25 अक्टूबर 2026
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सऊदी अरब में फंसे 1500 भारतीय उमराह यात्री, परिजनों ने PM मोदी से मांगी जल्द वापसी

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सऊदी अरब में फंसे 1500 भारतीय उमराह यात्री, परिजनों ने PM मोदी से मांगी जल्द वापसी

सारांश

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच लगभग 1,500 भारतीय उमराह तीर्थयात्री सऊदी अरब में फंसे हैं। रहने-खाने की व्यवस्था है, लेकिन वापसी की कोई तिथि नहीं। बुजुर्ग, बीमार यात्री और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित — परिजनों की PM मोदी से सीधी गुहार।

मुख्य बातें

पश्चिम एशिया में तनाव और उड़ानें बाधित होने के कारण लगभग 1,500 भारतीय उमराह यात्री सऊदी अरब में फंसे हैं।
12 अक्टूबर 2026 से टूर ऑपरेटर इमरान राहतुल्लाह शेख की टीम यात्रियों की देखभाल कर रही है।
कई यात्री मधुमेह और हृदय रोग जैसी स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित हैं; दवाइयों की कमी की चिंता।
परिजनों ने PM नरेंद्र मोदी और CM योगी आदित्यनाथ से हस्तक्षेप कर शीघ्र वापसी सुनिश्चित करने की अपील की।
टूर ऑपरेटरों ने सरकार से आर्थिक और प्रशासनिक सहायता की माँग की है।

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और उड़ानों के बाधित होने के कारण लगभग 1,500 भारतीय उमराह तीर्थयात्री फिलहाल सऊदी अरब में फंसे हुए हैं। 25 अक्टूबर 2026 को मुंबई से आई रिपोर्टों के अनुसार, परिजनों और टूर ऑपरेटरों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि जैसे अन्य देशों में फंसे भारतीयों को स्वदेश लाया जा रहा है, वैसे ही इन यात्रियों की भी सुरक्षित और शीघ्र वापसी सुनिश्चित की जाए। यात्रियों के रहने-खाने की व्यवस्था बताई जा रही है, लेकिन वापसी की तारीख को लेकर कोई स्पष्टता नहीं है।

परिजनों की पीड़ा

सोमैया मोहम्मद बिलाल ने बताया कि उनके खाला-खालू पिछले 14 दिनों से सऊदी अरब में फंसे हैं। वे 20-21 अक्टूबर को वापस लौटने वाले थे, लेकिन उड़ानें बंद होने के कारण भारत नहीं आ सके। उन्होंने केंद्र सरकार से अन्य फंसे भारतीयों की तर्ज पर इन यात्रियों की भी सुरक्षित वापसी की मांग की।

सना आमिर खान ने बताया कि उनके पति उमराह यात्रा पर गए हुए हैं और निर्धारित समय पर नहीं लौट सके। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से व्यक्तिगत हस्तक्षेप कर यात्रियों की शीघ्र वापसी सुनिश्चित करने की अपील की।

कयास नामक युवक ने बताया कि उनके चचेरे भाई और खाला-खालू भी सऊदी अरब में हैं। उनके अनुसार यात्रियों को अच्छे होटलों में ठहराया गया है और मुफ्त भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है, लेकिन वापसी की अनिश्चितता सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है।

बुजुर्ग और बीमार यात्रियों की मुश्किलें

परिजनों का कहना है कि लंबे समय तक विदेश में फंसे रहने के कारण बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है। एक परिजन ने बताया कि उनके परिवार के चार सदस्य सऊदी अरब गए थे, जिन्हें 16 अक्टूबर को लौटना था, लेकिन उनकी वापसी की तारीख बार-बार बदल रही है। इनमें से दो लोग मधुमेह और एक व्यक्ति हृदय रोग से पीड़ित हैं, जिससे परिवार की चिंता और गहरी हो गई है। कई बुजुर्ग और बीमार यात्रियों को आवश्यक दवाइयों और स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरत बताई जा रही है।

