्था, उनके खाने-पीने का इंतजाम, और सरकारी खर्च पर जल्द से जल्द उन्हें भारत वापस लाना। उन्होंने इसे 'आपातकालीन परिस्थिति' बताया है।
क्या भारत सरकार ने इससे पहले भी विदेश में फंसे नागरिकों को निकाला है?
हाँ, भारत सरकार ने 2015 में यमन संकट के दौरान 'ऑपरेशन राहत' और 2022 में यूक्रेन युद्ध के दौरान 'ऑपरेशन गंगा' के तहत हजारों भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला था। इन उदाहरणों को देखते हुए सिद्दीकी ने सरकार से इसी तरह की त्वरित कार्रवाई की माँग की है।
फंसे यात्रियों पर आर्थिक असर कितना गंभीर है?
सिद्दीकी के अनुसार, अधिकतर फंसे यात्री गरीब या मध्यमवर्गीय परिवारों से हैं और उड़ानें रद्द होने के कारण ठहरने व खाने-पीने का अतिरिक्त खर्च उनके लिए भारी आर्थिक बोझ बन गया है। उन्होंने कहा कि इस स्थिति में सरकार को आर्थिक पहल करनी चाहिए।
नसीम सिद्दीकी ने जामिया-JNU नारे विवाद पर क्या कहा?
सिद्दीकी ने कहा कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर को वापस लेने की बात होनी चाहिए। उन्होंने कथित तौर पर आरोप लगाया कि इस तरह के नारों में साजिश हो सकती है और सत्ता पक्ष के लोग भी वेश बदलकर विपक्षी आयोजनों में शामिल हो सकते हैं, हालाँकि इसके लिए उन्होंने कोई ठोस साक्ष्य नहीं दिया।
राष्ट्र प्रेस
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