टूर ऑपरेटरों पर आर्थिक बोझ

उमराह यात्रियों को सऊदी अरब भेजने वाले टूर ऑपरेटर इमरान राहतुल्लाह शेख ने बताया कि उड़ानें बंद होने के बाद से लगभग 1,500 भारतीय तीर्थयात्री वहाँ फंसे हुए हैं। उनके अनुसार 12 अक्टूबर से उनकी टीम यात्रियों की देखभाल कर रही है, लेकिन लंबे समय तक यह व्यवस्था जारी रखना आर्थिक दृष्टि से कठिन होता जा रहा है।

शेख ने कहा कि सरकार से लगातार संपर्क बना हुआ है और सकारात्मक आश्वासन मिला है, लेकिन ठोस व्यवस्था की प्रतीक्षा है। उन्होंने केंद्र सरकार से आर्थिक और प्रशासनिक सहायता की माँग की है।

सरकार से सीधी अपील

सऊदी अरब में ठहरे कई तीर्थयात्रियों ने वीडियो संदेश जारी कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मदद की गुहार लगाई है। यात्रियों ने बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और वापसी में हो रही देरी पर चिंता जताते हुए सरकार से जल्द स्वदेश वापसी की व्यवस्था करने की अपील की है। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव के कारण हवाई संचालन पहले से ही बाधित है और कई भारतीय नागरिक विभिन्न देशों में फंसे हुए हैं।

गौरतलब है कि उमराह यात्रा पर जाने वाले यात्रियों की संख्या हर साल लाखों में होती है और भारत दुनिया के प्रमुख उमराह-प्रेषक देशों में शामिल है। सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन टूर ऑपरेटरों के अनुसार बातचीत जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि प्रशासनिक विफलता का भी संकेत है — जब हजारों नागरिक विदेश में फंसे हों और सरकार की ओर से कोई ठोस सार्वजनिक बयान न आए, तो 'सकारात्मक आश्वासन' पर्याप्त नहीं है। भारत ने कोविड और अन्य संकटों में 'वंदे भारत मिशन' जैसे बड़े निकासी अभियान चलाए हैं, इसलिए क्षमता पर सवाल नहीं, बल्कि प्राथमिकता पर है। बीमार और बुजुर्ग तीर्थयात्रियों का लंबे समय तक अनिश्चितता में रहना और टूर ऑपरेटरों पर असहनीय आर्थिक बोझ — ये दोनों मिलकर सरकार पर जल्द और पारदर्शी कार्रवाई का दबाव बढ़ाते हैं।
RashtraPress
25 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सऊदी अरब में कितने भारतीय उमराह यात्री फंसे हैं?
टूर ऑपरेटरों के अनुसार लगभग 1,500 भारतीय उमराह तीर्थयात्री सऊदी अरब में फंसे हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण उड़ानें बाधित होने से वे 12 अक्टूबर 2026 के बाद से वापस नहीं लौट सके हैं।
फंसे यात्रियों को वहाँ कौन-सी सुविधाएँ मिल रही हैं?
परिजनों और टूर ऑपरेटरों के मुताबिक यात्रियों को अच्छे होटलों में ठहराया गया है और मुफ्त भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। हालाँकि बुजुर्ग और बीमार यात्रियों को दवाइयों की समस्या है और वापसी की तारीख को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
परिजनों ने PM मोदी से क्यों अपील की है?
परिजनों का कहना है कि जिस तरह सरकार ने पहले अन्य देशों में फंसे भारतीयों को स्वदेश वापस लाया है, उसी तरह उमराह यात्रियों को भी जल्द लाया जाए। कई यात्री बीमार हैं और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, इसलिए सीधे PM मोदी और CM योगी आदित्यनाथ से हस्तक्षेप की माँग की गई है।
टूर ऑपरेटरों पर इसका क्या असर पड़ा है?
टूर ऑपरेटर इमरान राहतुल्लाह शेख के अनुसार 12 अक्टूबर से यात्रियों की देखभाल जारी है, जिससे आर्थिक बोझ लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से आर्थिक और प्रशासनिक सहायता की माँग की है और बताया है कि सरकार से बातचीत जारी है।
सरकार ने अब तक क्या कदम उठाए हैं?
अब तक केंद्र सरकार की ओर से कोई आधिकारिक सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है। टूर ऑपरेटरों के अनुसार सरकारी अधिकारियों से संपर्क बना हुआ है और सकारात्मक आश्वासन मिला है, लेकिन वापसी की कोई ठोस तारीख अभी तय नहीं हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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